जेल मैनुअल में क्यों किया बदलाव? हाई कोर्ट ने बिहार सरकार से मांगा जवाब

पटना

बिहार में पूर्व सांसद आनंद मोहन को जेल छोड़ने का मामला अभी थमा नहीं है। आईएएस कृष्णैया हत्याकांड में सजायाफ्ता आनंद मोहन को नियमों में बदलाव पर राज्य सरकार ने ‘आजादी’ मुहैया कराई। पटना उच्च न्यायालय से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक में बिहार सरकार को इस बाबत सफाई देनी है। तारीख तय हो चुकी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मीडिया के जरिए सफाई तो दे चुके हैं मगर इसके कानूनी पहलू को कोर्ट में बताना है।

बिहार के गृह विभाग को जेल नियमावली में हालिया संशोधन के खिलाफ एक पूर्व सिविल सेवक ने पटना हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। इस पर कोर्ट ने एक सप्ताह के भीतर राज्य सरकार से जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। पूर्व सांसद आनंद मोहन और 26 दूसरे को जघन्य अपराधों के दोषी को नियमों में बदलाव पर छोड़ दिया गया।

मुख्य न्यायाधीश के विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति राजीव रॉय की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। महाधिवक्ता पीके शाही को 12 मई को अगली तारीख मिली है। मामले की कानूनी पहलुओं पर बहस होगी। याचिकाकर्ता अनुपम कुमार सुमन ने राज्य की याचिका को रद्द करने की मांग की है।

नियमों में बदलाव कर आनंद मोहन की रिहाई
बिहार गृह विभाग की अधिसूचना 10 अप्रैल को जारी की गई थी। बिहार कारागार नियमावली, 2012 के नियम 481(i)(a) में संशोधन किया गया।जनहित याचिका पर सुनवाई शुरू हुई, तो राज्य के वकील ने स्थगन की मांग की, क्योंकि इस मामले में बहस करने वाले महाधिवक्ता दूसरे अदालत में व्यस्त थे।

पीठ ने मौखिक रूप से कहा कि मामला गंभीर है और इसे लंबे समय तक स्थगित नहीं किया जा सकता। राज्य के वकील ने बताया कि संशोधन को चुनौती देने वाली एक रिट याचिका सुप्रीम कोर्ट में भी दायर की गई है। अगले सप्ताह इस पर सुनवाई होने की संभावना है।

इससे पहले नियम था कि ड्यूटी के दौरान किसी लोक सेवक की हत्या मामले में आजीवन कारावास की सजा पाने वाले दोषी को 20 साल जेल में बिताने पड़ेंगे। मगर नियम में बदलाव पर 14 साल कर दिया गया। इसी के आधार पर राज्य सरकार ने आनंद मोहन की रिहाई सुनिश्चित की।

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