BJP की सीटें पहले बंटेंगी या बराबर का होगा हिसाब? MVA में सीट शेयरिंग के सामने आए 4 फॉर्मूले

नई दिल्ली ,

लोकसभा चुनाव में अभी एक साल का वक्त है, लेकिन राजनीतिक गठजोड़ और समीकरण बनाए जाने लगे हैं. महाराष्ट्र में कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना (उद्धव गुट) महाविकास अघाड़ी के तहत मिलकर चुनाव लड़ेंगे, लेकिन सीट शेयरिंग को लेकर पेच फंस गया है. महाविकास अघाड़ी में शामिल तीनों ही दल सीट बंटवारे को लेकर अपने-अपने फॉर्मूले रख रहे हैं, लेकिन अपनी जीती हुई सीटों को छोड़ने के लिए कोई तैयार नहीं है. ऐसे में देखना है कि कैसे सीट शेयरिंग पर बात बनती है.

उद्धव ठाकरे गुट का फॉर्मूला
महाविकास अघाड़ी में 2024 के लोकसभा चुनाव को लेकर सीट बंटवारे पर अगले सप्ताह बैठक होनी है. शिवसेना (उद्धव गुट) महाराष्ट्र की 18 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की दावेदारी कर रही है. संजय राउत ने कहा कि महाराष्ट्र से 18 और दादरा-नगर हवेली सहित 19 लोकसभा सीटें हम फिर से जीतेंगे. इस तरह शिवसेना (उद्धव गुट) उन 19 सीटों पर दावेदारी कर रही है, जिन्हें 2019 लोकसभा चुनाव में जीती थी.

अजित पवार का फॉर्मूला
वहीं, एनसीपी नेता अजित पवार ने कहा कि महाविकास अघाड़ी के सहयोगियों को राज्य की 48 लोकसभा सीटों में से 25 पर शेयरिंग के लिए चर्चा करनी चाहिए. ये वो सीटें है, जिन्हें बीजेपी या फिर अन्य दलों ने 2019 में जीती थी. महाविकास अघाड़ी के तीनों दलों की पिछली बार की जीती हुई 23 सीट पर बात करने की जरूरत ही नहीं है. पिछली बार 18 सीटों पर शिवसेना, 4 सीटों पर एनसीपी और 1 सीट कांग्रेस ने जीती थी. इस तरह कुल 48 में से 23 सीटों पर बात करने की जरूरत नहीं.

कांग्रेस का अपना फॉर्मूला
महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने सीट शेयरिंग का यह फॉर्मूला रखा है. पटोले कहते हैं लोकसभा चुनाव में जिस पार्टी के कैंडिडेट में जीतने की क्षमता ज्यादा होगी, उस सीट पर महाविकास अघाड़ी की उस पार्टी का कैंडिडेट को बीजेपी के खिलाफ लड़ने के लिए उतारा जाना चाहिए. कांग्रेस नेता महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने कहा कि महाविकास अघाड़ी में कोई बड़ा या छोटा भाई नहीं है, इस गठबंधन में सभी सहयोगियों की तिगड़ी है. उन्होंने कहा कि सीट शेयरिंग पर अभी बात नहीं हुई, लेकिन हमारा मानना है कि जो पार्टी जिस क्षेत्र में मजबूत है उसे उस सीट पर चुनाव लड़ना चाहिए.

जानें, 2019 का समीकरण
उत्तर प्रदेश के बाद सबसे ज्यादा 48 लोकसभा सीटें महाराष्ट्र में है. 2019 के आम चुनाव में बीजेपी और शिवसेना मिलकर लड़ी थी जबकि कांग्रेस और एनसीपी साथ थे. राज्य की 48 सीटों में से बीजेपी 25 सीटों पर चुनाव लड़कर 23 सीटें जीती थी तो शिवसेना 23 सीटों पर लड़ी थी और 18 सीटें जीतने में सफल रही थी.

वहीं, कांग्रेस और एनसीपी मिलकर 2019 के लोकसभा चुनाव में उतरे थे. कांग्रेस 25 सीटों पर चुनाव लड़कर महज 1 सीट ही जीत सकी थी जबकि एनसीपी 19 सीटों पर चुनाव लड़ी थी, जिनमें 4 सीटें जीतने में कामयाब रही. एनसीपी ने एक सीट पर निर्दलीय को समर्थन किया था.

2019 में बीजेपी VS कांग्रेस, शिवसेना VS एनसीपी
2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी बनाम कांग्रेस और शिवसेना बनाम एनसीपी के बीच मुकाबला हुआ था. बीजेपी महाराष्ट्र की जिन 25 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ी थी, उनमें से 15 सीटों पर कांग्रेस से मुकाबला हुआ था और 9 सीट पर एनसीपी लड़ी थी. शिवसेना जिन 23 सीटों पर चुनाव लड़ी थी, उनमें से 10 सीटों पर एनसीपी का मुकाबला था और आठ सीट पर कांग्रेस लड़ी थी. इस तरह बीजेपी और अन्य दलों के कब्जे वाली 25 सीटों का बंटवारा हुआ तो कांग्रेस को समझौता करना पड़ सकता है.

कैसे बदल गए समीकरण?
महाराष्ट्र का राजनीतिक समीकरण और गठजोड़ दोनों ही बदल गए हैं. बीजेपी और शिवसेना के रिश्ते टूट चुके हैं. शिवसेना दो गुटों में बंट गई है. एक धड़ा उद्धव ठाकरे के साथ है तो दूसरा गुट एकनाथ शिंदे के साथ. शिवसेना के टिकट पर 2019 में जीते हुए 18 सांसद भी दोनों गुट में बट गए हैं. 12 लोकसभा सदस्य एकनाथ शिंदे के साथ हैं तो 6 सांसद उद्धव ठाकरे के साथ हैं. एकनाथ शिंदे बीजेपी खेमे के साथ खड़े हैं तो उद्धव ठाकरे महाविकास अघाड़ी में हैं.

कैसा होगा सीट शेयरिंग?
महाराष्ट्र में बीजेपी और एकनाथ शिंद के बीच सीट शेयरिंग को लेकर इतना ज्यादा पेच नहीं है, जितना महाविकास अघाड़ी के बीच फंसा हुआ है. शिंदे जिस तरह बीजेपी के सहयोग से महाराष्ट्र में सरकार चला रहे हैं, उस लिहाज से सीट शेयरिंग के लेकर किसी तरह का कोई बड़ा डिमांड नहीं रखेंगे. वहीं, महाविकास अघाड़ी में कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना (उद्धव गुट) शामिल हैं. तीनों ही दलों की ताकत लगभग बराबर है. ऐसे में कोई भी दल किसे कम सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए रजामंद नहीं है.

कांग्रेस-उद्धव-NCP का फॉर्मूला
महाराष्ट्र में कुल 48 लोकसभा सीटें है. महाविकास अघाड़ी की तीनों पार्टियों (कांग्रेस-एनसीपी-उद्धव गुट) के बीच बराबर सीटों पर चुनाव लड़ने का एक फॉर्मूला बनता है. तीनों दल 16-16-16 सीटों पर चुनाव लड़ने का फॉर्मूला है, लेकिन जिस तरह से तीनों दलों के बयान आ रहे हैं, उससे लगता है कि इस सीट शेयरिंग पर सहमति बने. एनसीपी नेता अजित पवार ने कहा कि उद्धव ठाकरे का कहना है कि पिछली बार की जीती हुई सीट पर बात करने की जरूरत ही नहीं है.

पिछली बार 18 सीटों पर शिवसेना, 4 सीटों पर एनसीपी और 1 सीट कांग्रेस ने जीती थी. यानी कुल 48 में से 23 सीटों पर बात करने की जरूरत नहीं. बची हुई 25 सीटों की शेयरिंग का फॉर्मूला तय किया जाए. ऐसे में साफ बात है कि अगर इस फॉर्मूले पर बात बढ़ेगी तो कांग्रेस एनसीपी को बराबरी के आधार पर सीटें नहीं मिल पाएंगी. इस लिहाज से तो ठाकरे गुट को निश्चित रूप से 18 से ज्यादा सीटों पर लड़ने का मौका मिलेगा जबकि एनसीपी और कांग्रेस को 25 सीटों पर सीटों का बंटवारा करना पड़ेगा.

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