भारत से लौटते ही बिलावल भुट्टो ने कश्मीर पर उठाया ये कदम

नई दिल्ली,

पाकिस्तान में जहां एक तरफ अराजकता की स्थिति है, वहीं दूसरी तरफ आर्थिक संकट ने उसकी कमर तोड़ रखी है लेकिन फिर भी वो कश्मीर के मुद्दे को बार-बार उछालने से बाज नहीं आ रहा है. भारत से लौटने के कुछ दिनों बाद ही पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने कहा है कि वो कश्मीरियों के संघर्ष में उनका साथ देते रहेंगे. ये बात उन्होंने गुरुवार को हुर्रियत नेताओं से मुलाकात के दौरान कही है.

भारत को उकसाने के एक और कदम में बिलावल ने पीओके की ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नेताओं से इस्लामाबाद में मुलाकात की है. मुलाकात के दौरान उन्होंने हुर्रियत नेताओं से कहा है कि अपनी भारत यात्रा के दौरान उन्होंने कश्मीर को लेकर पाकिस्तान के रुख को मजबूती से सामने रखा.

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, ‘आज ऑल पार्टीज हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के एक प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया. उनसे कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान के समर्थन की बात की. आत्मनिर्णय का अधिकार हासिल करने को लेकर कश्मीरी लोगों के न्यायोचित संघर्ष में उनके साहस और बलिदान को सलाम किया.’बिलावल ने हुर्रियत नेताओं से बातचीत में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि कश्मीर में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों पर ध्यान दिया जाए.

पाकिस्तान का विदेश मंत्रालय क्या बोला?
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी बिलावल के हुर्रियत नेताओं से मिलने पर एक बयान जारी किया है. मंत्रालय ने कहा है कि बिलावल भुट्टो ने हुर्रियत के नेताओं से मुलाकात के दौरान कश्मीरियों के संघर्ष में उनके समर्थन की बात कही और उनके अब तक के संघर्ष को सलाम किया.मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि हुर्रियत कॉन्फ्रेंस ने कश्मीर पर समर्थन के लिए पाकिस्तान का धन्यवाद किया.

संयुक्त राष्ट्र में भी कश्मीर के मुद्दे पर बोला पाक
इधर, पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर में जी-20 की बैठक आयोजित करने को लेकर आपत्ति जताई है. जी-20 का मेजबान भारत 22-24 मई के बीच टूरिज्म वर्किंग ग्रुप की बैठक कश्मीर घाटी में आयोजित कर रहा है जिसे लेकर पाकिस्तान भड़का हुआ है.

संयुक्त राष्ट्र में बुधवार को जी-77 की बैठक में पाकिस्तान के राजदूत मुनीर अकरम ने कश्मीर में जी-20 की बैठक आयोजित करने का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के अध्यक्ष के रूप में अपने राष्ट्रीय एजेंडे को बढ़ावा देने के लिए अपनी स्थिति का दुरुपयोग न करे.

उन्होंने कहा, ‘इस संदर्भ में पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता प्राप्त विवादित क्षेत्र जम्मू और कश्मीर में एक या एक से अधिक G20 बैठकें आयोजित करने के भारत के फैसले पर अपना कड़ा विरोध दर्ज करता है.’उन्होंने कहा कि भारत को कश्मीर में मीटिंग करने के बजाए संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्तों को कश्मीर में आमंत्रित करना चाहिए जिससे वो कश्मीर में मानवाधिकार की स्थिति की जांच कर सके.पाकिस्तानी राजदूत की टिप्पणी पर भारत की रुचिरा कंबोज ने दो टूक जवाब देते हुए कहा कि कश्मीर पर भारत की स्थिति के बार में सबको पता है.

भारत ने कश्मीर का राग अलापने पर बिलावल को मिला था करारा जवाब
4-5 मई को आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने भारत आए बिलावल भुट्टो ने भी कश्मीर का राग अलापा था. बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान कश्मीर में जी-20 की बैठक आयोजित करने के भारत के कदम की निंदा करता है.

उन्होंने कहा था, ‘हम इसकी निंदा करते हैं और वक्त आने पर हम इसका ऐसा जवाब देंगे जो याद रखा जाएगा. विवादित क्षेत्र में जी-20 की बैठक आयोजित करना भारत की संकीर्णता को दिखाता है और यह दुनिया को भारत का घमंड दिखाता है कि उसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और द्विपक्षीय समझौतों की बिल्कुल परवाह नहीं है.’

बिलावल ने दावा किया था कि कश्मीर की बैठक में जी-20 के सभी देश शामिल नहीं होंगे क्योंकि वो अपनी नैतिकता से समझौता नहीं करना चाहेंगे.उनके इस बयान पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने तीखा पलटवार करते हुए कहा था, ‘इस बारे में हम किसी ऐसे मुल्क से बात नहीं कर सकते जो इसका हिस्सा नहीं है. जम्मू-कश्मीर हमेशा से भारत का हिस्सा है और रहेगा. जी-20 की बैठकें भारत के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में होंगी, यह स्वाभाविक है.’

 

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