जाएगी राहुल गांधी की संसद सदस्यता? बीजेपी सांसद की मांग, दिया 1976 में सुब्रमण्यम स्वामी को बर्खास्त करने का उदाहरण

नई दिल्ली

राहुल गांधी पर बीजेपी के लोग लगातार हमलावर रहते हैं। अब बीजेपी के सीनियर सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता खत्म करने की मांग की है। न्यूज एजेंसी ANI ने शुक्रवार को सूत्रों के हवाले से बताया कि बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे शुक्रवार को लोकसभा विशेषाधिकार समिति के सामने पेश हुए और कांग्रेस नेता राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग की।सांसद निशिकांत दुबे ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान “भ्रामक, अपमानजनक, असंसदीय और आपत्तिजनक” बयान देने के लिए राहुल गांधी के खिलाफ प्रिविलेज मोशन की मांग की।

लोकसभा सांसद सुनील सिंह ने निशिकांत दुबे को समिति में गवाह के तौर पर पेश होने को कहा था। पैनल के प्रमुख सुनील सिंह के अलावा, आज मौजूद समिति के अन्य सदस्यों में TMC सांसद कल्याण बनर्जी, कांग्रेस के के. सुरेश, सीपी जोशी, दिलीप घोष, राजू बिस्टा और बीजेपी के गणेश सिंह शामिल थे। के. सुरेश और कल्याण बनर्जी जैसे सांसदों ने तर्क दिया कि इस तरह के उल्लंघन के लिए कोई आधार नहीं है क्योंकि वायनाड के सांसद का भाषण पहले ही हटा दिया गया था।

सूत्रों के मुताबिक DMK सासंद टी.आर. बालू आज कमेटी के सामने मौजूद नहीं थे, लेकिन उन्होंने पैनल को लिखा है कि ऐसा कोई विशेषाधिकार नहीं है, जो राहुल के खिलाफ कोई दलील दे सके। इस मुद्दे पर अपने तर्क में निशिकांत दुबे ने कहा कि भले ही बहस राष्ट्रपति के अभिभाषण के प्रस्ताव के धन्यवाद प्रस्ताव में थी, राहुल गांधी का जवाब काफी हद तक गौतम अडानी के बारे में था और वास्तव में अपने भाषण में अडानी का जिक्र राहुल गांधी ने कम से कम 75 बार किया था।

इसके अलावा झारखंड के सांसद ने अपना मामला यह कहते हुए पेश किया कि राहुल गांधी के खिलाफ तीन विशेषाधिकार नोटिसों लाए जाने की जरूरत है। सूत्रों ने बताया कि उन्होंने कहा कि पहला रूल 352 (2) के तहत, एक सांसद केवल पूर्व सूचना के साथ और अध्यक्ष के अनुमोदन के बिना किसी साथी सांसद पर टिप्पणी कर सकता है। राहुल ने पीएम मोदी पर टिप्पणी कर इसका उल्लंघन किया।

दूसरा, निशिकांत दुबे ने 1976 की उस घटना का भी हवाला दिया जब सुब्रमण्यम स्वामी को राज्यसभा से बर्खास्त कर दिया गया था – जब संसद और पीएम के खिलाफ आरोप लगाए गए थे। निशिकांत दुबे ने कहा कि अब भी यही स्थिति है – प्रधानमंत्री के आचरण पर आक्षेप करना लोकतंत्र को कमजोर कर रहा है।

तीसरा, सूत्रो ने बताया कि निशिकांत दुबे ने प्रमाणित किया कि राहुल गांधी का भाषण हटा दिया गया था, लेकिन जब उन्होंने सोशल मीडिया पर जांच की, तो ट्विटर और यूट्यूब चैनलों पर गांधी के हैंडल में अभी भी निष्कासित भाषण और ट्वीट थे। यह स्वयं अध्यक्ष के अधिकार और विवेक को कमजोर करता है।सूत्रों ने बताया कि दुबे ने कहा, “किसी भी देश के नेता या देश के प्रमुख के अधिकार और स्थिति को कम करके देखना राष्ट्रीय हित से समझौता करना है।”

सूत्रों ने बताया कि एक और तर्क जो निशिकांत दुबे ने दिया वो यह कि राहुल गांधी द्वारा इज़राइल और बांग्लादेश में सूचीबद्ध अडानी परियोजनाओं पर लगाए गए आरोप भारत के हित के खिलाफ हैं। निशिकांत दुबे ने 2011 में भारतीय प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह और बांग्लादेशी प्रधान मंत्री शेख हसीना के बीच भारत और बांग्लादेश के बीच बिजली संयंत्र समझौते को भी प्रमाणित किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस द्वारा यह तर्क दिया जा रहा है कि बांग्लादेश में अडानी समूह को बिजली संयंत्र मोदी शासन के दौरान मिला यह झूठ है। सूत्रों ने कहा, “इसलिए निशिकांत दुबे अपने विशेषाधिकार प्रस्ताव के जरिए राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग की।” आने वाले दिनों में, राहुल गांधी को पैनल द्वारा विशेषाधिकार प्रस्ताव के संबंध में उसके समक्ष पेश होने के लिए कहा जा सकता है।

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