‘हर राज्य PM को पिता की तरह देखता है’, SC के फैसले के बाद बोले केजरीवाल

नई दिल्ली,

दिल्ली में केजरीवाल सरकार और एलजी के बीच चली आ रही जंग गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुलझ गई. सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में ये क्लियर कर दिया कि दिल्ली में असली बॉस चुनी हुई सरकार ही है. इस फैसले के बाद सीएम केजरीवाल ने मीडिया से बात की और इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने इस फैसले को अपनी सबसे बड़ी जीत बताया. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश कई मायनों में बहुत ही ऐतिहासिक आर्डर है. दिल्ली के लोगों की बड़ी जीत है.

सुप्रीम कोर्ट ने किया न्याय: केजरीवाल
उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के लोगों के साथ में आज न्याय किया है. इसके साथ ही दिल्ली की जनता का आभार भी जताया, जिन्होंने इतने सालों तक उनका साथ दिया. इसके बाद जब सीएम से नई नौकरियों के बारे में सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि, सर्विसेज आने के बाद नई पोस्ट क्रिएट कर सकते हैं. इसके साथ ही अगर किसी भी विभाग में या कोई भी अफसर भ्रष्टाचार करता है तो विजिलेंस सरकार के पास है, और ऐसे मामलों में विजिलेंस की कार्रवाई होगी. एलजी को लेकर जब उनसे सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, बस उनसे ही आशीर्वाद लेने जा रहा हूं.

‘पहले थी जिम्मेदारी, अब जिम्मेदारी निभाने की पावर’
मीडिया ने जब सीएम से जिम्मेदारी मिलने की बात कही तो केजरीवाल ने कहा कि, जिम्मेदारी पहले भी थी, अब जिम्मेदारी बढ़ गई. बल्कि अब जिम्मेदारी की पावर दे दी है. ये शक्ति सुप्रीम कोर्ट ने दी है. पिछले साल मोहल्ला क्लिनिक में, बजट पास होते हुए भी बजट नहीं जाता था. हाल के दिनों में बहुत सारे फैसले लिए गए, लेकिन उन्हें अमल में लाने से रोका गया.

अब इस फैसले के बाद बीजेपी वाले हमें काम करने दे. उन्होंने भाजपा को संदेश देते हुए कहा कि दिल्ली में राज करना है तो दिल्ली वालों का दिल जीत लो. काम में टांग क्यों अड़ाते हो. सीएम ने कहा कि अब दिल्ली में कुशल प्रशासन का मॉडल देश के सामने रखेगा. काम करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों को मौका दिया जाएगा. गलत काम करने वालों को भुगतना पड़ेगा.

दिल्ली में रोका गया काम- सीएम
अभी तक दिल्ली में कामकाज को रोका गया था, मेरे दोनों हाथ बांध कर नदी में फेंक दिया गया था. लेकिन, अब अधिकारियों कर्मचारियों को जनता के प्रति जवाबदेह बनाया जाएगा. तमाम दिक्कतों के बावजूद दिल्ली में शानदार काम हुआ है. उन्होंने कहा कि, मुझे लगता है कि अब इतना सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट जाने की जरूरत न पड़े.

पिता के समान होता है प्रधानमंत्रीः सीएम केजरीवाल
उन्होंने दिल्ली सरकार बनाम एलजी विवाद की शुरुआत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि, सन 2015 में सरकार बनने के 3 महीने के अंदर ही प्रधानमंत्री ने एक आदेश पारित करके केंद्र सरकार से आदेश पारित करके मामले एलजी को दे दिए. इसका मतलब ये हुआ कि दिल्ली सरकार में काम करने वाले जितने भी अधिकारी और कर्मचारी हैं ऊपर से लेकर नीचे तक. वो चुनी सरकार के अधिकार में नहीं होगा. हम शिक्षा सचिव नियुक्त नहीं कर सकते थे.

पीएम मोदी सारे देश के पीएम हैं, वह हमारे भी प्रधानमंत्री हैं. प्रधानमंत्री पिता के समान होते हैं. पिता की जिम्मेदारी होती है सारे बच्चों का पालन पोषण करें. मुसीबत के समय हमें उम्मीद होती है कि वह हमारी मदद करेंगे. लेकिन 8 साल हमें बिना पावर के काम करना पड़ा. उनके इस आदेश से किसी को कोई लाभ नहीं हुआ. इसलिए ऐसा नहीं करना चाहिए था.

दिल्ली सरकार को मिले हैं ये अधिकार
– एलजी के पास दिल्ली से जुड़े मुद्दों पर व्यापक प्रशासनिक अधिकार नहीं हो सकते. यानी दिल्ली की चुनी हुई सरकार के पास प्रशासनिक सेवा का अधिकार.
– दिल्ली सरकार के पास अधिकारियों की तैनाती और तबादले का अधिकार.
– एलजी के पास दिल्ली विधानसभा और निर्वाचित सरकार की विधायी शक्तियों में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं.
– उपराज्यपाल दिल्ली सरकार की सलाह और मदद से चलाएंगे प्रशासन.
– केंद्र का कानून न हो तो दिल्ली सरकार बना सकती है नियम.

सुप्रीम कोर्ट ने की ये अहम टिप्पणियां
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली की विधानसभा प्रतिनिधि लोकतंत्र के सिद्धांत का प्रतीक है, उसे जन आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करने के लिए कानून बनाने की शक्तियां दी गई हैं.

– सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संघवाद के सिद्धांत का सम्मान किया जाना चाहिए. केंद्र सभी विधायी, नियुक्ति शक्तियों को अपने हाथ में नहीं ले सकता. अगर चुनी हुई सरकार अधिकारियों को नियंत्रित नहीं कर सकती है तो वो लोगों के लिए सामूहिक दायित्व का निर्वाह कैसे करेगी? अगर चुनी हुई सरकार के पास यह अधिकार नहीं रहता तो फिर जवाबदेही की ट्रिपल चेन पूरी नहीं होती.

-सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली एक पूर्ण राज्य नहीं है. ऐसे में राज्य पहली सूची में नहीं आता. NCT दिल्ली के अधिकार दूसरे राज्यों की तुलना में कम हैं, लेकिन विधानसभा को सूची 2 और 3 के तहत विषयों पर अधिकार प्रदान किया गया है. लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार के पास लोगों की इच्छा को लागू करने की शक्ति होनी चाहिए.

-सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के पास कानून बनाने का अधिकार है, लेकिन केंद्र का इतना ज्यादा दखल ना हो कि वह राज्य सरकार का काम अपने हाथ में ले ले. संवैधानिक बेंच ने कहा कि दिल्ली सरकार की शक्तियों को सीमित करने को लिए केंद्र की दलीलों से निपटना जरूरी है. एनसीटीडी एक्ट का अनुच्छेद 239 aa काफी विस्तृत अधिकार परिभाषित करता है.

-संविधान बेंच ने कहा- अगर अधिकारी मंत्रियों को रिपोर्ट करना बंद कर देते हैं या उनके निर्देशों का पालन नहीं करते हैं, तो सामूहिक उत्तरदायित्व का सिद्धांत प्रभावित होता है. अगर “सेवाओं” को विधायी और कार्यकारी परिक्षेत्र से बाहर रखा जाता है तो मंत्रियों को उन सिविल सेवकों को नियंत्रित करने से बाहर रखा जाएगा, जिन्हें कार्यकारी निर्णयों को लागू करना है.

 

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