‘यदि मैं रोना शुरू कर दूं तो मुझे माफ करें’, सुप्रीम कोर्ट के जज एमआर शाह हुए भावुक

नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस एमआर शाह की सोमवार को आखिरी बार बेंच पर बैठने के दौरान आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने अपने विदाई भाषण के दौरान राज कपूर की फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ के एक गाने का जिक्र किया। भारत के मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति शाह और न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा ने कहा जस्टिस शाह के साथ बेंच पर बैठना खुशी की बात थी। हमने कई आपराधिक मामले, जीएसटी पर नए कानून को संभाला और वह हमेशा चुनौती के लिए तैयार रहते थे।

न्यायमूर्ति शाह ने कहा मैं एक नारियल की तरह हूं यदि मैं रोना शुरू कर दूं तो कृपया मुझे माफ करें। सभी (बार के सदस्यों) का तहे दिल से धन्यवाद। जस्टिस शाह ने कहा कि मैं रिटायर व्यक्ति नहीं हूं। मैं एक नई पारी शुरू करूंगा और मैं इस पारी के लिए (ईश्वर से) अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करता हूं। इसके बाद उन्होंने राज कपूर की फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ की कुछ पंक्तियां पढ़ीं, कल खेल में हम हो ना हों। गर्दिश में तारे रहेंगे सदा.., और फिर उनकी आंखों में आंसू आ गए।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि उन्होंने न्यायमूर्ति शाह को एक वकील और एक जज दोनों के रूप में देखा है और वह बहुत मेहनती व्यक्ति हैं और एक बहुत ही साहसी इंसान हैं जो नीचे नहीं झुकते, एक क्षमता जो अब गायब हो रही है। मेहता ने कहा, लेकिन लॉर्डशिप ने अपने परिवार के साथ गंभीर अन्याय किया है। आपने जितने फैसले लिखे हैं, वे इस बात की गवाही देते हैं कि आपके परिवार को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है और मुआवजे की बारी अब उनकी होगी।

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