दिल्ली-NCR समेत पूरे उत्तर भारत में भूकंप के तेज झटके, काफी देर तक हिलती रही धरती

नई दिल्ली,

दिल्ली-एनसीआर और लखनऊ सहित देश के कई इलाकों में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए हैं। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 7.7 मापी गई है वहीं भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान बताया जा रहा है। भूकंप के यह झटके काफी देर तक महसूस किए गए हैं। लोग डर के कारण अपने-अपने घरों से निकलकर बाहर आ गए। घर में मौजूद लोगों ने बताया कि उनके घरों के पंखों से लेकर लाइटें और बाकी सामान भी तेजी से हिल रहे थे। आपको बता दें कि दिल्ली-एनसीआर के अलावा लखनऊ, जम्मू-कश्मीर, पंचकुला और चंडीगढ़ सहित देश के कई इलाकों में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं।

भूकंप की दहशत के बीच बाहर निकल आए लोग
दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर भारत में भूकंप के झटके महसूस किए गए। करीब 10:30 के करीब आए भूकंप के झटकों से घर में बैठे लोग कांप गए। जो घरों के अंदर थे जल्दी से बाहर आ गए। उन्होंने कभी इतने तेज झटकों का अनुभव नहीं किया था। ऑफिस में काम करने वाले लोगों ने बताया कि काम करने के दौरान वहां मौजूद लाइट पंखे और कुर्सियां भी तेजी से हिल रही थीं। इन झटकों से वे भी दहशत में आ गए। इमारतों के हिलने से दहशत में लोग घरों से बाहर निकल आए। झटके रात करीब 10 बजकर 20 मिनट पर महसूस किए गए। घरों से निकले लोगों ने बताया कि उन्‍हें साफ तौर पर इन झटकों को महसूस किया। इसने जान सुखा दी। कुछ समझ नहीं आ रहा था। यह रूह कंपा देने वाला था।

जयपुर सहित राजस्थान के कई जिलों में रात साढ़े दस बजे महसूस हुए झटके
राजस्थान में मंगलवार रात करीब साढ़े दस बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए। जयपुर सहित तमाम शहरों में लोग घरों से बाहर भागे। एक-दूसरे को फोन कर भूकंप आने की जानकारी दी। बीकानेर, जोधपुर, अलवर, गंगानगर, अजमेर, झुंझुनूं आदि शहरों में भूकम्प के झटके महसूस होते ही लोग घर से बाहर की ओर दौड़े। अपने नाते-रिश्तेदारों को फोन करके इसकी जानकारी भी दी, ताकि सभी सुरक्षित अपने घरों से बाहर आ जाएं।

क्या करें, क्या न करें?
भूकंप के दौरान जितना हो सके सुरक्षित रहें. ध्यान रखें कि कुछ भूकंप वास्तव में भूकंप से पहले के झटके होते हैं और बड़ा भूकंप कुछ देर में आ सकता है. अपनी हलचल एकदम कम कर दें और नजदीकी सुरक्षित स्थान तक पहुंचें. तब तक घर के अंदर रहें जब तक कि भूकंप बंद न हो जाए और आप सुनिश्चित हों कि बाहर निकलना सुरक्षित है.

अगर घर के अंदर हों
जमीन पर लेट जाएं. एक मजबूत टेबल या फर्नीचर के अन्य टुकड़े के नीचे बैठकर खुद को कवर कर लें. यदि आपके आस-पास कोई टेबल या डेस्क नहीं है, तो अपने चेहरे और सिर को अपनी बाहों से ढक लें और किसी कोने में झुक जाएं. कमरे के कोने में, टेबल के नीचे या बिस्तर के नीचे छिपकर अपने सिर और चेहरे को बचाएं. कांच, खिड़कियां, दरवाजे, दीवारें और जो कुछ भी गिर सकता है (जैसे झूमर) से दूर रहें. जब भूकंप आए तो बिस्तर पर ही रहें. अपने सिर को तकिये से सुरक्षित करें. अगर आप किसी गिरने वाली चीज के नीचे हैं तो वहां से हट जाएं. दरवाजे से बाहर भागने का प्रयास तभी करें जब वह आपके पास हो और यदि आप जानते हैं कि दरवाजा मजबूत है.

जब तक कंपन बंद न हो जाए, तब तक अंदर ही रहें. रीसर्च से पता चला है कि ज्यादातर लोगों को चोटें तब लगती हैं जब वह इमारतों के अंदर से बाहर निकलने की कोशिश करते हैं. ध्यान रखें कि बिजली जा सकती है या स्प्रिंकलर सिस्टम या फायर अलार्म चालू हो सकते हैं. अगर बाहर हों तो- आप जहां पर हैं, वहां से न हिलें. हालांकि, इमारतों, पेड़ों, स्ट्रीट लाइट्स और यूटिलिटी तारों से दूर रहें. यदि आप खुली जगह में हैं, तब तक वहीं रहें जब तक कंपन बंद न हो जाएं. सबसे बड़ा खतरा इमारतों से हैं, अधिकांश मौकों पर दीवारों के गिरने, कांच के उड़ने और वस्तुओं के गिरने से चोट लगती हैं.

 

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