एक या दो नहीं… पूरे 11 CM दावेदार! कर्नाटक में बीजेपी-कांग्रेस के लिए आसान नहीं होने वाला ये फैसला

नई दिल्ली

कर्नाटक चुनाव में अब सिर्फ अंतिम पड़ाव का प्रचार बचा है और फिर 10 मई को वोटिंग होने जा रही है। यानी कि 13 मई को सभी दलों का रिपोर्ट कार्ड सामने आ जाएगा, किसकी जीत होगी, किसकी हार, स्पष्ट हो जाएगा। अब हार-जीत देखना तो दिलचस्प रहने ही वाला है, इसके साथ-साथ राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन बनेगा, ये सवाल भी सभी के मन में आ रहा है। इस बार दोनों बीजेपी और कांग्रेस से कई सीएम दावेदार हैं, कुछ अपेक्षित तो कुछ एकदम हैरान करने वाले।

सिद्धारमैया
कर्नाटक में कांग्रेस के सबसे बड़े नेता और पांच साल का अपना कार्यकाल भी पूरा करने वाले, सिद्धारमैया एक बार फिर मुख्यमंत्री के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। राहुल गांधी के भी करीबी हैं, कांग्रेस हाईकमान का भी भरोसा जीत रखा है, ऐसे में अगर पार्टी सत्ता में वापस आती है तो उस स्थिति में उनका रेस में काफी आगे रहना लाजिमी है। लेकिन उनकी 76 साल की उम्र और पिछली सरकार के दौरान कुछ फैसलों ने उन्हें लिंगायत और खासकर हिंदू वोटरों के बीच में कम लोकप्रिय कर दिया है।

डीके शिवकुमार
कांग्रेस में ही डीके शिवकुमार की उपस्थिति भी जोरदार है। सबसे अमीर राजनेता, पार्टी के संकटमोचक और लगातार 8 बार से विधायक। डीके लंबे समय से मुख्यमंत्री बनने के सपने देख रहे हैं, 2018 में भी वे बनना चाहते थे, उससे पहले भी अपनी महत्वकांक्षा दिखा चुके थे, लेकिन हर बार मौका हाथ से निकल गया। अभी के लिए इस साल कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, पार्टी को फंड्स की भी जरूरत पड़ेगी, ऐसे में तब डीके एक निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। लेकिन क्या पार्टी उन पर दांव चलेगी, ये देखने वाली बात रहेगी।

बसवराज बोम्मई
बीजेपी के वर्तमान मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई एक बार फिर सीएम रेस में दिखाई तो दे रहे हैं। अगर बीजेपी ओपिनियन पोल्स को गलत साबित करते हुए सत्ता में फिर वापस आ जाती है, उस स्थिति में बसवराज एक विकल्प के तौर पर तो जरूर सामने आते हैं। उनकी एक साफ छवि है, उसके ऊपर लिंगायत समुदाय से आते हैं, ऐसे में उनकी दावेदारी मजबूत है। लेकिन कानून व्यवस्था और लोकप्रियता दो ऐसे फैक्टर हैं, जो उनके खिलाफ जाते हैं और यहीं कारण उन्हें दोबारा सीएम कुर्सी पर आने से रोक सकते हैं।

प्रह्लाद जोशी
मोदी सरकार में मंत्री और चार बार हुबली धारवाड़ सेंट्रल सीट से सांसद, प्रह्लाद जोशी ने भी बीजेपी में अपना कद काफी बढ़ा लिया है। वे इस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी भरोसेमंद हैं और अमित शाह की भी गुड बुक्स में आते हैं, यानी कि पार्टी हाईकमान में सबसे मजबूत नेताओं की नजर उन पर रहती है। वे बीजेपी के लिए एक आउट ऑफ द बॉक्स वाले सीएम साबित हो सकते हैं, पार्टी ने कई राज्यों में ऐसे ही फैसले लेकर सभी को हैरत में डाला है। लेकिन प्रह्लाद जोशी का लिंगायत समुदाय से ना आना कर्नाटक की सियासत में उन्हें थोड़ा मिसफिट कर जाता है।

एचडी कुमारस्वामी
किंगमेकर जब किंग बन जाता है तो उसकी किस्मत की जितनी तारीफ की जाए, वो कम रहती है। कर्नाटक की राजनीति में ये बात एचडी कुमारस्वामी पर एकदम फिट बैठती है। वे दो बार सिर्फ मुख्यमंत्री नहीं बने हैं, बल्कि उन्होंने उस समय ये पद संभाला है जब उनकी पार्टी बहुमत से कोसो दूर रही है। अब एक बार फिर वे सीएम दावेदार तो हैं क्योंकि अगर किसी पार्टी को चुनाव में बहुमत नहीं मिलता है तो उस स्थिति में जेडीएस फिर खेल कर सकती है। लेकिन कांग्रेस के साथ उनका पिछला अनुभव कुछ खास नहीं रहा है, जिस तरह से उनकी सरकार गिरी थी, वो कोई भूला नहीं है।

इन सभी नेताओं के अलावा कुछ और आउट ऑफ द बॉक्स वाले विकल्प पार्टियों के पास मौजूद हैं। इस लिस्ट में बीजेपी के लिए सीटी रवि, एसएन संतोष जैसे नेता शामिल हैं, तो वहीं कांग्रेस मल्लिकार्जुन खड़गे, एमबी पाटिल जैसे नेताओं पर दांव चल सकती है। यानी कि एक तरह से देखा जाए तो कुल 11 मुख्यमंत्री के प्रबल दावेदार दिखाई पड़ते हैं, अब कौन मुख्यमंत्री बनता है, ये तो चुनावी जीत किसकी होती है, इस पर निर्भर करेगा।

कर्नाटक चुनाव की पूरी जानकारी
कर्नाटक चुनाव की बात करें तो 10 मई को वोटिंग होने वाली है और 13 मई को नतीजे आएंगे। वर्तमान में राज्य में बीजेपी की सरकार है और बसवराज बोम्मई मुख्यमंत्री हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में राज्य में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था। उस समय बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और उसके खाते में 104 सीटें गई थीं, कांग्रेस की बात करें तो उसका आंकड़ा 80 पहुंच पाया था और जेडीएस को 37 सीटों के साथ संतुष्ट करना पड़ा था।

 

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