मणिपुर में 31 मई तक इंटनेट बंद, हिंसा की घटनाओं के बीच सरकार का एहतियाती कदम

इम्फाल

मणिपुर में हिंसा की छिटपुट घटनाएं लगातार हो रही हैं। ऐसे में सरकार ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए इंटरनेट सेवाओं का निलंबन शनिवार को पांच दिन के लिए बढ़ा दिया है। सरकार ने इसका मकसद अफवाहों और वीडियो, फोटो और फर्जी मैसेज को रोकने के लिए उठाया गया कदम बताया है। मणिपुर के गृह आयुक्त एच. ज्ञान प्रकाश ने 31 मई तक इंटरनेट सेवाओं के निलंबन को बढ़ाते हुए एक अधिसूचना जारी की। इसमें कहा गया कि मणिपुर के पुलिस महानिदेशक ने बताया कि अभी भी घरों और परिसरों में आगजनी जैसी घटनाओं की खबरें आ रही हैं।

आदेश में कहा गया है क‍ि इस बात की आशंका है कि कुछ असामाजिक तत्व सोशल मीडिया का बड़े पैमाने पर तस्वीरों, अभद्र भाषा और नफरत भरे वीडियो संदेशों को गतल मकसद के लिए इस्‍तेमाल कर सकते हैं। जो जनता के जुनून को भड़काते हैं। राज्य में कानून और व्यवस्था की स्थिति के लिए गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

कब से बंद है इंटरनेट
दरअसल मेइती समुदाय को अनुसूचित जनजाति श्रेणी में शामिल करने की मांग का विरोध करने के लिए ऑल ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ मणिपुर की ओर से आदिवासी एकजुटता मार्च बुलाया गया था। इस दौरान और उसके बाद 16 में से 11 जिलों में 3 मई को व्यापक हिंसा भड़क उठी थी। मणिपुर सरकार ने स्थिति को कंट्रोल करने के लिए इंटरनेट सेवा बंद कर दी।

इंटरनेट सेवा बहाल करने की मांग
जरूरी वस्तुओं, पेट्रोल-डीजल और जीवन रक्षक दवाओं की कमी के बीच, बैंकिंग और एटीएम सुविधाओं में गड़बड़ी, पर्वतीय राज्य में इंटरनेट पर रोक ने लोगों की तकलीफें और बढ़ा दी हैं। विपक्षी कांग्रेस, मीडिया और कई अन्य संगठन मणिपुर में तत्काल इंटरनेट सेवा बहाल करने की मांग कर रहे हैं।

तड़के कई तलाशी अभियान चलाए
रक्षा सूत्रों ने शनिवार को कहा कि हिंसा में हालिया तेजी के बाद सेना और असम राइफल्स ने संवेदनशील क्षेत्रों के साथ-साथ इंफाल घाटी के आसपास के ऊंचे इलाकों में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू किया है। सेना और असम राइफल्स ने अभियानों को जारी रखते हुए कांगचुक, मोटबंग, साइकुल, पुखाओ और सगोलमंग के क्षेत्रों में शनिवार तड़के कई तलाशी अभियान चलाए हैं ताकि इन क्षेत्रों में सक्रिय किसी भी सशस्त्र विद्रोहियों पर नजर रखी जा सके।

ये ऑपरेशन मणिपुर में शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए सेना और असम राइफल्स के जारी प्रयासों का हिस्सा हैं। सेना के कॉलम नवीनतम तकनीक, हथियार, उपकरण और अन्य संसाधनों का उपयोग कर रहे हैं जो जंगली, दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर सफल हैं। सेना और असम राइफल्स के जवानों ने शुक्रवार रात चुराचांदपुर और इंफाल पूर्वी जिले के एक-एक गांव में भी सफलतापूर्वक लोगों की जान बचाई क्योंकि इन क्षेत्रों में असामाजिक तत्व सक्रिय थे।

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