ED प्रमुख के सेवा विस्तार का केंद्र ने किया बचाव, तो SC ने पूछा- क्या एक व्यक्ति के जाने से कमजोर हो जाएगी एजेंसी

नई दिल्ली

प्रवर्तन निदेशालय के प्रमुख संजय मिश्रा के कार्यकाल के तीसरे विस्तार का मामला सुप्रीम कोर्ट में है। उनके एक्सटेंशन के विरोध में दायर याचिकाओं पर सोमवार (8 मई, 2023) को सुनवाई हुई। केंद्र ने संजय मिश्रा का कार्यकाल बढ़ाए जाने का कोर्ट में बचाव किया। केंद्र ने कहा कि फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की समीक्षा की वजह से उनका कार्यकाल बढ़ाया गया। वहीं, मामले की सुनवाई कर रही बेंच का कहना है कि क्या एक व्यक्ति के हटने से केंद्रीय एजेंसी अप्रभावी हो जाएगी। संजय मिश्रा को मिले तीसरे एक्सटेंशन के बाद वह इस साल नवंबर में रिटायर हो रहे हैं।

जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संजय करोल की बेंच इस मामले में सुनवाई कर रही थी। बेंच ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। याचिकाओं में संजय मिश्रा के एक्सटेंशन और कानून में संशोधन कर ईडी निदेशक के अधिकतम कार्यकाल को बढ़ाकर पांच साल किए जाने का विरोध किया गया है।

केंद्र की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, “यह अधिकारी किसी राज्य के डीजीपी नहीं हैं, बल्कि एक संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्था में देश का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिकारी हैं। कोर्ट को उनके कार्यकाल में विस्तार को लेकर दखल नहीं देना चाहिए। वह नवंबर से इस पद पर नहीं होंगे।” उन्होंने कहा कि देश में FATF समीक्षा हो रही है। ऐसे में कुछ दिशा-निर्देशों का पालन करना जरूरी है। केंद्र की ओर से ईडी प्रमुख के कार्यकाल को विस्तार दिए जाने के बचाव में यह भी तर्क दिया गया कि वह मनी लॉन्ड्रिंग जैसे कई महत्वपूर्ण मामलों की जांच में शामिल हैं, जिसमें उनका बने रहना जरूरी है। एसजी ने कहा कि FATF समीक्षा 2019 में ही होनी थी, लेकिन कोरोना महामारी के कारण नहीं हो सकी और यह इस साल हो रहा है। उन्होंने कहा, “मनी लॉन्ड्रिंग, टेरर फंडिंग आदि को रोकने के लिए कदम उठाने में देश की गतिविधियों का पूर्ण मूल्यांकन 18 महीने की अवधि के लिए होता है। हर सदस्य देश को इस प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है और भारत का चौथे दौर में मूल्यांकन किया जा रहा है।”

इस पर कोर्ट की तरफ से सवाल किया गया कि FATF समीक्षा की बात पहले कोर्ट को क्यों नहीं बताई गई, जब साल 2021 में कोर्ट ने ईडी के कार्यकाल से जुड़े मामले में फैसला सुनाया था। उन्होंने यह भी पूछा कि सरकार को इसके बार में कब पता चला। इसके जवाब में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि 2019 में ही सरकार को इसके बारे में पता था और कोर्ट को भी इसकी जानकारी दी गई थी। इसके अलावा, ईडी प्रमुख को एक्सटेंशन देने वाले अधिकारी को भी इसके बारे में पता था। साल 2021 में केंद्रीय सतर्कता आयोग (संशोधन) विधेयक, 2021 में किए गए संशोधनों के साथ ईडी प्रमुख को अधिकतम पांच साल का कार्यकाल देने की मौजूदा व्यवस्था लागू की गई थी।

एक याचिकाकर्ता के वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि ईडी एक ऐसी संस्था है, जो देश और हर राज्य के सभी तरह के मामलों की जांच कर रही है। इसलिए इसे पुनीत और स्वतंत्र होना चाहिए। वहीं, गैर सरकारी संगठन कॉमन कॉज की तरफ से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि पिछले कुछ सालों में ईडी सीबीआई की तुलना में अधिक शक्तिशाली हो गया है और 95 प्रतिशत मामलों की जांच वह विपक्षी दलों के लोगों के खिलाफ कर रहा है। ईडी निदेशक के कार्यकाल का विस्तार एजेंसी की स्वतंत्रता से समझौता करेगा।

 

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