कनार्टक: चुनावी माहौल में भाजपा पर भ्रष्टाचार का साया, BJP विधायक को जमानत देने के खिलाफ सुनवाई करेगी SC

नई दिल्ली

कर्नाटक असेंबली इलेक्शन का ऐलान इस महीने के अंत तक हो सकता है। चुनावी माहौल के बीच भाजपा शासित इस राज्य में भ्रष्टाचार का साया पसरता नजर आ रहा है। पिछले दिनों भारतीय जनता पार्टी के विधायक मदल विरुपक्षप्पा को रिश्वत मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट ने अंतरिम अग्रिम जमानत दे दी थी।

कर्नाटक लोकायुक्त हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने देश की सर्वोच्च अदालत पहुंच गए हैं। मंगलवार 14 मार्च, 2023 की सुबह भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के सामने मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने के लिए उल्लेखित किया गया। सुप्रीम कोर्ट जल्द से जल्द सुनवाई के लिए राजी हो गया है। हालांकि इसके लिए लोकायुक्त की तरफ से पेश वकील को काफी अनुरोध करना पड़ा।

कैसे सूचीबद्ध हुआ मामला?
वकील ने सीजेआई से अनुरोध किया कि मामले को जल्द से जल्द सूचीबद्ध किया जाए। CJI ने कहा, शुक्रवार को सुनवाई होगी। वकील फिर अनुरोध किया नहीं किया कि क्या सुनवाई पहले नहीं हो सकती। इसके बाद सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ने कहा कि आप जस्टिस संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने इस मामले का उल्लेख कर सकते हैं। दरअसल सीजेआई संविधान पीठ के मामले की सुनवाई व्यस्त थे। सीजेआई ने वकील को जस्टिस कौल के सामने भेज दिया। वहां भी वकील ने याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने की मांग की।

वकील ने सीजेआई से अनुरोध किया कि मामले को जल्द से जल्द सूचीबद्ध किया जाए। CJI ने कहा, शुक्रवार को सुनवाई होगी। वकील फिर अनुरोध किया नहीं किया कि क्या सुनवाई पहले नहीं हो सकती। इसके बाद सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ने कहा कि आप जस्टिस संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने इस मामले का उल्लेख कर सकते हैं। दरअसल सीजेआई संविधान पीठ के मामले की सुनवाई व्यस्त थे। सीजेआई ने वकील को जस्टिस कौल के सामने भेज दिया। वहां भी वकील ने याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने की मांग की।

वकील की जल्दीबाजी को समझने के लिए जज ने पूछा- इतनी जल्दी क्या है? क्या अग्रिम जमानत रद्द करना कोई मुद्दा है? वकील ने कहा- आरोपी मौजूदा विधायक हैं, जिसके घर से भारी मात्रा में नकदी जब्त की गई है। इतनी सुनते ही जज ने कहा कि मामले को जल्द से जल्द सूचीबद्ध किया जाए। साथ ही जज ने हाईकोर्ट पर टिप्पणी की- हाईकोर्ट ने दिमाग तो लगाया है ना।

क्या है भाजपा विधायक का मामला?
दो मार्च को लोकायुक्त पुलिस ने कथित तौर बैंगलोर जल आपूर्ति और सीवरेज बोर्ड के मुख्य लेखा अधिकारी और भाजपा विधायक के बेटे प्रशांत मदल को 40 लाख रुपये की रिश्वत लेते समय गिरफ्तार किया था। यह गिरफ्तारी प्रशांत के पिता के कार्यालय यानी विधायक कार्यालय के भीतर से हुई।

इसके बाद छापेमारी शुरू हुई। लोकायुक्त पुलिस ने कथित तौर पर भाजपा विधायक और राज्य पीएसयू के अध्यक्ष के कार्यालय से 2.02 करोड़ रुपये की नकदी बरामद की। फिर विधायक पुत्र के आवास से 6.10 करोड़ रुपये बरामद किए गए।

कार्रवाई के बाद विधायक के ने कर्नाटक साबुन और डिटर्जेंट लिमिटेड (केएसडीएल) के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया, यह राज्य सरकार का ही एक सार्वजनिक उपक्रम है। FIR में विधायक को पहले आरोपी और उनके बेटे को दूसरे आरोपी के रूप में नामजद किया गया है।

एफआईआर बेंगलुरु के केमिक्सिल कॉरपोरेशन में पार्टनर श्रेयस कश्यप की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई थी, जिन्होंने आरोप लगाया था कि प्रशांत मदल ने केएसडीएल टेंडर के लिए रिश्वत के रूप में 81 लाख रुपये की मांग की थी। दिलचस्प यह है कि प्रशांत इससे पहले खुद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) में तैनात थे।इस मामले में पांच व्यक्तियों (प्रशांत सहित) को हिरासत में भी लिया गया था। विधायक फरार थे। फिर उनकी याचिका कर्नाटक हाईकोर्ट पहुंची। जहां सिंगल जज की बेंच ने सुनवाई के बाद उन्हें अग्रिम जमानत दे दी।

कार्रवाई की टाइमिंग क्या कहती है?
चुनाव से महज कुछ माह पहले विपक्षी दल राज्य के भीतर भ्रष्टाचार के मामलों को बड़े पैमाने पर उठे रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह राज्य के चुनाव के लिए एक्टिव हो चुके हैं। ऐसे में कुछ महीने पहले तक मृत मानी जाने वाली भ्रष्टाचार-रोधी एजेंसी अचानक एक्टिव होती है और अभियान चला देती है। कर्नाटक में सत्तारूढ़ बीजेपी के एक विधायक के यहां छापा पड़ जाता है।

भ्रष्टाचार के आरोप में 72 वर्षीय भाजपा विधायक मदल विरुपाक्षप्पा पर हुई कार्रवाई में कई दिलचस्प बातें हैं। उन पर और उनके बेटे पर कच्चे माल की आपूर्ति का ठेका देने के लिए 81 लाख रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप है। विरुपाक्षप्पा को पूर्व मुख्यमंत्री और लिंगायत दिग्गज बीएस येदियुरप्पा का करीबी सहयोगी माना जाता है। वे मौजूदा मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई की उपजाति से ताल्लुक रखते हैं।

विरुपक्षप्पा को जुलाई 2020 में केएसडीएल का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था, जब येदियुरप्पा सीएम थे। बेटा प्रशांत बेंगलुरु जल आपूर्ति और सीवरेज बोर्ड के वित्तीय सलाहकार और सीएफओ थे। लोकायुक्त का दावा है कि उसने प्रशांत को 40 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा और पिता-पुत्र की जोड़ी से 8.12 करोड़ रुपये बेहिसाब नकदी जब्त की। प्रशांत हिरासत में है। विरुपाक्षप्पा समय रहते गिरफ्तारी से बचने में कामयाब रहे और अब “फरार” हैं।

मध्य कर्नाटक के चन्नागिरी से विधायक विरुपाक्षप्पा येदियुरप्पा के करीबी हैं। उन्होंने इस नजदीकी को कभी छिपाईं भी नहीं। जब येदियुरप्पा को 2021 में भाजपा द्वारा मुख्यमंत्री पद छोड़ने के लिए मजबूर किया गया, तो विरूपक्षप्पा के ड्राइवर को टेलीविजन कैमरों के सामने आंसू बहाते देखा गया था।

इंडियन एक्सप्रेस पर प्रकाशित अपनी रिपोर्ट में जॉनशन टीए कहते हैं,
“कर्नाटक सत्ता के हलकों में एक और सवाल घूम रहा है। क्या लोकायुक्त कार्रवाई का मतलब यह कि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और राज्य पार्टी प्रमुख डीके शिवकुमार जैसे कांग्रेस नेताओं से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामलों को फिर से खोला जा सकता है? भाजपा अक्सर कांग्रेस पर 2015 में लोकायुक्त की पुलिस शक्तियों को वापस लेकर भ्रष्टाचार की जांच को रोकने का आरोप लगाती रही है। इन प्रश्नों में से एक का उत्तर शायद सबसे स्पष्ट है। विरुपाक्षप्पा पर कार्रवाई का कदम बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा कर्नाटक में चुनाव से पहले वहां कि स्थिति पर नियंत्रण हासिल करने का एक प्रयास है। खासकर भ्रष्टाचार के मुद्दे पर क्योंकि राज्य की विपक्षी कांग्रेस इस मुद्दे को लगातार उठा रही है।”

विरुपाक्षप्पा के बेटे की गिरफ्तारी के तुरंत बाद बोम्मई ने सुझाव दिया कि “आबकारी और श्रम विभाग के घोटालों सहित पूरे बोर्ड में इस तरह की और कार्रवाई होगी। भाजपा सरकार ने भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए लोकायुक्त की फिर से स्थापना की है। भ्रष्टाचार विरोधी इकाई के अभाव में कांग्रेस के शासन काल में कितनी ही घटनाएं हुईं और उन्हें दबा दिया गया। अब गलती करने वालों को दंडित किया जाएगा। कांग्रेस एक साफ पार्टी होने का दावा नहीं कर सकती। कांग्रेस के मंत्रियों पर पहले भी मामले दर्ज हो चुके हैं। अब लोकायुक्त द्वारा हर चीज की जांच की जा रही है।”

वैसे सीएम बोम्मई परिवार के सदस्यों को व्यवसायों में लाभ देने के कई आरोपों का सामना कर रहे हैं। कांग्रेस ने हाल ही में सीएमओ से कथित मंजूरी के बाद एक निजी फर्म द्वारा शीरे की अवैध खरीद का दावा किया था। 23 फरवरी को बेल्लारी में एक रैली को संबोधित करते हुए शाह ने कहा था, “कृपया एक बार फिर मोदीजी पर भरोसा करें, कृपया एक बार फिर येदियुरप्पा पर भरोसा करें। हम ऐसा शासन प्रदान करेंगे जो कर्नाटक को पांच साल में भ्रष्टाचार से मुक्त करेगा और इसे दक्षिण भारत में नंबर 1 राज्य बना देगा।”

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