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गुड्डू मुस्लिम के हैं कई हिंदू नाम… इसलिए उसकी लोकेशन का पता नहीं लगा पा रही एसटीएफ

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नई दिल्ली,

उमेशपाल हत्याकांड का आरोपी बमबाज गुड्डू मुस्लिम 62 दिनों से फरार है. तमाम कोशिशों के बाद भी एसटीएफ उसका पता नहीं लगा पा रही है. पता चला है कि वह पुलिस ने बचने के लिए हुलिया बदलने के साथ ही अपना असली नाम छुपाकर घूम रहा है. आजतक का पता चला है कि वह हिंदू नाम रखकर हर जगह यूपी एसटीएफ को चकमा दे रहा है. वह बबलू के अलावा सुरेंद्र कुमार और संदीप कुमार के नाम से जगह-जगह ठहर रहा है.

इससे पहले पता चला था कि गुड्डू मुस्लिम ने अपनी दाढ़ी बढ़ा ली है. पुलिस को उसकी आखिरी बार लोकेशन ओडिशा और छत्तीसगढ़ में मिली थी. गुड्डू मुस्लिम 2 अप्रैल से 13 अप्रैल तक ओडिशा के बारगढ़ में छिपा था. वह ओडिशा से कपड़ों से भरा अपना बैग फेंककर भागा है. वह अकेला ही ओडिशा में ठहरा था. उसके पास पैसे भी नहीं बचे हैं. ऐसे में वह पैसों की जुगाड़ करने में लगा है. पुलिस ने यहां से राजा नाम के युवक को हिरासत में लिया है. उसने पूछताछ में बताया कि गुड्डू ने पुलिस से बचने के लिए दाढ़ी बढ़ा ली है. गुड्डू झांसी, नाशिक , पुणे और ओडिशा में भी रुका था. इसके बाद वह छत्तीसगढ़ भाग गया.

गुड्डू मुस्लिम ने रची गहरी साजिश
गुड्डू मुस्लिम को जानने वाले दावा करते है कि उमेश पाल को मारने की अतीक के पास कोई वजह नहीं बची थी. असद को भड़काने और इस पूरे हत्याकांड का मास्टरमाइंड अगर कोई रहा तो वह गुड्डू मुस्लिम था, जिसने उमेशपाल की हत्या को लीड किया और ताबड़तोड़ बम फेंक कर दहशत फैला दी और मौत का खुला खेल खेला.

शाइस्ता के जर‍िये हुआ था लेनदेन, उमेश हत्याकांड में बड़ा खुलासा
सूत्र तो यहां तक दावा करते हैं कि अतीक और उसके भाई अशरफ की जेल में रहते उनका सारा कारोबार गुड्डू मुस्लिम के हाथ में रहता था और इस दौरान उसने कोयला सप्लाई समेत कई धंधों में गुपचुप तौर पर पैसे भी लगाए थे. इस दौरान वह कई ऐसे माफिया के संपर्क में भी रहा, जिसके संबंध अतीक और अशरफ से अच्छे नहीं रहे.

उमेश पाल मर्डर केस में है आरोपी
24 फरवरी को प्रयागराज में उमेश पाल की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. पुलिस ने उमेश की पत्नी की शिकायत पर अतीक, अशरफ, शाइस्ता, असद समेत 9 लोगों पर मामला दर्ज किया था. इस हत्याकांड में 7 शूटर शामिल थे. इनमें से अरबाज, विजय चौधरी, गुलाम और असद एनकाउंटर में ढेर हो गए. जबकि अतीक और अशरफ की गोली मारकर हत्या कर दी गई. अभी बमबाज गुड्डू, शूटर साबिर और अरमान फरार हैं. गुड्डू पर 5 लाख का इनाम है.

गुड्डू मुस्लिम का सुल्तानपुर से है गहरा नाता
गुड्डू मुस्लिम उर्फ गुड्डू बमबाज का सुल्तानपुर जनपद से गहरा नाता है. वहां के कुरेश समुदाय के लोगों के बीच उसकी गहरी पैठ और पकड़ रही है. यही कारण है कि सुल्तानपुर से अतीक अहमद के टिकट घोषित होने के बाद ही गुड्डू मुस्लिम सुल्तानपुर पहुंच गया था. यही नहीं अतीक के जाने के बाद भी गुड्डू मुस्लिम सुल्तानपुर में कई दिनों तक रुका रहा. इसी दौरान उसने पवन पांडेय से मुलाकात की थी और जब मुलाकात के लिए उनके पास गया था तो उसके साथ दो युवक और थे. यह दोनों सुल्तानपुर के रहने वाले बताए जाते हैं.

गुड्डू मुस्लिम के सुल्तानपुर कई बार जाने की बात भी सामने आती है और उसका ठिकाना कुरेश समुदाय के लोगों के यहां ही रहा. सुल्तानपुर जनपद में कुरेश समुदाय के लोग अधिक संख्या में जहां बसे हैं, उसका लोकेशन कुछ इस तरह का है कि वहां से सीधे गोसाईगंज थाना क्षेत्र होते हुए हाईवे तक पहुंचा जा सकता है. अंबेडकरनगर जनपद की सीमा में भी प्रवेश किया जा सकता है.

अपने सिंडिकेट का इस्तेमाल कर रहा गुड्डू
यूपी एसटीएफ की पहली टीम के मेंबर और गुड्डू मुस्लिम से पूछताछ कर चुके पूर्व आईपीएस राजेश पांडे ने बताया कि उमेश की हत्या के बाद फरार होने में गुड्डू ने अतीक के नहीं बल्कि अपने सिंडिकेट का इस्तेमाल किया. गुड्डू मुस्लिम का अपना बड़ा सिंडिकेट है. उसने जिस अपराधी के लिए काम किया, उससे कभी संबंध खराब नहीं किया.

पूर्व आईपीएस राजेश पांडे ने बताया, उसके संपर्क में रहे तमाम लोग आज माननीय हो चुके हैं, ऐसे में गुड्डू मुस्लिम को फरारी काटने के लिए अतीक अहमद सिंडिकेट का इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं है. उसका अपना सिंडिकेट ही बहुत बड़ा है. उत्तर प्रदेश और राज्य से बाहर के तमाम माफिया उसके सीधे संपर्क में रहे हैं. यही वजह है कि गुड्डू मुस्लिम अब तक फरार है.

ऐसे अतीक के संपर्क में आया था गुड्डू
गोरखपुर में एनडीपीएस में जेल जाने के बाद गुड्डू मुस्लिम अतीक अहमद के संपर्क में आया. गोरखपुर के तत्कालीन एएसपी और मौजूदा समय में यूपी एसटीएफ चीफ अमिताभ यश ने गुड्डू मुस्लिम को जेल भेजा था और सजा भी करवाई थी. लेकिन अतीक अहमद में अपने इलाहाबाद हाईकोर्ट के सिंडिकेट का इस्तेमाल कर गुड्डू मुस्लिम को हाईकोर्ट से रिहा करवाया और तभी से 20 सालों से गुड्डू मुस्लिम अतीक अहमद के लिए काम कर रहा था.

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