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भेल क्षेत्र का हथाई खेड़ा डैम बना खतरा, बढ़ रहा है यातायात का दबाव

भोपाल।

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राजधानी से सटे हुए आनंद नगर और कोकता के बीच बने हथाई खेड़ा डैम की जर्जर हालात से आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल बना हुआ है। प्रशासन की इस ओर अनदेखी और लापरवाही किसी बड़ी दुर्घटना को निमंत्रण दे सकती है। आसपास के क्षेत्रवासियों ने कई बार संबंधित विभाग को इस बारे में शिकायत करने भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

आनन्द नगर से कोकता के बीच बना पचास साल पुराना डैम खतरनाक साबित हो रहा हैं। इस और न तो सरकार का ध्यान है और नहीं स्थानीय जन प्रतिनिधियों का। आनन्द नगर और कोकता के बीच न केवल शिक्षण संस्थानों का इजाफा हुआ है बल्कि सरकार ने नया ट्रांसपोर्ट नगर भी बसाया हैं। इससे हथाईखेड़ा डेम पर यातायात का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा हैं। वर्षो पुराना डेम होने के कारण इस डेम की सीमेंट नीचे से झड़ चुकी हैं यहीं नहीं लोहे की छड़ों पर पूरी तरह जंग लग चुका हैं स्थानीय लोग इस डेम की जर्जर हालत देख डरे हुए हैं।

लोगों का कहना है कि बारिश में इसका मरम्मत कार्य नहीं किया गया तो यह जानलेवा साबित हो सकता हैं। आसपास के आनन्द नगर, हथाईखेड़ा, कान्हासैय्या, अनन्तपुरा सहित कई गांवों के लिए यह डेम खतरा बना हुआ हैं। राज्य शासन हथाईखेड़ा डेम को पर्यटन केन्द्र के रूप में विकसित तो नहीं कर पाया लेकिन यहां से कोकता की तरफ जाने के लिए बनाए गए डेम के पुल पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इस पुल की वर्षों से मरम्मत नहीं की गई है। वर्तमान में पुल जर्जर अवस्था में पहुंच गया है। इस पुल से छोटो वाहनों सहित भारी वाहनों का आवागमन होता है। यह पुल कभी भी बड़ी दुर्घटना का सबब बन सकता है।

सरकार द्वारा बड़े तालाब की तर्ज पर राजधानी के अन्य क्षेत्रों में भी लोगों के लिए पर्यटन स्थलों का निर्माण किया जा रहा है। इसके तहत शासन द्वारा उप नगर भेल क्षेत्र के रहवासियों की सहूलियतों के मद्देनजर हथाईखेड़ा डेम को पर्यटन केन्द्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके लिए यहां पर काम भी किया गया है। इन सबके बीच शासन की निगाहें डेम के उस पुल की तरफ नहीं गई जो वर्षों से अपनी जर्जर अवस्था को बयां कर रहा है।

इस पुल का निर्माण पचास साल पहले किया गया था। इसके निर्माण से कान्हासैया,अनंतपुरा, कोकता, हथाईखेड़ा आदि गांवों के रहवासियों को लाभ मिल रहा हैं। उस समय इस पुल पर आबादी के हिसाब से ज्यादा लोड नहीं था,लेकिन वर्तमान में हालात बदल गए हैं। धीरे-धीरे क्षेत्रीय विकास के चलते इस पुल पर आवागमन बढऩे के साथ इस पर दबाव भी बढ़ा है। यहां छोटे वाहनों के साथ ही भारी वाहनों का आवागमन भी होता है,लेकिन इस जर्जर पुल पर किसी की निगाहें नहीं पड़ी। नतीजतन पुल धीरे-धीरे और भी जर्जर होता जा रहा हैं।

पुल के अंदर और वाहर की तरफ लगी सीमेंट झड़ गई है। इसके अंदर लगा लोहा साफ बाहर दिखाई दे रहा है। इस पुल के दोनो तरफ किनारों की सीमेंट तो पूरी तरह से झड़ चुकी है। लोहे की रॉड दिख रही हैं। मौजूदा दौर में यहां पर यातायात का दबाव ज्यादा है। सवारी वाहनों,बसों के साथ भारी वाहन भी इस पर रोज दौड़ रहे हैं। ऐसे में समय रहते पुल की मरम्मत पर ध्यान नहीं दिया गया तो यह कभी भी बड़ी दुर्घटना का सबब बन सकता है।

इनका का कहना है-
डेम का पुल जर्जर हो चुका है। इसकी कभी भी मरम्मत नहीं की गई। अब पुल मरम्मत मांग रहा है। शासन को इस दिशा में विशेष ध्यान देना चाहिए। पुल दुर्घटना का कारण बन सकता है।
प्रकाश चौकसे, स्थानीय रहवासी

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