जूडिशिरी में दखल दे रही है सरकार? एडवोकेट ने पूछा सवाल तो रिजिजू ने पहले किया इनकार, फिर बोले- वो भी तो करते हैं ऐसा

मुंबई

कानून मंत्री किरेन रिजिजू से एक एडवोकेट ने सवाल किया कि क्या सरकार न्यायपालिका के क्षेत्र में दखल दे रही है। रिजिजू ने पहले साफ तौर पर इनकार किया कि सरकार ऐसा कुछ नहीं कर रही है। नरेंद्र मोदी के पीएम बनने के बाद सरकार ने ऐसा कोई काम नहीं किया जिससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर कोई हमला हो। लेकिन बाद में उन्होंने उसी वकील से सवाल किया कि उन्हें पर भी विचार करना चाहिए कि न्यायपालिका का सरकार के कामकाज में कितना दखल है। रिजिजू मुंबई में महाराष्ट्र- गोवा बार काउंसिल के एक समारोह में वकीलों से रूबरू हो रहे थे।

कानून मंत्री का कहना था कि केवल न्यायपालिका क स्वतंत्रता को लेकर ही चिंता करना जायज नहीं है। संविधान में न्यायपालिका, सरकार और विधायिका तीनों की अलग अलग भूमिकाए तय की गई हैं। उनका कहना था कि सभी को लक्ष्मण रेखा का सम्मान करना चाहिए। उनका कहना था कि संविधान के तीनों अंग अगर अपने दायित्वों को दायरे में रहकर पूरा करेंगे तो कहीं पर भी कोई बखेड़ा खड़ा ही नहीं होगा।

विदेशों में पढ़े जज और वकील भारतीयता का भी रखें ख्याल
कानून मंत्री ने विदेशों में पढ़े जजों और वकीलों पर हमलावर होते हुए कहा कि भाषा के साथ इन लोगों का दिमाग भी अंग्रेजी मानसिकता का हो गया है। उनका कहना था कि विदेशों में पढ़े और अंग्रेजी में महारथ रखने वाले लोगों को भारतीयता का ख्याल भी रखना चाहिए।

अंग्रेजी बोलने वाले वकीलों की फीस ज्यादा क्यों
कानून मंत्री का कहना था कि अंग्रेजी बोलने वाले वकील ज्यादा फीस ले रहे हैं। जबकि ऐसे कई उदाहरण सामने हैं जिनमें अंग्रेजी न बोल पाने वाले वकील का ज्ञान अंग्रेजीदां वकील से कहीं ज्यादा था। उनका कहना था कि ये गलतक परंपरा है। वकील अंग्रेजी में बोलता है और सभी उसका सम्मान करते हैं। भारत में ऐसा नहीं होना चाहिए। उन्होंने यहां तक कहा कि अलग-अलग कोर्टों में स्थानीय भाषा में काम क्यों नहीं होता। कानून मंत्री का कहना था कि अब तक तकनीक भी इतनी ज्यादा परिपक्व हो चुकी है कि किसी भी भाषा का अनुवाद पलक झपकते ही हो सकता है।

 

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