लोकसभा चुनाव 2024 के लिए बीजेपी-कांग्रेस दोनों के लिए जरूरी हैं ये 200 सीटें

नई दिल्ली

लोकसभा चुनाव-2024 की बिसात अभी से बिछने लगी है। हिमाचल और कर्नाटक में जीत से उत्साहित कांग्रेस फिर से वापसी करती नजर आ रही है। वहीं, जो दल कुछ समय से ग्रैंड ओल्ड पार्टी को तवज्जों नहीं दे रहे थे, वो भी कांग्रेस के करीब जाने की कोशिश में लगे हैं। दूसरी ओर पिछले दो राज्यों में हार से सीख लेते हुए बीजेपी नये सिरे से रणनीति बनाने में जुट गई है। इसके तहत वो एक बार फिर 2014 और 2019 को दोहराने की कोशिश में हैं।

बीजेपी बना रही इन सीटों पर रणनीति
2024 में तीसरी बार केंद्र की सत्ता में वापसी की कोशिश में जुटी बीजेपी उन 199 सीटों को लेकर रणनीति बनाने में लग गई है, जहां उसका सीधा मुकाबला कांग्रेस से हैं। बता दें कि, पिछले दो लोकसभा चुनाव में बीजेपा को यहां भारी सफलता मिली थी, जिसके दम पर वह केंद्र की सत्ता में पूर्ण बहुमत के साथ बैठी है।

कौन सी सीटों पर है ज्यादा जोर
उन सीटों की बात करें तो बीजेपी-कांग्रेस का सीधा मुकाबला उत्तर भारत की 200 सीटों पर है, जहां अभी रीजनल पार्टी पूरी तरह से उभर नहीं पायी है। इसमें एमपी में 29, कर्नाटक-28,राजस्थान-25, छत्तीसगढ़-11, असम में 14, हरियाणा में 10, हिमाचल में 4, गुजरात में 26, उत्तराखंड में 5, गोवा-2, अरुणाचल में 2, मणिपुर में 2, अंडमान निकोबार में 1, चंडीगढ़ में 1, लद्दाख में 1 सीट मिलाकर लोकसभा की 161 सीट होती है, जबकि 38 सीट उन राज्यों की हैं। इन राज्यों में रीजनल पार्टियां मजबूत तो हैं लेकिन, इन सीटों पर बीजेपी-कांग्रेस का सीधा मुकाबला है। इसमें पंजाब की 13 में से 4, यूपी की 80 में से 5, बिहार की 40 में से चार, तेलंगाना की 17 में से 6 और आंध्रा-केरल की 5-5 सीटें शामिल हैं।

पिछले चुनावों में बीजेपी को मिला है फायदा
बता दें कि, 2014 में बीजेपी ने यहां 168 और कांग्रेस ने 25 सीटों पर जीत हासिल की थी जबकि 2019 में बीजेपी 178 और कांग्रेस 16 सीट जीतने में सफल हुई थी। बीजेपी और कांग्रेस इन सीटों को पाने के लिए खुद को मजबूत करने में जुटी हैं, क्योंकि यहां पर जीत सीधे दिल्ली की सत्ता पर ले जाएगी। हालांकि, रीजनल पार्टियां अभी भी कांग्रेस से मोलभाव करने की कोशिश में हैं, लेकिन कांग्रेस, बीजेपी के खिलाफ विपक्ष की अगुवाई तो करना चाहती है पर रीजनल पार्टीयों को बहुत तवज्जों नहीं देने के संकेत दे रही है। साथ ही, उसकी निगाहें क्षेत्रीय दलों की सीटों पर भी है, जिसको लेकर ममता और अखिलेश बार-बार सवाल उठा रहे हैं।

2024 में तस्वीर क्या बनेगी ये कहना जल्दबाजी है, लेकिन चुनाव की तैयारियों में जुटी पार्टियां अभी से अपनी रणनीति को लेकर चिंतन-मनन कर रही हैं, जो सफल होगा वो सत्ता में बैठेगा और जो हारेगा वो फिर से पांच साल विपक्ष की भूमिका में नजर आएगा।

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