दूर से नमस्‍ते… बिलावल भुट्टो से बेरुखी यूं ही नहीं थी, जयशंकर ने इशारों में बता दी वजह

नई दिल्‍ली

एससीओ विदेश मंत्रियों की समिट में एस जयशंकर का बिलावल भुट्टो से दूर से नमस्‍ते करना सुर्खियों में छा गया। इस पर विदेश मंत्री ने यह जरूर कहा कि उन्‍होंने भुट्टो के साथ भी दूसरे देशों के प्रतिनिधियों जैसा व्‍यवहार किया। लेकिन, पाकिस्‍तानी विदेश मंत्री के साथ तस्‍वीरों में उनकी बेरुखी साफ झलक रही थी। जयशंकर ने अब इशारों में इसकी वजह भी बताई है। जयशंकर ने कहा है कि उनका मेहमान अच्‍छा है तो वह बेहतरीन मेजबान हैं। हालांकि, भुट्टो के भारत दौरे को देखें तो उन्‍होंने एससीओ में हुई चर्चा के इतर मीडिया से सारी बातें कीं। इनमें कश्‍मीर मुद्दे से लेकर जी-20 और बीबीसी डॉक्‍यूमेंट्री तक सब था। मैसूर में जयशंकर ने एक बार फिर संकेतों में साफ किया कि भुट्टो के आने से भारत को बहुत खुशी नहीं हुई। भारतीय विदेश मंत्री बोले कि बिलावल भुट्टो को सिर्फ एससीओ विदेश मंत्री की हैसियत से आमंत्रित किया गया था। इससे ज्‍यादा कुछ भी नहीं है।

ब‍िलावल को नहीं द‍िया था भाव…
गोवा में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में जयशंकर ने बिलावल को जरा भी भाव नहीं दिया था। इस दौरान रिश्‍तों की तल्‍खी साफ दिखाई दी थी। पाकिस्‍तान के विदेश मंत्री हाथ जोड़कर जयशंकर से मिलने मंच पर चढ़े थे। लेकिन, भारतीय विदेश मंत्री ने दूर से ही उन्‍हें नमस्‍ते किया। इस बेरुखी ने साफ कर दिया था कि भुट्टो से उनका दिल नहीं मिलने वाला है। फोटो सेशन में भी दोनों ने एक-दूसरे से ‘उचित’ दूरी बनाकर तस्‍वीरें खिंचवाईं। सबकुछ बड़ा साफ था। हालांकि, भारतीय विदेश मंत्री ने यह जरूर कहा था कि भुट्टो के साथ दूसरे देशों के विदेश मंत्रियों जैसा ही व्‍यवहार किया गया।

अब एस जयशंकर ने इशारों में इस बेरुखी का कारण बताया है। उन्‍होंने कहा है कि बिलावल भुट्टो ने भारत आकर मीडिया के साथ एससीओ को छोड़ तमाम मसलों पर बात की। कश्‍मीर, जी-20, बीबीसी डॉक्‍यूमेंट्री इनमें सबकुछ शामिल था।

एससीओ विदेश मंत्री की हैसियत से आए थे भुट्टो…
जयशंकर ने कहा क‍ि बिलावल को एससीओ विदेश मंत्री की हैसियत से भारत आमंत्रित किया गया था। मल्‍टीलेट्रल मीटिंग में हिस्‍सा लेने के लिए उन्‍हें बुलाया गया था। ये मुद्दे संगठन विशेष के होते हैं। इसमें हर कोई अपनी बात रखता है। सबकी अपनी-अपनी राय हो सकती है। जरूरी नहीं कि सबकी राय एक हो। हालांकि, भारत आकर उन्‍होंने मीडिया से एससीओ को छोड़कर भारत के विषय में तमाम बातें कीं। वह बोले, ‘मैं मेजबान के नाते क्‍या करता। अगर मेरा मेहमान अच्‍छा है तो मैं बेहतरीन मेजबान हूं।’

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