मेरे धैर्य का न लें इम्तिहान’, SC में देवांगना, तन्हा और नताशा की बेल रद कराने पर अड़े SG तो जस्टिस को आया गुस्सा, किया इनकार

नई दिल्ली

दिल्ली दंगों के दौरान UAPA के मामले में पकड़ी गईं स्टूडेंट एक्टिविस्ट देवांगना कलिता, नताशा नरवाल और आसिफ इकबाल तन्हा की बेल रद कराने की कोशिश में दिल्ली पुलिस को मुंह की खानी पड़ी है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत खारिज करने से साफ इनकार कर दिया है। सुनवाई के दौरान सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता की जस्टिस संजय किशन कौल से गरमागरमी भी देखने को मिली।

तुषार मेहता तीनों आरोपियों की बेल रद करने को लेकर बहुत ज्यादा अड़िग थे। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि हाईकोर्ट के फैसले को नजीर न बनाया जाए। जस्टिस कौल ने उनको फटकार लगाते हुए कहा कि आप मेरे धैर्य की परीक्षा न लें। हमें ऐसा कारण नहीं दिखता जिससे इस मामले को फिर से जिंदा किया जाए।

हाईकोर्ट ने दी थी तीनों को बेल, पुलिस रिहा करने को तैयार नहीं थी
स्टूडेंट एक्टिविस्ट देवांगना कलिता, नताशा नरवाल और आसिफ इकबाल तन्हा को दिल्ली हाईकोर्ट ने जमानत पर रिहा किया था। उस समय ये मामला काफी तूल पकड़ा था, क्योंकि हाईकोर्ट से बेल मिलने के बाद भी दिल्ली पुलिस उनको छोड़ने के लिए तैयार नहीं दिख रही थी। रिहाई में देरी पर लोअर कोर्ट में पुलिस का कहना था कि तीनों आरोपियों को मूल ठिकानों पर जाकर पड़ताल करनी है। आने जाने में समय लग रहा है। जब तक पूरी छानबीन नहीं हो जाती तब तक उनको रिहा नहीं किया जा सकता। उसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त रुख दिखाया तो पुलिस को झुकना पड़ा।

15 जून 2021 के अपने आदेश में दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और संजय भंबानी की बेंच ने दिल्ली पुलिस की आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि महज प्रदर्शन करने के लिए तीनों छात्रों पर UAPA नहीं लगाया जा सकता। बेंच का मानना था कि तीनों ने ऐसा कोई काम नहीं किया जिसे आतंकी गतिविधी माना जाए। स्टूडेंट एक्टिविस्ट अपनी आवाज को उठा रही थीं। इसमें पुलिस को आतंकवाद कहां से दिख गया। दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यहां तक कहा कि सरकार अपने खिलाफ उठने वाली आवाजों को दबाने के लिए UAPA का बेजा इस्तेमाल कर रही है।

जस्टिस कौल से मेहता की दलील- हाईकोर्ट के फैसले पर करें गौर
तीनों स्टूडेंट एक्टिविस्ट दो साल से जमानत पर हैं। दिल्ली पुलिस ने फिर से उनकी बेल को रद करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई थी। तुषार मेहता ने जस्टिस संजय किशन कौल की बेंच से कहा कि वो दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के कुछ अंशों पर फिर से गौर करें। जस्टिस का कहना था कि आदेश में कहीं कोई दिक्कत नहीं है। एसजी ने उनसे दोबारा आदेश पर गौर करने को कहा तो जस्टिस से उनका विवाद हो गया।

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