बिहार में गिरा भूजल स्तर, पीने के पानी की हो सकती है किल्लत, इन जिलों का बुरा हाल

नई दिल्ली,

देश के कई राज्यों में गिरता हुआ भूजल स्तर चिंता का सबब बना हुआ हैं. पंजाब और हरियाणा में इसकी स्थिति काफी बदतर है. ऐसे ही हालात बिहार के कुछ जिलों में भी हैं. राज्य के हालिया इकोनॉमिक सर्वे (2022-23) के मुताबिक दो सालों से यहां के भूजल स्तर में काफी गिरावट आई है. इसके अलावा पानी की गुणवत्ता भी खराब हुई है. प्री-मानसून भूजल स्तर के आकलन में औरंगाबाद, सारण, सीवान, गोपालगंज, पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर, खगड़िया, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, पूर्णिया, किशनगंज, अररिया, कटिहार में भूजल स्तर में गिरावट दर्ज किया गया है.

गिरते भूजल स्तर और गुणवत्ता पर सरकार का आया ये बयान
बिहार लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के मंत्री ललित कुमार यादव ने कहा कि विभाग इस मामले की जांच कर रहा है. हम पानी की गुणवत्ता में आ रही गिरावट का पता लगाने और इसे सही करने की योजना पर काम कर रहे हैं. भूजल स्तर में गिरावट को रोकने के उपायों पर राज्य सरकार के अन्य संबंधित विभागों के साथ भी चर्चा की जाएगी. बिहार आर्थिक सर्वेक्षण (2022-23) के अनुसार 2021 में प्री-मानसून अवधि के दौरान औरंगाबाद, नवादा, कैमूर और जमुई जैसे जिलों में भूजल स्तर जमीन से कम से कम 10 मीटर नीचे था.

कहां कितना है भूजल स्तर
औरंगाबाद में प्री-मानसून भूजल स्तर 2020 में 10.59 मीटर था. 2021 में यह घटकर 10.97 मीटर रह गया है. अन्य जिलों जैसे सारण (2020 में 5.55 मीटर से 2021 में 5.83 मीटर), सीवान (2020 में 4.66 मीटर और 2021 में 5.4 मीटर), गोपालगंज (2020 में 4.10 मीटर और 2021 में 5.35 मीटर), पूर्वी चंपारण ( 2020 में 5.52 मीटर और 2021 में 6.12 मीटर), सुपौल (2020 में 3.39 मीटर और 2021 में 4.93 मीटर) रह गया है.

30,207 ग्रामीण वार्डों में भूजल की गुणवत्ता प्रभावित पाई गई
रिपोर्ट के मुताबिक बिहार में बड़े पैमाने में जल संसाधन है, इसके बावजूद हाल के वर्षों में भूजल की गुणवत्ता पर असर पड़ा है. साल 2021 तक, बिहार में कुल 968 नहरें, 26 जलाशय और बड़ी संख्या में राजकीय नलकूप थीं. इसके यहां गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों की पानी में बैक्टेरियल आबादी भी सामान्य से ज्यादा है. ऐसा होने के पीछे गंगा और उसके किनारे स्थित शहरों के सीवेज की भूमिका मुख्य है. बिहार के 1,14,651 ग्रामीण वार्डों में से 29 जिलों में फैले 30,207 ग्रामीण वार्डों में भूजल की गुणवत्ता प्रभावित पाई गई. इसके चलते राज्य में कृषि, औद्योगिक और घरेलू गतिविधियां भी प्रभावित होंगी.

दूषित पानी से स्वास्थ्य को खतरा
राज्य सरकार के पीएचईडी ने पानी की जांच और जांच के नतीजे उपयोगकर्ताओं के साथ साझा करने के लिए एक गुणवत्ता निगरानी प्रोटोकॉल विकसित किया है. पानी की गुणवत्ता पर गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट मनोज कुमार ने कहा कि ठीक से उपचारित पानी का सेवन मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा नहीं है. पीने के पानी के दूषित होने से कई प्रकार की बीमारियां जैसे टाइफाइड, डायरिया, हेपेटाइटिस, हैजा और अन्य वायरल संक्रमण होते हैं. भूजल ज्यादातर सीवेज लाइनों में या सेप्टिक टैंक के रिसाव से दूषित हो जाता है. इस पानी में ठोस पदार्थ उच्च स्तर में होता है. इसे पीने योग्य बनाने के लिए इस ठोस पदार्थ को कम करना जरूरी होता है.Live TV

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