पुलिस पकड़ में ऐसी अकड़ जैसे बड़ी बाजी मार ली! साहिल, तुम सच में हैवान हो

दिल्ली

गलतियां कौन नहीं करता? हमसे गलतियां होती रहती हैं, लेकिन उसका एक दायरा होता है। आप किसी की हत्या कर दें, यह गलती नहीं कही जा सकती। खासकर जब हत्या के बाद आप को बिल्कुल पछतावा नहीं हो तो साफ है कि आपने जान-बूझकर, पूरी प्लानिंग के साथ हैवानियत की है। साक्षी को दनादन 21 बार चाकू घोंपने के बाद जिस तरह उसके अधमरे शरीर पर बार-बार पत्थर मारा, उससे साहिल की हैवानियत तो झलक ही गई है। पुलिस की पकड़ में आने के बाद उसने जो हाव-भाव दिखाया है, उससे साफ हो गया है कि वो इंसान नहीं राक्षस है। उसे अपने किए पर बिल्कुल भी पछतावा नहीं। उसके चेहरे से हैवानियत साफ झलक रही है। वह ऐसे अकड़कर बैठा है जैसे बहुत बड़ा मैदान मार लिया हो।

एक बार यह मान भी लिया जाए कि साक्षी के व्यवहार से वह आहत हो गया और गुस्से में उसने उसकी हत्या कर दी। लेकिन इस तरह से! चाकू पर चाकू, घोंपता जा रहा है। फिर जब साक्षी का गोदा हुआ शरीर सड़क पर धड़ाम हो जाता है तो उस पर बार-बार पत्थर पटकना। ऐसा कौन सा गुस्सा है जो 21 चाकू मारने के बाद भी शांत नहीं हुआ। इतना ही नहीं, चार-पांच बार पत्थर मारने के बाद वह हैवान वहां से चल देता है। लेकिन अगले ही पल फिर लौटता है और फिर से पत्थर पर पत्थर बरसाता है। सोचिए, यह प्यार में पड़े आशिक की करतूत हो सकती है भला! मान लेते हैं कि साक्षी ने उसकी भावनाएं आहत की होंगी, लेकिन दिल दुखने पर कोई प्रेमिका की ऐसी भयावह हत्या करता है क्या?

चलिए, एक बार यह भी मान लेते हैं कि साहिल हद से ज्यादा गुस्सैल है। उसने गुस्से में 21 बार चाकू गोदे और बार-बार पत्थर मारा। लेकिन बाद में तो उसे अपनी गलती का अहसास होता! अगर उसे लगता कि उसने गुस्से में वो कर दिया जो उसे नहीं करना चाहिए था, तो जरूर उसे पछतावा होता। क्या इस तस्वीर को देखकर कहीं से लगता है कि साहिल को अपनी हैवानियत पर थोड़ा भी पछतावा है? तस्वीर तो उसके दिल की बात साफ बयां कर रही है। उसके शैतानी चेहरे से साफ दिख रहा है कि उसे पछतावा तो दूर, अपने किए पर गर्व है। तभी तो वह अकड़कर बैठा है और कैमरे के सामने ऐसा पोज दे रहा है, जैसे कि किसी को संदेश दे रहा हो- मैंने कर दिखाया, मैंने मैदान मार ली, मैंने वो कर दिखाया जो सबके बूते की बात नहीं।

सच में साहिल, तूने वो कर दिखाया जो सबके बूते की बात नहीं। इस स्तर की हैवानियत को अंजाम देना तो दूर, ज्यादातर लोग तो ऐसा सोच भी नहीं सकते- बेहद भयंकर गुस्से का आगोश में भी। सच पूछो तो हमें तो यह भी यकीन नहीं हो रहा है कि तुम जैसा राक्षस हमारे बीच ही पला-बढ़ा है। तुम सच में सबसे अलग हो, इंसानों से अलग- एक राक्षस। तुम वह हैवान हो जिसका चेहरा शायद ही कोई भूल पाए, लेकिन यह भी सच है कि शायद ही कोई तुम्हारा चेहरा याद रखना चाहे। तुम वो हैवान हो जो अपने माता-पिता, भाई-बहन को जीते जी मार दिए। तुमने अपने हाथ में जो कलाना बांध रखा है ना, वो तुम्हारी हैवानियत का सबसे बड़ा सबूत है। यह बताता है कि तुमने कितनी प्लानिंग के साथ पहले भोली-भाली लड़की के करीब गए, उसे धोखा दिया और झूठे प्यार के जाल में फांसा और फिर तुमने वही किया जो तुझे करना था- हत्या। एक इंसान की नहीं, इंसानियत की। साहिल, तुमने सच में बाजी मार ली- हैवानियत की होड़ में तुम अव्वल निकले।

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