बीएचईएल के जंबूरी मैदान के जाट महाकुंभ में पहुंचे सीएम शिवराज और पूर्व सीएम कमलनाथ

– शिवराज ने तेजाजी बोर्ड गठन करने की घोषणा तो नाथ ने कहा घोषणा मशीन नहीं, सिर्फ क्रियान्वयन करता हूं

भोपाल

बीएचईएल के जंबूरी मैदान में जाट महाकुंभ का आयोजन किया गया इसमें पहले सीएम शिवराज सिंह और फिर पूर्व सीएम कमलनाथ शामिल हुए। सीएम शिवराज सिंह ने जाट महाकुंभ में वीर तेजाजी बोर्ड का गठन करने की घोषणा की। साथ ही तेजाजी महाराज के निर्वाण दिवस तेजादशमी पर ऐच्छिक अवकाश का भी ऐलान किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के स्कूलों में जाट समाज के इतिहास को भी पढाया जाएगा।

वहीं कमलनाथ ने कहा कि मैं घोषणा नहीं करता, क्रियान्वयन में विश्वास रखता हूं। समाज के लोगों को 10 टिकट देने की मांग पर कमलनाथ ने कहा कि यह मामला केंद्रीय नेतृत्व का है आपकी बात पार्टी में पहुंचाएंगे। जाट समाज के शैक्षणिक भवन के लिए भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में जमीन देने के लिए कमल पटेल को अधिकृत किया। वहीं पूर्व सीएम नाथ ने कहा कि ये वीरों का महाकुंभ है। हमारी संस्कृति हमें एक झंडे के नीचे रखती है। आपको इसे बचाना होगा।

पूर्व राज्यपाल मलिक नहीं पहुंचे महाकुंभ में
महाकुंभ में समाज के बड़े नेताओं को आमंत्रित किया गया था। समाज के लोगों को पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक के पहुंचने की काफी उम्मीद थी लेकिन वह कार्यक्रम में नहीं पहुंच सकें। उनके अलावा मुख्यमंत्री चौहान, पूर्व सीएम नाथ, केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान, कैलाश चौधरी, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हनुमान बेनीवाल, अखिल भारतीय जाट महासभा के राष्ट्रीय महासचिव युद्धवीर सिंह जाट, आरक्षण संघर्ष समिति के यशपाल मलिक, इंडिया नेशनल लोकदल के अध्यक्ष अभय चौटाला, राजस्थान के पूर्व मंत्री रामनारायण डूडी, पूर्व सांसद बद्री लाल जाखड़, मध्यप्रदेश के सांसद राव उदय प्रताप सिंह इस महाकुंभ उपस्थित थे।

समाज की मुख्य मांगें
तेजाजी कल्याण बोर्ड का गठन किया जाए, तेजादशमी पर सरकारी छुट्टी घोषित की जाए, ओबीसी आरक्षण की बहाली की जाए. 27 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाए . शैक्षणिक भवन के लिए जमीन दी जाए। चुनाव में समाज के उम्मीदवारों को भाजपा से 10 टिकट दिए जाएं , ग्वालियर में महाराजा भीमसिंह राणा की छतरी और भीमताल को यथा स्थान पर संरक्षित किया जाए, ओंकारेश्वर में स्थित जाट धर्मशाला को भी यथास्थान पर रखा जाए, हूण विजेता जाट सम्राट यशोधर्मन विर्क की मूर्ति भोपाल में स्थापित की जाए. मंदसौर में स्थित मूर्ति के नीचे शिलालेख पर जाट सम्राट यशोधर्मन विर्क लिखा जाए । जोगा जाट किले की मरम्मत कराकर शिलालेख लगाया जाए. जाट महापुरुषों के इतिहास को मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए।

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