नेताओं ने किये वायदे, भेल की कैंटिन में मिलेगा सबकुछ

भोपाल।

बीएचईएल की प्रतिनिधि यूनियनों को चुनाव जीते करीब दस माह का समय बीत गया है। नेताओं ने कर्मचारियों से वायदे किये थे कि बड़ी समस्याएं तो दूर लेकिन स्थानीय समस्याओं से भी निजात दिलाया जाएगा। हो उल्टा रहा है कर्मचारियों को उम्मीद थी कि बीएचईएल के कैंटिन में 22 रूपए की थाली जरूर मिल रही है। नाश्ता भी मस्त था लेकिन कुछ समय से पानी सा फिर गया है। खाने में विभिन्न प्रकार का मिठा नमकीन तो दूर लेकिन चपाती भी ठिक नहीं मिल रही है। खीर, रायता, कढ़ी और मीठा सपना बनकर रह गया है।

यूनियनों ने चुनाव जीतने के पूर्व सपने तो बहुत दिखाए लेकिन कर्मचारियों के हित में कैंटिन से कोई फायदा नहीं दिला पाए। नो प्राफिट नो लॉस के तहत कैंटिन चलाना था। प्रबंधन ने इसके लिए सब्सिडी भी देना शुरू कर दी। फि र भी गुणवत्ता पर सवाल खड़ा हो गया। बड़ी बात यह है कि भले ही बड़ी यूनियन के दबाव में प्रबंधन ने कुछ फैसले अजीब से लिए हो लेकिन सब्सिडी के मामले में भेल के फायनेंस विभाग ने आज तक हरी झंडी नहीं दी।

अभी तो खबर यह है कि कैंटिन को देखने वाला कोई बड़ा समझदार अफसर ही नहीं है। उस पर स्टॉफ कैंटिन शुरू करना तो सपना बन गया है। अब तो लोग कहने लगे है कि फुल थाली तो दूर अब आधी थाली भी नहीं मिल पा रही है। ऐसी प्रतिनिधि यूनियनें कर्मचारियों ने चुनी हैं। र भी गुणवत्ता पर सवाल खड़ा हो गया।

बड़ी बात यह है कि भले ही बड़ी यूनियन के दबाव में प्रबंधन ने कुछ फैसले अजीब से लिए हो लेकिन सब्सिडी के मामले में भेल के फायनेंस विभाग ने आज तक हरी झंडी नहीं दी। अभी तो खबर यह है कि कैंटिन को देखने वाला कोई बड़ा समझदार अफसर ही नहीं है। उस पर स्टॉफ कैंटिन शुरू करना तो सपना बन गया है। अब तो लोग कहने लगे है कि फुल थाली तो दूर अब आधी थाली भी नहीं मिल पा रही है। ऐसी प्रतिनिधि यूनियनें कर्मचारियों ने चुनी हैं।

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