बीजेपी-सपा-बसपा की क्यों बढ़ गई हैं धड़कनें? क्या कहता है यूपी निकाय चुनाव का वोटिंग पैटर्न

नई दिल्ली,

उत्तर प्रदेश के नगर निकाय चुनाव का मतदान हो चुका है. निकाय चुनाव के पहले चरण के दौरान 37 जिलों में 52 फीसदी तो दूसरे चरण के दौरान 38 जिलों में 53 फीसदी वोटिंग हुई. कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजों के साथ ही शनिवार को यह पता चल सकेगा कि यूपी के शहरों-कस्बों में किसकी सरकार होगी. यूपी निकाय चुनाव को 2024 का लिटमस टेस्ट माना जा रहा है. इन चुनावों में बीजेपी, सपा, बसपा, कांग्रेस सहित सभी राजनीतिक पार्टियों की साख दांव पर लगी हुई है.

निकाय चुनाव का पूरा दारोमदार सवर्ण मतदाताओं पर होता है. सूबे के कुल 17 नगर निगम में 11 में सवर्ण वोटर 50 फीसदी से भी ज्यादा हैं. मुस्लिम मतदाता भी निकाय चुनाव में गेमचेंजर की भूमिका निभाते हैं. इसीलिए बीजेपी और सपा ने सवर्ण उम्मीदवार को मैदान में उतार रखा था तो वहीं बसपा ने मुस्लिमों पर सबसे ज्यादा भरोसा जताया. बसपा ने 64 फीसदी मुस्लिम कैंडिडेट उतारे थे जबकि बसपा-कांग्रेस से 23-23 फीसदी मुस्लिम प्रत्याशी थे. ऐसे में विपक्षी दलों के बीच मुस्लिम वोटों के बंटवारे का बीजेपी को सीधा फायदा मिल सकता है.

निकाय चुनाव की कुल सीटें
यूपी में नगर निकाय की कुल 760 सीटों पर चुनाव हुए हैं जिनमें 17 नगर निगम, 199 नगर पालिका और 544 नगर पंचायत की सीटें हैं. पहले फेज में 9 मंडलों के 37 जिलों में 10 नगर निगम, 820 पार्षद, 103 नगर पालिका परिषद अध्यक्ष, 2740 नगर पालिका परिषद सदस्य, 275 नगर पंचायत अध्यक्ष और 3745 नगर पंचायत सदस्यों के लिए चुनाव हुए हैं. वहीं, दूसरे चरण में 9 मंडल के 38 जिलों की 7 नगर निगम, 95 नगर पालिका, 267 नगर पंचायत पद और पार्षद सीटों पर चुनाव हुए हैं.

2017 का सियासी समीकरण
यूपी में 2017 के नगर निकाय चुनाव के आंकड़े देखें तो बीजेपी का पलड़ा भारी नजर आता है. बीजेपी तब कुल 16 नगर निगम में से 14 में अपने मेयर बनाने में सफल रही थी और दो मेयर बसपा के बने थे. नगर पालिका अध्यक्ष के नतीजे देखें तो 198 शहरों में से बीजेपी 67, सपा 45, बसपा 28 और निर्दलीय 58 जगह जीते थे. ऐसे ही नगर पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में 538 कस्बों में से बीजेपी 100, सपा 83, बसपा 74 और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 181 जगह जीत दर्ज की थी.

पांच साल में बदले सियासी समीकरण
साल 2017 में 16 नगर सीटों पर चुनाव हुए थे लेकिन इस बार 17 नगर निगम सीटों पर चुनाव हुए हैं. न सिर्फ नगर निगम की संख्या, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक समीकरण भी पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार पूरी तरह से बदले-बदले नजर आ रहे हैं. बीजेपी को कम वोटिंग और बगावत से डेंट लग सकता है जबकि सपा को बसपा के मुस्लिम कार्ड से चोट पहुंच सकती है. बसपा ने मुस्लिम बहुल सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार उतारकर सपा के समीकरण में सेंधमारी करने की हरसंभव कोशिश की है. हालांकि, बसपा के लिए पिछले चुनाव की अपनी दो सीटें बचा पाना भी मुश्किल नजर आ रहा है तो सपा और कांग्रेस के सामने खाता खोलने की चुनौती है.

बीजेपी के लिए सबसे ज्यादा चुनौती
बीजेपी ने पिछली बार नगर निगम में सबसे ज्यादा 14 मेयर सीटें जीती थी. इस तरह पार्टी के सामने अपने पुराने नतीजे दोहराने की नहीं बल्कि उससे ज्यादा सीटें जीतने की चुनौती है. बीजेपी ने पिछली बार नगर निगम के मेयर चुनाव में बेहतर प्रदर्शन किया था, लेकिन नगर पालिका और नगर पंचायत में पिछड़ गई थी. बीजेपी को तब सपा और निर्दल उम्मीदवारों ने कड़ी टक्कर दी थी. नगर पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में बीजेपी की तुलना में दोगुना अधिक निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव जीते थे. इस बार सपा और बसपा ने पूरे दमखम के साथ चुनाव लड़ा है जिसके चलते बीजेपी की चुनौती बढ़ गई है.

सपा-बसपा किसके लिए कौन चुनौती
साल 2022 के विधानसभा चुनाव में मुस्लिमों का वोट एकमुश्त सपा के खाते में गया था लेकिन निकाय चुनाव में वोटों का बिखराव होता नजर आ रहा है. सपा ने नगर निगम की मेयर सीट पर ब्राह्मण-ओबीसी कार्ड खेला है लेकिन चार मुस्लिम कैंडिडेट भी उतारे. साल 2017 में अलीगढ़ और मेरठ नगर निगम में बसपा काबिज रही. इन दोनों सीटों के साथ बसपा ने कुल 17 में से 11 नगर निगम में मुस्लिम प्रत्याशी उतारे. बसपा के इस दांव की वजह से सहारनपुर से लेकर मेरठ और अलीगढ़ तक मुस्लिम वोट बंटता नजर आया है.

मुरादाबाद नगर निगम सीट पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधी लड़ाई होती नजर आई है लेकिन सपा और बसपा भी मुस्लिम वोटों के सहारे मैदान में थी. इस तरह मुस्लिम वोटों के बिखराव का सीधा फायदा बीजेपी को मिल सकता है तो बरेली और शाहजहांपुर में भी मुस्लिम वोटों का बिखराव दिखा है. कानपुर, अयोध्या, लखनऊ और गोरखपुर में सपा और बीजेपी के बीच मुकाबला होता नजर आया. प्रयागराज और वाराणसी में त्रिकोणीय लड़ाई दिख रही है तो झांसी और आगरा में बीजेपी और बसपा के बीच सीधा मुकाबला नजर आ रहा है.

सूबे के 17 नगर निगम मेयर सीटों के चुनाव मुकाबला देखें तो 10 सीटों पर बीजेपी को बढ़त मिल सकती है. चार सीटों पर सपा और बीजेपी के बीच सीधी लड़ाई है तो वहीं तीन सीट पर बसपा और बीजेपी के बीच सीधा मुकाबला होने के आसार हैं.

 

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