अब समंदर में डूबे ड्रोन के मलबे को लेकर टेंशन, रूस बोला- ब्लैक सी से निकालेंगे, US का विरोध

नई दिल्ली,

काला सागर में रूस ड्रोन को गिराने के बाद रूस और अमेरिका के बीच तनावों का नया दौर शुरू हो गया है. अब दोनों देश MQ-9 ड्रोन का मलबा हासिल करने के लिए दम भर रहे हैं. ये ड्रोन काला सागर की गहराइयों में पड़ा है. दरअसल ड्रोन के इस मलबे में वो तकनीक छिपी है जिसके जरिये अमेरिका अपने बेहद खुफिया मिशन को अंजाम देता है.

अब अमेरिका किसी भी हालत में नहीं चाहता है कि MQ-9 ड्रोन का मलबा रूब के हाथ लगे. लेकिन रूसी अधिकारी इस बात का संकेत दे चुके हैं कि वे काला सागर में डूब चुके ड्रोन का मलबा निकालने के लिए हरसंभव कोशिश करेंगे. इस बीच अमेरिका की अलग ही प्लानिंग है. अमेरिका ने कहा है कि उसके अधिकारी पूरी कोशिश करेंगे कि इस ड्रोन में मौजूद कोई भी खुफिया सूचना गलत हाथों में न पड़ जाए.

मलबे में छिपी खुफिया सूचनाओं का क्या?
अमेरिका के नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल कोऑर्डिनेटर फॉर स्ट्रैटेजिक कम्युनिकेशन जॉन किर्बी ने कहा है कि जिस ड्रोन को रूसी जेट ने समंदर में डुबो दिया उसका मलबा अबतक नहीं मिला है. सीएनएन से बात करते हुए उन्होंने कहा कि हम पूरे इत्मीनान से ये नहीं कह सकते हैं कि इस ड्रोन को हम रिकवर कर पाएंगे या नहीं. काला सागर में जिस जगह पर ये ड्रोन गिरा है वो बहुत ही गहरा समंदर है. हम इस बात का आकलन कर रहे हैं कि क्या यहां किसी तरह की रिकवरी की जा सकती है? किर्बी ने कहा कि अमेरिका इस बात की पूरी कोशिश कर रहा है कि ड्रोन का मलबा गलत हाथों में न जाए.

जान किर्बी के अनुसार अमेरिकी अधिकारियों ने ऐसे कुछ कदम उठाए हैं जिससे इस ड्रोन में मौजूद सूचनाएं अनाधिकृत व्यक्ति/एजेंसी के पास न चली जाए. न ही कोई व्यक्ति या संस्था इस ड्रोन के इस मलबे में मौजूद तकनीकी जानकारियों को निकालने की कोशिश कर सके.

रिमोट पायलट पर अचानक ड्रोन को डुबोने का दबाव आया
बता दें कि जब मंगलवार को ब्लैक सी पर रूसी जेट विमानों से अमेरिकी ड्रोन टकराया था तो इस ड्रोन का प्रोपेलर क्षतिग्रस्त हो गया था. इसके बाद इस ड्रोन के रिमोट पायलट पर दबाव था कि वह इस ड्रोन को काला सागर में गिरा दे. रिमोट पायलट ने ऐसा ही किया और ड्रोन को समंदर में डुबो दिया. अमेरिका अधिकारियों ने ये नहीं कहा है कि ये ड्रोन समंदर में किस विशेष स्थान पर गिरा है.

इस बीच रूस के फॉरेन इंटेलिजेंस सर्विस के चीफ सर्गेई नारिशकिन ने कहा है कि रूस के पास काला सागर की गहराई से ड्रोन के टुकड़े बरामद करने की तकनीकी क्षमता है. रूस के सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव निकोलई पेत्रुशेव ने कहा है कि मुझे नहीं पता कि हम मलबे को फिर से प्राप्त कर सकते हैं या नहीं, लेकिन हमें निश्चित रूप से ऐसा करना होगा और हम ऐसा करेंगे.

कालासागर पर हुई थी टक्कर
बता दें कि मंगलवार को काला सागर के ऊपर अंतर्राष्ट्रीय जल सीमा में अमेरिका के MQ-9 ड्रोन की टक्कर रूस के दो जेट विमानों से हो गई थी. इस टक्कर के बाद अमेरिका को अपने ड्रोन को काला सागर में डुबोना पड़ा था.

खास है ड्रोन की तकनीक और खुफिया सूचनाएं
इस घटना में जो ड्रोन क्रैश हुआ वो कोई मामूली ड्रोन नहीं है. ये एक रीपर ड्रोन था. ये ड्रोन दिखने में फाइटर जेट के जैसा ही होता है. लेकिन इसे उड़ाने के लिए पायलट की जरूरत नहीं होती. मतलब कि ये एक मानव रहित ड्रोन है इस वजह से ये जासूसी के लिए बेहद मुफीद माना जाता है. अगर रूस को इस ड्रोन का मलबा मिल गया तो रूस को इस ड्रोन का सारा डाटा मिल सकता है. जिससे ये पता चल सकता है कि इस ड्रोन से अमेरिका ने अबतक क्या क्या खुफिया सूचनाएं इक्ट्ठा की है. इसके अलावा रूस को इस ड्रोन के काम करने की तकनीक की भी जानकारी मिल जाएगी. इस तकनीक का इस्तेमाल कर ऐसे ड्रोन का प्रोटोटाइप बनाया जा सकता है.

क्यों घातक है ये ड्रोन
एमक्यू 9 रीपर की खास बात यही है कि यह दुश्मनों की हरकतों पर चुपके से नजर रखता है. ये ड्रोन चमगादड़ की तरह रात में देखता है और सारी जानकारियों को कमांड सेंटर तक पहुंचा सकता है. यही वजह है कि इस विमान के मलबे को भी किसी हालत में अमेरिका दुश्मन के हाथ में जाने नहीं देने चाहता है. अफगानिस्तान युद्ध के समय सर्विलांस और एयर स्ट्राइक के लिए इस ड्रोन का लगाातार इस्तेमाल किया गया. इस ड्रोन में 8 लेजर गाइडेड मिसाइल फिट किये जा सकते हैं. जरूरत पड़ने पर इस ड्रोन से सभी हथियारों को हटाया जा सकता है. अमेरिकी एजेंसियों के अनुसार इन ड्रोन की लंबाई 36 फीट और ऊंचाई 12 फीट होती है. ये ड्रोन आसमान में 50 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकता है.

रूस-यूक्रेन युद्ध में अहम हो गया है काला सागर
4 लाख 23 हजार वर्ग किलोमीटर में फैले ब्लैक सी को बहुत संवेदनशील माना जाता है. क्योंकि इसकी तटीय रेखाएं यूक्रेन से भी लगी हुई हैं और रूस को भी छूती हैं. इसके अलावा सबसे महत्वपूर्ण ये है कि काला सागर नाटो देशों की सीमाओं को भी छूता है. जिस क्रीमिया पर वर्ष 2014 से रूस का नियंत्रण है, वो भी इसी Black Sea से घिरा हुआ है. इस काला सागर का एक बहुत बड़ा इलाका अंतर्राष्ट्रीय हवाई क्षेत्र में आता है, जहां किसी भी देश के विमान उड़ान भर सकते हैं. अमेरिका का कहना है कि उसका ये ड्रोन इसी अंतर्राष्ट्रीय हवाई क्षेत्र में हर बार की तरह अपनी नियमित उड़ान पर था.

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