पहली बार नहीं, कभी 5000 तो कभी 10000… भारत में पहले भी कई बार हुई नोटबंदी

नई दिल्ली

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने 2000 रुपये के नोट को बैन कर दिया है। सरकार ने एक बार फिर से सबसे बड़ी करेंसी को बंद कर दिया है। हालांकि 2000 रुपये का नोट लीगल टेंडर में बना रहेगा। आप 30 सितंबर तक बैंक में जाकर अपने नोट को बदलवा सकेंगे, जमा करवा सकेंगे। हालांकि ये पहली बार नहीं है जब आरबीआई ने नोट को चलन से बाहर किया है। इससे पहले 2016 आपको याद होगा, जब सरकार ने अचानक से 500 रुपये और 1000 रुपये को बैन करवे का फैसला किया था।

​पहले भी हुई है नोटबंदी​
सरकार ने 2016 से पहले भी नोटबंदी का फैसला किया गया है। सरकार ने साल 2016 में 500 रुपये और 1000 रुपये का नोट चलन से बाहर कर दिया था। 8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नोटबंदी का ऐलान किया था। इसके तहत 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को चलन से बाहर कर 500 रुपये का नया नोट और 2000 रुपये का नोट जारी किया था।

​आजादी से पहले भी नोटबंदी​
देश में सबसे पहली बार आजादी से पहले साल 1946 में नोटबंदी की गई थी। 12 जनवरी 1946 में गर्वनर जनरल सर आर्चीबाल्ड वेवेल ने ब्रिटिश काल में जारी 500, 1000 ऍर 10 हजार के नोट को बंद कर दिया था। 100 रुपये से ऊपर के सभी नोटों की वैधता खत्म कर दी गई थी।

​मोरारजी देसाई सरकार ने लिया था नोटबंदी का फैसला​
16 जनवरी 1978 में तत्कालीन मोरारजी देसाई ने 1000 , 5000 और 10 हजार रुपये के नोटों को बंद करने की घोषणा की गई। कालेधन पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने ये फैसला लिया। अखबारों में विज्ञापन जारी कर नोटबंदी का ऐलान किया गया था। सरकार के फैसले के बाद ये नोट चलन से बाहर हो गए थे।

साल 2016 में मोदी सरकार ने लिया नोटबंदी का फैसला​
इसके बाद साल 2016 में मोदी सरकार ने 500 और 1000 रुपये के नोट को बंद करने का फैसला लिया। पुराने नोट को चलन से बाहर कर दिया गया। इस फैसले के बाद सरकार ने 500 रुपये का नया नोट और 2000 रुपये के नोट जारी किया था। सरकार के इस फैसले की खूब आलोचना भी हुई थी। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया था। बाद में कोर्ट ने नोटबंदी के फैसले को सही ठहराया था।

​अब फिर से नोटबंदी​
साल 2023 में एक बार फिर से आरबीआई ने 2000 रुपये के नोट को सर्कुलेशन से बाहर करने का फैसला किया है। हालांकि इस नोट की वैधता बनी रहेगी। RBI ने नवंबर 2016 में 2000 के नोट जारी किया था। आरबीआई ने कहा कि 2000 के करीब 89% नोट मार्च 2017 से पहले के है। उनकी समय सीमा पूरी हो चुकी है। वहीं इस नोट का बहुत कम इस्तेमाल हो रहा है।

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