अब तिहाड़ में नहीं दिखेगा टिल्लू हत्या जैसा सीन, मंगाई जा रही बिना गोली वाली झन्नाटेदार गन

नई दिल्ली

दिल्ली की तिहाड़ जेल में हाल ही में गैंगस्टर टिल्लू ताजपुरिया की हत्या कर दी गई। इस हत्याकांड के बाद जेल प्रशासन को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। लेकिन अब तिहाड़ प्रशासन ने इसका समाधान खोज लिया है। तिहाड़ जेल में अब ऐसे हथियार खरीदे जा रहे हैं, जिससे कैदी की जान को खतरा नहीं होगा,लेकिन इससे बिजली के झटके निकलते हैं, जिससे कैदी कुछ देर के लिए बेहोश हो जाएगा। इस तरह की बंदूकों का इस्तेमाल विदेशों में पुलिस करती है। अब भारत की सबसे बड़ी जेल में भी शरारती कैदियों से निपटने के लिए इसका इस्तेमाल होने जा रहा है। कंरट वाली बंदूकों के अलावा जेल प्रशासन अपराधियों और गैंगस्टरों को कंट्रोल करने के लिए मिर्ची वाला स्प्रे भी खरीदेंगे।

दुनियाभर की जेलों में कैदियों को कंट्रोल करने के लिए इस तरह के हथियारों का इस्तेमाल होता है। इन हथियारों को टसर और स्टन गन कहा जाता है। इन हथियारों से कैदियों को कोई गंभीर चोट नहीं पहुंचती, लेकिन बिजली के झटकों की वजह से उन्हें रोका जा सकता है।

कितने हथियार खरीदे जाएंगे?
जेल अधिकारियों के मुताबिक, वे पहले चरण में तीन जेल परिसरों के लिए 80 इलेक्ट्रिक शॉक बैटन (टेसर) खरीदेंगे। इसी तरह, वे 160 फुल-बॉडी प्रोटेक्टर, 80 चिली स्प्रे और 160 टी बैटन भी खरीदेंगे। एक अधिकारी ने कहा, ‘हमने 15 दिन पहले संबंधित अथॉरिटी के पास प्रस्ताव भेजा था।’ उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने अब तक 160 पॉलीकार्बोनेट स्टिक, शील्ड और हेलमेट खरीदे हैं। अधिकारी ने कहा, हथियारों की खरीद जल्दी ही हो जाएगी। इसके बाद जेल परिसरों की क्षमता के अनुसार इसे कर्मचारियों और क्यूआरटी सदस्यों को दिया जाएगा।

तिहाड़ में टेसर की थी बेहद जरूरत
हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में 6 मई को इस तरह के हथियारों की जरूरतों को बताया गया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि दिल्ली सरकार को जेल प्रहरियों के लिए कैदियों को कंट्रोल करने के वास्ते टेसर की खरीद को मंजूरी देनी चाहिए। जेल अधिकारियों ने कहा था कि जेलों में कानून और व्यवस्था सुनिश्चित करने में टेसर एक गेम चेंजर होगा और ऐसे अपराधियों को पकड़ने में बेहद मदद करेगा। कई बार छह-सात कैदी दोनों पक्षों से लड़ाई में शामिल होते हैं। बंदूक के बिना, उन्हें कंट्रोल करना आसान नहीं होता है।

क्या है टेसर?
टेसर एक प्रकार का हाथ से चलने वाला हथियार है जो शरीर में बिजली का झटका पैदा करता है। विज्ञान की भाषा में कहें तो जब इसे ट्रिगर किया जाता है, तो नाइट्रोजन चार्ज दो छोटे डार्ट-जैसे इलेक्ट्रोड को एक्टिव कर देते हैं। ये तारों की माध्यम से टेसर से जुड़े होते हैं। इस प्रक्रिया के बाद बिजली के झटके पैदा होते हैं। ये झटके इतने तेज होते हैं कि कैदी के शरीर में ऐंठन महसूस होगी और वो जमीन पर बैठने पर मजबूर हो जाएगा। कई बार इसकी मदद से कैदी को बेहोश भी किया जा सकता है, लेकिन इन झटकों से उसकी जान को कोई खतरा नहीं होता।

कई अदालतें भी ठहराती हैं सही
टेसर का इस्तेमाल आमतौर पर विदेशी जेलों में होता है। कई देशों में अदालतें भी कैदियों को कंट्रोल करने के लिए टेसर के इस्तेमाल को सही ठहराती हैं। दरअसल, जेल में कैदियों के गुटों का आपस में झगड़ा होना बेहद आम है। कई बार ये झगड़े बेहद गंभीर हो जाते हैं। ऐसे में सुरक्षाकर्मियों को हथियार उठाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। लेकिन टेसर के इस्तेमाल से बिना कैदियों को नुकसान पहुंचाए उनसे निपटा जा सकता है। अधिकारियों ने कहा कि टेसर के इस्तेमाल से कर्मचारियों के साथ-साथ अन्य कैदियों की जान बचाने की क्षमता है। अगर विवेकपूर्ण तरीके से इसका इस्तेमाल किया जाए, तो सुरक्षाकर्मी कैदियों के घायल होने या मारे जाने की घटनाओं को कम कर सकते हैं।

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