यूनेस्को की लिस्ट में शामिल ब्रिटिश संसद की छत से टपक रहा पानी, दीवारों में भी दरार, आपदा में इमारत के ढहने का अंदेशा

लंदन

ब्रिटिश संसद की वास्तुकला दुनियाभर में मशहूर है और इसे यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थल का दर्जा भी हासिल है। हर साल औसतन 10 लाख लोग इस भव्य इमारत का दौरा करते हैं। हालांकि, ब्रिटिश सांसदों ने बुधवार को आगाह किया कि संसद भवन की दीवारों में पड़ी दरारें बढ़ रही हैं और उसकी छत से पानी भी टपक रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि आपदा की सूरत में यह इमारत किसी भी समय ढह सकती है।

हाउस ऑफ कॉमन्स की लोक लेखा समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि ब्रिटिश संसद की छत से पानी टपक रहा है। उसकी दीवारें दरक रही हैं और इमारत के ढहने का खतरा लगातार बना हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मरम्मत कार्य काफी अरसे से लंबित है। इसे शुरू किए जाने से पहले ही किसी आपदा के कारण इमारत के ढहने का खतरा है। ये लगातार बढ़ता जा रहा है।

मरम्मत के काम पर प्रति सप्ताह खर्च 20 लाख पाउंड
समिति ने कहा कि 19 वीं सदी में निर्मित इस इमारत के नवीकरण का काम काफी धीमी गति से हो रहा है। इसके मरम्मत के काम में तेजी लाए जाने की जरूरत है। नहीं तो आपदा में कभी भी कोई बड़ा नुकसान हो सकता है। मरम्मत के काम पर तकरीबन 20 लाख पाउंड प्रति सप्ताह खर्च हो रहा है।

2016 से संसद में 44 बार आग लगने की घटनाएं हो चुकी है
ब्रिटिश संसद में दो सदन हैं। हाउस ऑफ लॉर्ड्स और हाउस ऑफ़ कॉमन्स। 2016 से संसद में 44 बार आग लगने की घटनाएं हो चुकी है। इसमें आग लगने का खतरा हमेशा बना रहता है। 1834 में पुरानी इमारत में आग लगने के बाद मौजूदा इमारत नए सिरे से बनाई गई थी। संसद भवन के इतना जर्जर होने के बाद भी सांसद इस पर ज्यादा पैसे खर्च करने की हरी झंडी देने से हिचक रहे हैं, क्योंकि बहुत से लोग जो अपनी जिंदगी का गुज़ारा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अगर संसद भवन के लिए सरकार ज्यादा पैसे खर्च करने को मंजूरी देती है तो इससे देश की जनता नाराज हो सकती है।

 

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