लंबा रास्ता पड़ा है, देखेंगे… सिद्धारमैया के सीएम बनने से नाखुश शिवकुमार के भाई डीके सुरेश क्यों बोले ऐसा?

पिछले दिनों कर्नाटक में सीएम पद को लेकर सिद्दारमैया और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार के बीच खूब रस्साकशी दिखी। हालांकि पांच दिन में कांग्रेस लीडरशिप इस समस्या को सुलझाने में कामयाब हो गई और खुद डीके शिवकुमार भी सुलह के फॉर्म्युले को मानने के लिए राजी हो गए। मगर एक शख्स ने इस पर खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की। यह थे कर्नाटक के बेंगलुरु ग्रामीण सीट से सांसद डीके सुरेश। सुरेश, डीके शिवकुमार के छोटे भाई और तीन बार के लोकसभा सांसद हैं। वह अपने भाई को प्रदेश का बॉस बनते देखना चाहते थे। जब उन्हें डेप्युटी सीएम पद की पेशकश हुई तो सुरेश ने खुलकर कहा कि वह कर्नाटक की जनता के हित में इस फैसले को स्वीकार करते हैं, लेकिन व्यक्तिगत तौर पर इससे खुश नहीं हैं। इसके साथ ही वह यह कहना नहीं भूले कि भविष्य में देखेंगे कि क्या करना है, क्योंकि अभी लंबा रास्ता पड़ा है।

​डीके सुरेश का बदला रूप देख हुए हैरान​
आमतौर पर मृदुभाषी और मितभाषी नेता की छवि रखने वाले डीके सुरेश के इस तेवर ने बहुतों को चौंकाया। कुछ लोगों का यह भी कहना था कि यह शिवकुमार की आवाज है। शिवकुमार ही तरह की भाषा बोलते हैं।

​डीके सुरेश कैसे राजनीति में आए​
सुरेश अपने भाई शिवकुमार की वजह से ही राजनीति में आए। सुरेश के सक्रिय राजनीतिक जीवन की शुरुआत 2013 से हुई, जब जेडीएस नेता व पूर्व सीएम कुमारस्वामी ने लोकसभा से इस्तीफा दिया। इस सीट पर कांग्रेस ने उन्हें मौका दिया। वह कम समय के लिए 15वीं लोकसभा के सांसद बने। उसके बाद से लगातार तीन बार सांसद चुने गए।

भाई डीके शिवकुमार की तरह बिजनसमैन​
बड़े भाई की तरह सुरेश भी पेशे से बिजनेसमैन हैं। अपने भाई का काफी कामकाज वही देखते हैं। यहां तक कि कांग्रेस में संकट की स्थिति में अपने भाई की तरह सुरेश भी रणनीति बनाने में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। चाहे गुजरात में विधायकों में टूट का मामला हो, या फिर जेडीएस गठबंधन सरकार के साथ अपने विधायकों को बनाए रखने की जुगत, हर जगह सुरेश भाई के साथ मुस्तैद नजर आए।

​​कर्नाटक के डीके ब्रदर्स
कर्नाटक की राजनीति में इन दोनों भाइयों की पहचान ‘डीके ब्रदर्स’ के तौर पर होती है। कुछ लोग इन्हें शिवकुमार की परछाईं भी करार देते हैं। हालिया चुनाव में कनकपुरा से मैदान में अपने भाई के उतरने के बावजूद उन्होंने विधायक का पर्चा सिर्फ इसलिए भरा कि अगर भाई का पर्चा खारिज होने की नौबत आती है तो वह उनकी सीट को संभाल सकें।

​किसानों और ग्रामीणों के लिए किया काम​
बतौर सांसद अपने इलाके में डीके सुरेश ने किसानों की समस्याओं और ग्रामीणों के लिए पेयजल की समस्या को लेकर काफी काम किया है। 56 वर्षीय सुरेश का जन्म रामनगर जिले के कनकपुरा स्थित डोड्डालाहल्ली में हुआ। उन्होंने हायर सेकेंडरी तक पढ़ाई की।

 

About bheldn

Check Also

‘नीतीश का NDA में लौटना नुकसानदेह’, दीपांकर भट्टाचार्य ने JDU-BJP दोस्ती को लेकर किया बड़ा खुलासा, सियासी हलचल तय

पटना भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन के नेता दीपांकर भट्टाचार्य ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश …