रॉ एजेंट हैं इमरान खान, भारत के इशारे पर करवाई हिंसा… पाकिस्‍तानी मंत्री के जहरीले बोल

इस्‍लामाबाद

पाकिस्‍तान में इमरान खान के समर्थकों की हिंसा में अब पाकिस्‍तानी मंत्री भारत का नाम घसीटने लगे हैं। पाकिस्‍तान के शिक्षा मंत्री राणा तनवीर हुसैन ने दावा किया कि इमरान खान भारत की खुफिया एजेंसी रॉ के एजेंट हैं। उन्‍होंने कहा कि इमरान खान दुश्‍मनों के अजेंडे को लेकर आगे बढ़ रहे हैं। तनवीर हुसैन ने मांग की कि इमरान खान की पार्टी पीटीआई पर बैन लगाया जाए। नवाज शरीफ की पार्टी के वरिष्‍ठ नेता तनवीर ने कहा कि 9 मई को सैन्‍य ठिकानों पर हमलों के बाद अब पीटीआई एक राजनीतिक दल नहीं रह गई है।

तनवीर ने पीटीआई को एक दुष्‍ट पार्टी करार दिया। इस बीच पाकिस्तान के वित्तमंत्री इशाक डार ने संकेत दिया है कि देश में जारी सियासी गतिरोध को दूर करने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान से बातचीत की जा सकती है बशर्ते ‘वह अपनी गलतियों को ठीक करने के लिए कदम उठाएं’। साथ ही नौ मई को हुई हिंसा के लिए देश से माफी मांगें। उल्लेखनीय है कि इमरान खान की इस्लामाबाद उच्च न्यायालय परिसर से हुई गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थकों ने देशभर में हिंसक प्रदर्शन किया था और सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया था।

पाकिस्‍तानी वित्‍त मंत्री ने दिया बड़ा संकेत
डार ने रविवार को जियो समाचार चैनल के एक कार्यक्रम में रविवार को बातचीत का संकेत ऐसे समय दिया है जब सत्तारूढ़ गठबंधन पहले ही खान की वार्ता की पेशकश को यह कहकर ठुकरा चुका है कि बातचीत नेताओं से होती है न कि आतंकवादियों से। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी ने नौ मई की हिंसा के मामले में प्रशासन द्वारा बडे़ पैमाने पर की जा रही कार्रवाई के बीच सरकार से चुनाव की तारीखों पर वार्ता के लिए सात सदस्यीय समिति गठित की है।

बता दें कि नौ मई की हिंसा के बाद पीटीआई के खिलाफ की जा रही कार्रवाई की वजह से पार्टी अस्तित्व के संकट से गुजर रही है और कई वरिष्ठ नेता रोजाना दल को छोड़ रहे हैं। डार ने कहा, ‘अगर वह (खान) सुधारात्मक कदम उठाते हैं और नौ मई की हिंसा के लिए देश से माफी मांगते हैं तो बातचीत हो सकती है।’ डार ने रेखांकित किया कि नौ मई की दुर्भाग्यपूर्ण घटना से पहले सरकार और पीटीआई के प्रतिनिधि ‘गंभीरता’ से बातचीत कर रहे थे और चुनाव की तारीखों को छोड़ बाकी सभी मुद्दों पर सहमति बन गई थी। मंत्री ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन सभी का अधिकार है, लेकिन सैन्य प्रतिनिष्ठानों पर हमलों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।

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