‘उद्धव से बात करने में सहजता नहीं, बिना संघर्ष किए इस्तीफा दिया,’ आत्मकथा में शरद पवार ने क्या लिखा?

नई दिल्ली,

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के प्रमुख शरद पवार ने मंगलवार को अपनी आत्मकथा ‘लोक माझे सांगाती’ के दूसरे पार्ट का विमोचन किया. इस किताब में ने कई बड़े राजनीतिक खुलासे किए हैं. शरद पवार ने अजित पवार के बीजेपी से हाथ मिलाने की घटना के बारे में भी बताया और शिवसेना में बगावत की वजह से उद्धव के मुख्यमंत्री पद छोड़ने के घटनाक्रम की भी जिक्र किया है.

शरद पवार ने 23 नवंबर 2019 की उस घटना का जिक्र किया है, जब अजित पवार और देवेंद्र फडणवीस ने राजभवन में सुबह-सुबह शपथ लेकर सरकार बना ली थी. पवार किताब में लिखते हैं- 2019 (विधानसभा चुनाव के बाद सरकार बनाने को लेकर) की बगावत मेरे नाम से शुरू हुई, लेकिन मेरा कोई समर्थन नहीं था. सुबह 6.30 बजे मुझे अजित पवार और देवेंद्र फडणवीस के शपथ ग्रहण के बारे में पता चला. शरद पवार ने किताब में यह भी कहा कि बिना संघर्ष किए उद्धव ठाकरे के इस्तीफे ने महाविकास अघाड़ी की सत्ता को खत्म कर दिया.

‘केंद्र और राजभवन ने MVA सरकार हटाने की साजिश रची’
हालांकि, किताब में शरद पवार ने कहा है कि बीजेपी और शिवसेना के बीच बढ़ती दूरियां हमारे लिए अच्छा संकेत हैं. कहा जाता है कि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजित पवार को बरगलाया गया है. इस किताब में कहा गया है कि केंद्र सरकार और राजभवन ने महाविकास अघाड़ी को हटाने की साजिश रची.

‘उद्धव ने बिना संघर्ष किए इस्तीफा दे दिया’
NCP चीफ शरद पवार ने किताब ‘लोक माजे संगाति’ में अजित पवार और देवेंद्र फडणवीस के सुबह-सुबह शपथ ग्रहण के बारे में खुलासा किया. उन्होंने लिखा- हमें इस बात का अंदाजा नहीं था कि उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री बनने के बाद शिवसेना में बगावत हो जाएगी, जिसके बाद शिवसेना अपना नेतृत्व खो देगी. उद्धव ने बिना संघर्ष किए इस्तीफा दे दिया, जिसके कारण एमवीए सरकार गिर गई.

‘उद्धव से बात करने में सहजता महसूस नहीं हुई’
उन्होंने कहा कि जिस सहजता के साथ बालासाहेब ठाकरे के साथ बातचीत होती थी, वो उद्धव से बात करते वक्त कमी महसूस हुई. सरकार बनने के कुछ समय बाद उद्धव के बीमार होने का भी जिक्र किया और कहा- उन्हें (उद्धव) हेल्थ कंडीशन की वजह से दिक्कतों का सामना करना पड़ा. अपने डॉक्टर के शेड्यूल के बीच कामकाज देखने पड़े.

शरद पवार ने पार्टी अध्यक्ष पद छोड़ने का ऐलान किया
एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने मंगलवार को आत्मकथा के विमोचन के मौके पर पार्टी का अध्यक्ष पद छोड़ने का ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि अब मुझे जो समय मिलेगा, उसे देखते हुए मैं अभी से इस काम पर ज्यादा ध्यान देने वाला हूं. मैं यह नहीं भूल सकता कि पिछले 6 दशकों में महाराष्ट्र और आप सभी ने मुझे मजबूत समर्थन और प्यार दिया है. पार्टी जिस दिशा में जाना चाहती है, यह नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शन करने का समय है. मैं सिफारिश कर रहा हूं कि अध्यक्ष पद के चुनाव पर फैसला करने के लिए एनसीपी सदस्यों की एक समिति बनानी चाहिए.

उन्होंने आगे कहा- मेरे साथियों, भले ही मैं अध्यक्ष पद से हट रहा हूं, लेकिन मैं सार्वजनिक जीवन से रिटायर नहीं हो रहा हूं. ‘निरंतर यात्रा’ मेरे जीवन का अभिन्न अंग बन गया है. मैं सार्वजनिक कार्यक्रमों, बैठकों में भाग लेता रहूंगा. चाहे मैं पुणे, मुंबई, बारामती, दिल्ली या भारत के किसी भी हिस्से में रहूं, मैं हमेशा की तरह आप सभी के लिए उपलब्ध रहूंगा. मैं लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए चौबीसों घंटे काम करता रहूंगा.

शरद पवार के ऐलान के बाद क्या बोले अजित?
शरद पवार के ऐलान के बाद अजित पवार ने कहा, हम परिवार के लोग और पार्टी के नेता साथ में बैठेंगे. पार्टी के कार्यकर्ताओं की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए फैसला किया जाएगा. पार्टी की बैठक में आपकी भावनाओं के तहत ही शरद पवार फैसला करेंगे, ये आश्वासन मैं आपको दे सकता हूं. अजित पवार ने कहा, पवार साहब चाहते हैं कि नई पीढ़ी नेतृत्व करे. ऐसे में नए नेतृत्व को मौका मिलना चाहिए. बार बार उनसे फैसला लेने के लिए न कहें. वे फैसला वापस नहीं लेंगे. हालांकि, हमें शरद पवार का समर्थन मिलता रहेगा. उनके सहमति से ही फैसला किए जाएंगे.

पवार ने कांग्रेस छोड़कर बनाई थी NCP
इससे पहले 19 अप्रैल को शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने कहा था कि अगले 15 दिनों में दो राजनीतिक ‘धमाके’ होंगे. निश्चित रूप से सुप्रिया सुले का संकेत इसी ओर था. हालांकि उनका दूसरा कथित ‘धमाका’ अभी भी भविष्य में छिपा हुआ है. बता दें कि शरद पवार ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के विदेशी मूल का मुद्दा उठाया था और 1999 में कांग्रेस छोड़ दी थी. इसके बाद उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) का गठन किया था.

ये नेता चुनेंगे NCP का अगला अध्यक्ष
शरद पवार ने कहा- मैं एनसीपी के वरिष्ठ नेताओं की एक समिति का सुझाव देता हूं जो भविष्य की कार्यवाही के साथ-साथ यह भी तय करेगी कि किसे क्या जिम्मेदारी मिलेगी. इस समिति में प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, पीसी चाको, नरहरि जिरवाल, अजित पवार, सुप्रिया सुले, जयंत पाटिल, छगन भुजबल, दिलीप वलसे-पाटिल, अनिल देशमुख, राजेश टोपे, जितेंद्र आव्हाड, हसन मुश्रीफ, धनंजय मुंडे, जयदेव गायकवाड़ और पार्टी के फ्रंटल सेल के प्रमुख शामिल होंगे.

 

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