भारत को खत्‍म करने का सपना देखने वाले पाकिस्‍तान की अब किसी को जरूरत नहीं!

कराची

पाकिस्‍तान में इस समय आर्थिक संकट के बीच राजनीतिक उथल-पुथल भी जारी है। देश के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को लेकर अक्‍सर खबरें मीडिया में रहती हैं। देश के विशेषज्ञों की मानें तो पाकिस्‍तान में जिस तरह की राजनीति हो रही है, उससे साफ नजर आता है कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ बस नागरिकों के मौलिक अधिकारों को खत्‍म करने में लगे हुए हैं। पाकिस्‍तान स्थित सेंटर फॉर रिसर्च एंड सिक्‍योरिटी स्‍टडीज (CRSS) के डायरेक्‍टर इम्तिजयाज गुल के मुताबिक जहां एक तरफ पाकिस्‍तान में हर तरह से भूचाल मचा हुआ है तो वहीं भारत में एक अलग ही तरह का माहौल है। इम्तियाज गुल, विदेश मामलों के जानकार हैं।

भारत को बताया जाता है दुश्‍मन
गुल की मानें तो भारत वह देश है जिसे हमेशा से पाकिस्‍तान ने दुश्‍मन के तौर पर देखा है। बचपन से ही इस देश में सिखाया जाता है कि भारत वह देश जिसे बस किसी भी तरह से कुचल देना और बर्बाद कर देना है। लेकिन जिस देश को कुचलने और खत्‍म करने का सपना देखा गया अब वह असाधारण तौर पर आगे बढ़ रहा है। गुल की मानें तो आज भारत तो कुछ भी है, वह उस विदेश नीति की वजह से है और इसी नीति की वजह से देश को असीमित फायदे हो रहे हैं। हाल ही में भारत में जी-20 देशों के विदेश मंत्री पहुंचे। इस मीटिंग से अलग अमेरिका और भारत के राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (NSAs) की एक मीटिंग हुई। गुल इस बात का जिक्र करना भी नहीं भूले कि यह मीटिंग इनीशिएटिव ऑफ क्रिटिकल इमरजिंग टेक्‍नोलॉजी (iCET) के मौके पर 31 जनवरी को वॉशिंगटन में हुई थी।

भारत के साथ अमेरिका की बड़ी डील
गुल के मुताबिक मीटिंग के बाद दोनों देशों ने एक दूसरे के साथ रहने की बात दोहराई। साथ ही उन तरीकों को तलाशने की भी बात कही जिसके जरिए टेक्‍नोलॉजी को सही दिशा में प्रयोग किया जा सके। गुल ने मई 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडेन के उस ऐलान का भी जिक्र किया जिसमें रणनीतिक तकनीकी साझेदारी को और आगे बढ़ाने और रक्षा उद्योग के आपसी सहयोग को मजबूत करने की बात कही गई थी।

गुल ने कहा कि दोनों देशों के बीच हर स्‍तर पर संपर्क हो रहा है। मार्च 2000 में तत्‍कालीन अमेरिकी राष्‍ट्रपति बिल क्लिंटन ने अमेरिका-भारत के रिश्‍तों की जो नींव रखी थी वह साल 2006 में एक नए स्‍तर पर पहुंच गईं। इस साल भारत और अमेरिका के बीच असैन्‍य परमाणु तकनीक सहयोग समझौता साइन हुआ था।

पाकिस्‍तान पुराने दौर में लौट रहा
गुल का कहना था कि तब से ही भारत लगातार मजबूत हो गया है। आज वह अमेरिका की हिंद-प्रशांत नीति का अहम हिस्‍सा है। साथ ही क्‍वाड से लेकर यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU), एशिया-यूरोपियन मीटिंग (ASEM), ब्रिक्‍स से लेकर ओआईसी तक में पर्यवेक्षक के तौर पर मौजूद है। मगर पाकिस्‍तान अब कहीं नजर ही नहीं आता। उनकी मानें तो अब सवाल पूछना चाहिए कि क्‍या अब पाकिस्‍तान दुनिया के लिए जरूरी है भी या नहीं?

सरकार का ध्‍यान स्थिति पर नहीं
उन्‍होंने कहा कि सरकार देश की स्थिति पर ध्‍यान देने की जगह सिर्फ इमरान खान और उनके साथियों को परेशान कैसे किया जाए, इस पर ही विचार करने में लगी है। हर कोई जानना चाहता है कि आखिर देश का पूर्व पीएम अचानक कैसे एक अपराधी, आतंकवादी और विद्रोही बन गया है। जिस तरह से विपक्ष के नेताओं और जर्नलिस्‍ट्स पर देशद्रोह के केस लगातार उन्‍हें गिरफ्तार किया जा रहा है, वह देश की वर्तमान स्थिति को बताता है। गुल के मुताबिक पाकिस्‍तान सन् 1970 और 1980 के दशक में लौट चुका है जब अमेरिकी सैन्‍य तानाशाही का दौर था। देश में विपक्ष और मीडिया वर्कर्स की गिरफ्तारियां, गैरकानूनी हिरासत, उत्‍पीड़न एक आम बात थी

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