वो कागज लाएं जिनके आधार पर दोषियों को रिहा किया, बिलकिस केस में SC ने केंद्र से मांगा जवाब

नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने बिलकिस बानो गैंगरेप केस में 11 दोषियों को सजा में छूट को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र और गुजरात सरकार से जवाब मांगा है। शीर्ष अदालत ने सुनवाई के दौरान मामले में दोषियों की रिहाई के आधार वाले दस्तावेजों को लेकर सवाल किया। कोर्ट ने गुजरात सरकार को दोषियों की सजा में छूट संबंधी फाइल को अगली तारीख पर पेश करने को कहा। मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल को तय की गई। यह याचिका बिलकिस बानो की तरफ से दाखिल की गई थी।

हमारे पर मर्डर के कई मामले लंबित
मामले की सुनवाई दो जजों की पीठ ने की। पीठ में शामिल जस्टिस केएम जोसेफ ने कहा कि हमारे सामने कई हत्या के मामले हैं जिनमें अपराधी वर्षों से रिहाई नहीं होने से जेलों में सड़ रहे हैं। जस्टिस जोसेफ ने कहा कि क्या यह ऐसा मामला है जहां अन्य मामलों की तरह स्टैंडर्ड को समान रूप से लागू किया गया है? दरअसल, पिछले साल स्वतंत्रता दिवस पर बिलकिस बानो के गैंगरेप मामले में दोषी 11 बलात्कारियों की रिहाई के खिलाफ कई याचिकाएं दाखिल की गईं हैं। याचिकाकर्ताओं में तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा, सीपीएम पोलित ब्यूरो सदस्य सुभाषिनी अली और अन्य शामिल हैं।

बिलकिस बानो ने भी दायर की थी दो याचिकाएं
बिलकिस बानो ने भी इस मामले में दो याचिकाएं दायर की थीं। इनमें से एक में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अपने मई 2022 के आदेश की समीक्षा करने के लिए कहा था। उसमें गुजरात सरकार को एक दोषी की रिहाई याचिका पर विचार करने का निर्देश देने को कहा गया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया था। वहीं, दूसरी याचिका में गुजरात सरकार की तरफ से 11 दोषियों को रिहा करने के फैसले को चुनौती दी है। याचिका में कहा गया है कि सभी दोषियों की रिहाई न केवल उसके (बिलकिस बानो), उसकी बड़ी हो चुकी बेटियों, उसके परिवार, साथ ही समूचे समाज के लिए झटका है। गुजरात सरकार ने सभी 11 दोषियों को पिछले साल 15 अगस्त को रिहा कर दिया था।

क्या था गुजरात सरकार का मत
गुजरात सरकार ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि सभी 11 दोषी 14 साल या उससे अधिक की सजा काट चुके थे। साथ ही उनका व्यवहार अच्छा पाया गया था। इसके अलावा केंद्र सरकार की तरफ से भी दोषियों के रिहाई से जुड़े फैसले को हरी झंडी दी गई थी।

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