4796 पूर्व MP, हर साल 70 करोड़ खर्च… पेंशन बंद कराने कांग्रेस सांसद ने निर्मला सीतारमण को लिखी चिट्ठी

नई दिल्ली,

महाराष्ट्र से कांग्रेस सांसद सुरेश उर्फ बालू धनोरकर ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को चिट्ठी लिखी है. इस चिट्ठी में उन्होंने वित्त मंत्री से ऐसे पूर्व सांसदों की पेंशन को बंद करने की मांग की है, जो आर्थिक रूप से मजबूत हैं.निर्मला सीतारमण को लिखी चिट्ठी में धनोरकर ने कहा, कुल मिलाकर लोकसभा और राज्यसभा के 4,796 पूर्व सांसद पेंशन ले रहे हैं. इनकी पेंशन पर हर साल 70 करोड़ रुपये खर्च होते हैं. इनके अलावा 300 पूर्व सांसद ऐसे हैं, जिनका निधन हो चुका है और उनके परिवार वालों को पेंशन मिल रही है.

धनोरकर ने चिट्ठी में कुछ उन पूर्व सांसदों के नाम भी गिनाए हैं, जो आर्थिक रूप से मजबूत हैं और उसके बावजूद पेंशन ले रहे हैं. इनमें राहुल बजाज, संजय डालमिया, मायावती, सीताराम येचुरी, मणि शंकर अय्यर, बॉलीवुड एक्ट्रेस रेखा और साउथ फिल्मों के सुपरस्टार चिरंजीवी शामिल हैं.

चिट्ठी में और क्या-क्या लिखा है?
धनोरकर ने इस चिट्ठी में लिखा कि आर्थिक रूप से मजबूत कई सारे पूर्व सांसद ऐसे हैं, जो पेंशन का लाभ ले रहे हैं. उन्होंने वित्त मंत्री से ऐसे सांसदों की पेंशन बंद करने की अपील की है.उन्होंने कहा कि ऐसे पूर्व सांसद जो इनकम टैक्स के 30% स्लैब में आते हैं, उन्हें पेंशन का लाभ नहीं मिलना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘मैं इस बात को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हूं कि कोई भी देशभक्त पूर्व सांसद को इससे आपत्ति नहीं होगी.’

पूर्व सांसदों की पेंशन पर कितना खर्च?
लोकसभा और राज्यसभा सांसदों की सैलरी और पेंशन के लिए 1954 से कानून है. समय-समय में इसमें संशोधन होते रहते हैं. लोकसभा का एक कार्यकाल यानी 5 साल पूरा करने पर 25 हजार रुपये पेंशन के हकदार हो जाते हैं. इसी तरह अगर राज्यसभा का एक कार्यकाल यानी 6 साल पूरा कर लिया तो हर महीने 27 हजार रुपये की पेंशन मिलती है. जैसे, राज्यसभा सांसद का कार्यकाल 6 साल रहता है तो उन्हें हर महीने 27 हजार रुपये पेंशन मिलती है. अगर कोई दो बार यानी 12 साल तक राज्यसभा सांसद रहता है तो उसे 39 हजार रुपये पेंशन हर महीने मिलती है.

सांसदों की पेंशन पर सरकार हर साल कितना खर्च करती है? इसका जवाब RTI से सामने आया है. लोकसभा और राज्यसभा सांसदों की पेंशन का कामकाज सेंट्रल पेंशन अकाउंटिंग ऑफिस (CPAO) संभालता है. आजतक की RTI में दिए जवाब में CPAO ने बताया था कि लोकसभा और राज्यसभा के पूर्व सांसदों की पेंशन पर 2021-22 पर 78 करोड़ रुपये से ज्यादा का खर्च किया गया था. इससे पहले 2020-21 में 99 करोड़ रुपये से ज्यादा का खर्च हुआ था.

एक दिन के लिए भी सांसद बने तो पेंशन के हकदार
ऐसा कोई नियम भी नहीं है कि सांसदों या विधायकों को पेंशन पाने के लिए एक निश्चित समय तक पद पर बना रहना होगा. नियमों में कोई अवधि नहीं बताई गई है. लिहाजा, अगर कोई भी एक दिन के लिए भी सांसद या विधायक बन जाता है तो उसे आजीवन पेंशन मिलती है. सिर्फ पेंशन ही नहीं, बल्कि और भी कई सारी सुविधाएं मिलतीं हैं.

इतना ही नहीं, अगर कोई सांसद के बाद विधायक बन जाता है तो उसे सांसद की पेंशन के साथ-साथ विधायक की सैलरी भी मिलेगी. और विधायक पद से हटने के बाद सांसद और विधायक, दोनों की पेंशन मिलती है.इसके अलावा, पूर्व सांसद अपने किसी साथी के साथ किसी भी ट्रेन में सेकंड एसी में फ्री यात्रा कर सकते हैं. अगर वो अकेले यात्रा करते हैं तो फर्स्ट एसी में भी यात्रा कर सकते हैं.

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