UPA की राह पर NDA? कानून मंत्री बदलने में मनमोहन सरकार से अलग नहीं है मोदी कैबिनेट

नई दिल्ली,

2024 के आम चुनावों से ठीक एक साल पहले मोदी कैबिनेट में बड़ा बदलाव हुआ. गुरुवार को किरेन रिजिजू को अचानक कानून मंत्रालय से हटा दिया. उनकी जगह अर्जुनराम मेघवाल को कानून मंत्री बना दिया गया है. केंद्र सरकार के हाई-प्रोफाइल मंत्रियों में से एक बीजेपी के सबसे भरोसेमंद नेता रिजीजू को पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय सौंपा गया है. वहीं इसके कुछ घंटों बाद ही उनके डिप्टी व राज्यमंत्री एसपी सिंह का भी राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर विभाग बदल दिया. अब वे कानून और न्याय मंत्रालय में राज्य मंत्री के स्थान पर स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री होंगे.

केंद्र में जबसे मोदी सरकार आई है, तब से ये पहली या दूसरी बार नहीं है जब कानून मंत्री को बदला गया है. इससे पहले भी कई बार बदलाव किया जा चुका है. वहीं ऐसा ही कुछ 2004 से 2014 तक तक यूपीए की मनमोहन सरकार में भी देखने को मिलता था. दरअसल, मई 2014 में केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनी. तब रविशंकर प्रसाद को कानून मंत्रालय का प्रभार सौंपा गया था. वे मई 2014 से नवंबर 2014 तक कानून और न्याय मंत्री रहे. इसके बाद सदानंद गौड़ा को कानून और न्याय मंत्री बनाया गया. वह लगभग 20 महीने (नवंबर 2014 से जुलाई 2016 तक) तक प्रभारी रहे.

2016 में फिर कानून मंत्री बने रविशंकर प्रसाद
जुलाई 2016 में रविशंकर प्रसाद को फिर से कानून मंत्री बनाया गया और जुलाई 2021 तक वह मंत्रालय के प्रभारी रहे. इसके बाद जुलाई 2021 में किरेन रिजिजू ने कानून मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली. वहीं अब 18 मई 2023 को मोदी सरकार ने अर्जुन राम मेघवाल को रिजिजू की जगह मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी है. मेघवाल 2019 के लोकसभा चुनावों के बाद से तीसरे कानून मंत्री हैं.

यूपीए सरकार में भी कई बार बदले कानून मंत्री
बता दें कि मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने 2004 से 2014 के बीच कई कानून मंत्री देखे थे. 2004 और 2009 के बीच कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए के पहले शासन के दौरान, हंसराज भारद्वाज 22 मई 2004 से 28 मई 2009 तक कानून और न्याय मंत्री थे. वे पूरे पांच साल कानून मंत्री रहे. 2009 और 2014 के बीच यूपीए के दूसरे कार्यकाल के दौरान कई बार कानून मंत्री बदले गए. तब वीरप्पा मोइली मई 2009 से जुलाई 2011 तक केंद्रीय कानून मंत्री थे. जुलाई 2011 के कैबिनेट फेरबदल हुआ और उन्हें फिर से कानून और न्याय के लिए कैबिनेट मंत्री बनाया गया, उनका ये कार्यकाल अक्टूबर 2012 तक चला. अक्टूबर 2012 से मई 2013 के बीच अश्विनी कुमार कानून मंत्री बने. मई 2013 से मई 2014 तक यूपीए शासन के अंतिम वर्ष के दौरान, कपिल सिब्बल कानून मंत्री थे.

रिजिजू और न्यायपालिका के रिश्ते कभी अच्छे नहीं रहे
किरेन रिजिजू बतौर केंद्रीय कानून मंत्री लगातार चर्चा में रहे. उन्होंने कानून मंत्री रहते हुए न्यायपालिका और सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे. रिजिजू और न्यायपालिका के रिश्ते कभी अच्छे नहीं रहे. कानून मंत्री के पद पर किरेन रिजिजू करीब दो साल तक रहे. वे 8 जुलाई 2021 को कानून मंत्री बनाए गए थे. वहीं इससे पहले तक वे राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) खेल एवं युवा कल्याण थे. किरने रिजिजू और सुप्रीम कोर्ट के बीच टकराव बना रहा.

रिजिजू ने न्यायपालिका के प्रति खुले तौर पर टकराव वाला रवैया अपनाया था. माना जा रहा है कि रिजिजू का न्यायपालिका से खुला टकराव मोदी सरकार के लिए मुसीबत न बढ़ा दे, इससे पहले उनके हाथों से कानून मंत्रालय छीन लिया गया.

कौन हैं अर्जुन राम मेघवाल?
बता दें कि अर्जुन राम मेघवाल 2009 से बीकानेर से सांसद हैं. मेघवाल का जन्म बीकानेर के किस्मिदेसर गांव में हुआ. उन्होंने बीकानेर के डूंगर कॉलेज से बीए और एलएलबी की. इसके बाद उन्होंने इसी कॉलेज से मास्टर्स डिग्री (M.A) की. इसके बाद, फिलीपींस विश्वविद्यालय से एमबीए भी किया. वह राजस्थान कैडर के एक आईएएस अधिकारी रहे हैं और उन्हें राजस्थान में अनुसूचित जाति के चेहरे के रूप में देखा जाता है. मई 2019 में, मेघवाल संसदीय मामलों और भारी उद्योग और सार्वजनिक उद्यम राज्य मंत्री बने थे. अब उन्हें कानून मंत्रालय का भी प्रभार दिया गया है.

 

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