‘मणिपुर के समुदायों को बांट रहा है राज्य का प्रशासन’, CM बीरेन सिंह को हटवाने दिल्ली क्यों पहुंचे थे कुकी विधायक

नई दिल्ली

मणिपुर में मैतेई और कुकी-पैतेई समुदायों के बीच संघर्ष के चरम पर पहुंचने से पहले ही कुकी विधायकों का एक समूह मंगलवार को भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व से मिलने नई दिल्ली पहुंचा था। उनकी मांग थी कि पार्टी स्टेट लीडरशिप में बदलाव करे। खासकर मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह को हटाए। इन विधायकों में से एक, साइकोट के विधायक पाओलीनलाल हाओकिप ने दावा किया कि राज्य प्रशासन ने पिछले कुछ वर्षों में मणिपुर के समुदायों का “ध्रुवीकरण” किया है। चुराचांदपुर जिले में आरक्षित वन भूमि से ग्रामीणों के हालिया विस्थापन को इसी आलोक में देखा जाना चाहिए।

‘राज्य पर नियंत्रण करने की कोशिश’
बुधवार को ऑल ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन मणिपुर (ATSUM) ने मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में शामिल करने की मांग के खिलाफ ट्राइबल सॉलिडेरिटी मार्च निकाला, जिसके बाद हिंसा भड़क गई। राज्य के भीतर बहुसंख्यक समुदाय और आदिवासी समुदायों के बीच संघर्ष एक दशक से भी अधिक समय से अस्तित्व में है।

मैइेती समुदाय खुद के लिए एससी स्टेटस की मांग कर रहा है। कुकी नेताओं का कहना है कि यह मांग पूरे राज्य पर नियंत्रण करने का एक और प्रयास है। पहले ही मणिपुर के 60 सदस्यीय विधानसभा में से 40 प्रतिनिधि मेतई समुदाय के हैं।

हाओकिप ने गुरुवार को द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि पिछले दो वर्षों में कई ऐसी घटनाएं हुई हैं, बेदखली का मामला उनमें से एक है, जिसने चुराचांदपुर जिले में कुकी-पैतेई-जोमी समुदाय को नाराज कर दिया है। राज्य सरकार ने दावा किया है कि इम्फाल घाटी में भी मैतेई समुदाय के वर्चस्व वाली जगहों से लोगों को बेदखल किया गया है।

विधायक ने मुख्यमंत्री पर क्यों साधा निशाना?
कुकी विधायक हाओकिप ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधाते हुए कहा, “वनों और पर्यावरण की रक्षा के नाम पर कुकी समुदाय को निशाना बनाना गया। भारतीय वन अधिनियम, 1927 स्वतः ही मणिपुर पर लागू नहीं होता है क्योंकि यह संविधान के तहत एक ‘सी’ राज्य है और इस अधिनियम को पहले विधानसभा द्वारा अपनाने की आवश्यकता है।”

वह आगे कहते हैं, “1970 के दशक में, 38 ग्राम प्रधानों की भूमि को वन बंदोबस्त अधिकारी द्वारा संरक्षित वनों से बाहर कर दिया गया था। पिछले नवंबर में सीएम ने मनमाने ढंग से इस आदेश को रद्द कर दिया।” उन्होंने कहा कि चुराचांदपुर में गुस्सा भाजपा के खिलाफ नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री के खिलाफ है।

हाओकिप सहित कुकी नेताओं ने बताया कि बीरेन सिंह ने बार-बार चुराचंदपुर समुदाय को “विदेशी” और “बाहरी” होने का संकेत दिया है, जो म्यांमार से मणिपुर में बस गए थे। कुकी-ज़ोमी जनजातियाँ मूल रूप से म्यांमार में कुकी-चिन पहाड़ियों से हैं।समुदाय के नेताओं ने कहा कि अफीम की खेती के खिलाफ बीरेन सिंह के अभियान ने कुकी समुदाय को भी निशाना बनाया है, जो मणिपुर में व्यापक रूप से दवाओं के निर्माण के लिए होता है।

सीएम के पेज से शेयर की गई थी खबर
कुछ दिन पहले, 16 किलो अफीम जब्ती की खबर अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर शेयर करते हुए मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने लिखा था, “ये वही लोग हैं जो हमारी पीढ़ी को बर्बाद कर रहे हैं। वे अफीम उगाने के लिए हमारे प्राकृतिक जंगलों को नष्ट कर रहे हैं, नशीली दवाओं की तस्करी के धंधे को अंजाम देने के लिए सांप्रदायिक मुद्दों को और भड़का रहे हैं। चुराचनपुर में 16 किलो अफीम जब्त।”

11 अप्रैल को तोड़ा गया था चर्च
11 अप्रैल को इंफाल पूर्वी जिले में एक आदिवासी कॉलोनी में अदालत के एक आदेश के बाद राज्य सरकार ने तीन अनधिकृत चर्चों को ध्वस्त कर दिया था। यह कॉलोनी मुख्य रूप से कुकी समुदाय द्वारा बसाई गई थी।

हाओकिप ने कहा कि मैतेई समुदाय द्वारा एसटी दर्जे की मांग से आदिवासी समुदाय खतरा महसूस कर रहे हैं। वह बताते हैं, “डर यह है कि मैइेती आदिवासियों की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं, ठीक वैसे ही (वे बेदखली का प्रयास कर रहे हैं)। मैं मैतेई विरोधी नहीं हूं, लेकिन एक आदिवासी प्रतिनिधि के रूप में यह मेरा कर्तव्य है कि मैं आदिवासी लोगों की चिंताओं और मांगों को उठाऊं।

 

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