राजनीति से संन्यास लेंगे नितिन गडकरी? सियासत से मोहभंग का फिर दिया संकेत

नई दिल्ली

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने राजनीति से संन्यास लेने के संकेत दिए हैं। उन्होंने एक बार फिर संकेत दिया कि सियासत में उनकी रुचि खत्म हो रही है। गडकरी के इस बयान के बाद इस तरह की अटकलों को हवा मिल रही है कि उनके और पार्टी हाईकमान के बीच संभवतः सबकुछ ठीक नहीं चल रही है। ऐसी अटकलें भी लगने लगी हैं कि संभवतः 2024 लोकसभा चुनाव में उन्हें बीजेपी टिकट भी न दे।

रविवार को नागपुर में एक अवॉर्ड फंक्शन के दौरान कहा कि वह भले ही दो चुनाव जीत चुके हैं लेकिन वह चाहते हैं कि लोग उन्हें तभी वोट दें जब उन्हें लगे कि इन्हें वोट देना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘मैं एक सीमा से ज्यादा किसी को तुष्ट नहीं करता। यहां तक कि अगर कोई अन्य भी मेरी जगह आता है तो मुझे कोई दिक्कत नहीं क्योंकि तब मैं अपने काम को और ज्यादा समय दे सकूंगा।’ इस दौरान गडकरी ने वैकल्पिक ऊर्जा से जुड़े अपने कुछ वेंचर्स का जिक्र किया।

हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया ने गडकरी से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन बात नहीं हो पाई। हालांकि, उनके ऑफिस के एक अधिकार ने बताया कि मंत्री के बयान को मीडिया गलत तरीके से पेश कर रहा है। अधिकारी ने कहा, ‘उन्होंने (गडकरी) सिर्फ ये कहा कि वह वोट पाने के लिए तुष्टीकरण की राजनीति नहीं कर सकते।’

इससे पहले भी गडकरी सार्वजनिक मंचों पर इसी तरह के बयान दे चुके हैं। इस साल जनवरी में हलबा आदिवासी महासंघ के सदस्यों को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा था कि वे जिसे चाहें उन्हें वोट दे सकते हैं, क्योंकि वोट किसे देना है ये उन्हें ही तय करना है।

पिछले साल जुलाई में उन्होंने कहा था कि उन्हें कभी-कभी लगता है कि राजनीति छोड़ देनी चाहिए क्योंकि समाज के लिए करने के लिए बहुत सी दूसरी चीजें हैं। इसके बाद, संयोग से वह न सिर्फ बीजेपी संसदीय बोर्ड से बाहर हुए बल्कि बीजेपी की सेन्ट्रल इलेक्शन कमिटी में भी जगह नहीं बना पाएं।

नितिन गडकरी बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं। 2014 से पहले उन्होंने कभी कोई डायरेक्ट चुनाव यानी लोकसभा सांसद या विधायक का चुनाव नहीं लड़ा था। वह महाराष्ट्र विधान परिषद में स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से एमएलसी रहे थे। 2014 में वह पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ें और 7 बार के सांसद विलास मुत्तेमवार को शिकस्त दी। 2019 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने नाना पटोले को शिकस्त दी।

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