स्थानीय मुद्दे, बजरंग दल पर बैन का वादा… कर्नाटक में कांग्रेस की जीत के 8 बड़े कारण

नई दिल्ली,

कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने धमाकेदार जीत दर्ज की है. पार्टी को राज्य में स्पष्ट बहुमत मिल गया है. इसी के साथ कांग्रेस ने सत्ताधारी बीजेपी को बाहर का रास्ता दिखा दिया. कांग्रेस ने रणनीति के तहत इस चुनाव में जीत हासिल की. कांग्रेस ने ना सिर्फ स्थानीय मुद्दों पर फोकस किया, बल्कि भ्रष्टाचार को चुनाव का प्रमुख मुद्दा भी बनाया.

आइए जानते हैं कांग्रेस की जीत की प्रमुख वजह क्या रहीं?

1. बोम्मई सरकार के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी
कर्नाटक में 2019 में कांग्रेस के कुछ विधायकों की बगावत के बाद कांग्रेस-जेडीएस सरकार गिर गई थी. इसके बाद बीजेपी की सरकार बनी थी. बीजेपी ने येदियुरप्पा को हटाकर बसवराज बोम्मई को सीएम बनाया था. लेकिन इस चुनाव से पहले बोम्मई सरकार को लेकर मतदाताओं के बीच सत्ता विरोधी लहर बढ़ रही थी. जनता में चुनावी वादे को पूरा करने को लेकर बीजेपी के खिलाफ असंतोष तेजी से बढ़ा.

2. स्थानीय नेतृत्व ने तय किए मुद्दे
बीजेपी ने इस चुनाव में एनआरसी, समान नागरिक संहिता, भक्तों को मंदिर प्रशासन की पूर्ण स्वायत्तता प्रदान करने जैसे मुद्दों को उठाया. माना जा रहा था कि बीजेपी के ये मुद्दे हिंदू वोटरों को अपने पक्ष में करने के लिए थे. दूसरी ओर कांग्रेस ने स्थानीय मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया.

दरअसल, राहुल गांधी ने 16 अप्रैल को कोलार में अपने कर्नाटक अभियान की शुरुआत गौतम अडानी के मुद्दे पर पीएम मोदी को घेरने से की थी. फिर स्थानीय नेतृत्व ने चुनाव प्रचार को मोदी से हटाकर स्थानीय मुद्दों पर केंद्रित करने की सलाह दी. इसके तुरंत बाद आलाकमान ने नई रणनीति के तहत काम किया. प्रियंका गांधी ने बार-बार कहा कि चुनाव कर्नाटक के बारे में था न कि मोदी के बारे में. उन्होंने मतदाताओं से स्थानीय मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने पर जोर देने के लिए कहा.

3. पार्टी अध्यक्ष खड़गे ने प्रदेश में डेरा डाला
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे कर्नाटक से हैं. ऐसे में उन्होंने राज्य में प्रचार का जिम्मा संभाला. 80 साल के अध्यक्ष खड़गे की उपस्थिति ने पार्टी कार्यकर्ताओं को उत्साहित किया. उन्होंने राज्य में जमकर प्रचार किया. खड़गे ने कर्नाटक चुनावों के लिए कांग्रेस का घोषणापत्र भी जारी किया.

4. पूरे गांधी परिवार ने किया प्रचार
कर्नाटक चुनाव में पूरे गांधी परिवार (सोनिया, राहुल और प्रियंका) ने प्रचार किया, काफी लंबे वक्त बाद ऐसा देखा गया. सोनिया गांधी ने 14 दिसंबर 2019 के बाद पहली बार किसी सार्वजनिक रैली को संबोधित किया. उन्होंने पिछले 5-6 साल से किसी चुनावी रैली को संबोधित नहीं किया था. उधर, राहुल और प्रियंका ने सीधे तौर पर वोटरों से संवाद किया. इन्हें कांग्रेस के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर खूब शेयर किया गया. राहुल डिलीवरी ब्वॉय के साथ बाइक पर बैठकर स्थानीय मुद्दों को समझते तक नजर आए.

5. स्थानीय मुद्दों पर किया फोकस
कांग्रेस ने चुनाव से एक साल पहले ही मुद्दों पर ध्यान देना शुरू कर दिया था. पीएम मोदी के खिलाफ खड़गे की जहरीले सांप की टिप्पणी के खिलाफ भाजपा ने अवसर को भुनाने की कोशिश की. इतना ही नहीं सोनिया गांधी के ‘संप्रभुता’ वाले बयान को बीजेपी ने भारत पर हमले के रूप में दिखाया. लेकिन कांग्रेस ने बीजेपी नेताओं पर पलटवार न करते हुए स्थानीय मुद्दों पर फोकस किया और लगातार भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बीजेपी को घेरा. कांग्रेस ने गारंटी कार्ड के माध्यम से डोर टू डोर अभियान चलाया और ज्यादा से ज्यादा घरों तक पहुंचने की कोशिश की. पार्टी ने चरणबद्ध तरीके से गारंटियों का ऐलान किया.

6. कांग्रेस ने अंदरूनी कलह सामने नहीं आने दी
कांग्रेस ने सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच मनमुटाव को जनता के सामने नहीं आने दिया. राहुल की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान दोनों नेता साथ दिखे. कांग्रेस ने अभियान के बीच में सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच बातचीत का वीडियो बातचीत जारी किया, ताकि कार्यकर्ताओं और जनता में पार्टी के भीतर कोई विवाद न होने का संदेश दिया जा सके.

7. PayCM, 40% कमीशन के मुद्दे पर बोम्मई सरकार को घेरा
कांग्रेस ने बसवराज बोम्मई सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाने की मास्टरस्ट्रोक रणनीति बनाई. बोम्मई को PayCM बताते हुए 40% सरकार के पोस्टर जारी किए गए. ताकि जनता के बीच यह संदेश दिया जा सके कि बोम्मई सरकार में जमकर भ्रष्टाचार हो रहा है.

8. बजरंग दल पर बैन का वादा कर मुस्लिम वोट को लुभाया
कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में बजरंग दल पर बैन का वादा किया. इसके चलते धुव्रीकरण हुआ, कांग्रेस को जेडीएस के दबदबे वाली सीटों पर भी बढ़त मिली. कांग्रेस ने महिलाओं और युवाओं के बीच भाजपा के वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए भी कदम उठाए. पार्टी ने गरीबों के बीच अपनी बात पहुंचाने के लिए चुनाव से पहले ही अपनी गारंटी जारी कर दी थीं. ये गारंटियां महिलाओं और युवाओं को आकर्षित करने के लिए डिजाइन की गई थीं और इनमें महंगाई और बेरोजगारी को मुख्य मुद्दा बनाया गया था.

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