बीएचईएल कारखाने के एक नंबर कैंटीन के भोजन की थाली में निकली इल्ली, कर्मचारियों ने किया हंगामा

भोपाल।

भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स कंपनी (भेल) में मंगलवार को एक नंबर कैंटीन में उस समय हंगामा मच गया जब परोसी गई भोजन की थाली में इल्लियां निकलने लगी। कर्मचारियों ने कैंटीन स्टॉफ को घेर लिया। वरिष्ठ अधिकारियों के पहुंचने के बाद मामला शांत हुआ। जानकारी के मुताबिक एक नंबर कैंटीन में इल्लियों से भरपूर सब्जी परोसी जा रही थी।

मंगलवार को जब लंच में कर्मचारियों ने भोजन की थाली लेकर खाना खाने लगा तो कई थाली में सब्जियों में इल्ली मिली। जिन- जिन कर्मचारियों में मुंह मे निवाला लिया था कई को उल्टियां होने लगी। एआइबीईयू के पदाधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जोरदार विरोध करने लगा। कैंटीन प्रबंधन की घोर लापरवाही से नाराज कर्मचारियों ने खूब नारेबाजी कर विरोध दर्ज किया।

मामला जोर पकड़ता देख अपर महाप्रबंधक, मानव संसाधन एवं औद्योगिक संबंध आरिफ सिद्दीकी तथा विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर सब्जी में इल्ली मिलने पर कैंटीन प्रबंधन को इस घोर लापरवाही पर फटकार लगाई।

यूनियन महासचिव राम नारायण गिरी ने इस प्रकार की घटना की पुनरावृत्ति को रोकने हेतु जिम्मेदार लापरवाह पर कड़ी कार्यवाई कराने पर अड़े रहे। बाद में महाप्रबंधक मानव संसाधन अविनाश चंद्रा ने एआइबीईयू के साथ बैठक कर ठोस कारवाही करने की बात कही साथ ही घटना की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए कैंटीन व्यवस्था में सुधार करने एवं यूनियन प्रतिनिधि के साथ टीम गठित कर प्रतिदिन निरीक्षण की बात कही।

एआइबीईयू द्वारा प्रबंधन को सख्त चेतावनी दी है कि कर्मचारियों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ न किया जाय। तब कहीं जाकर भेल प्रशासन ने स्वच्छ एवं शुद्ध भोजन परोसे जाने की गारंटी दी है।

आखिर कब सुधरेगा कैंटीन का सिस्टम
बीएचईएल कारखाने के कैंटीन में इस तरह की घटनाएं कई बार हो चुकी है। लेकिन प्रबंधन इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रहा है। कोरोना काल के बाद सिर्फ एक कैंटीन नंबर 1 ही चालू है। बाकी कैंटीनों में ताला लगा हुआ है। सबसे बड़ी बात यह है कि बंद कैंटीनों में तीन सुपरवाइजर नौकरी कर रहे है जबकि चालू कैंटीन नंबर 1 सोसाइटी कर्मचारी संभाल रहे हैं। साफ जाहिर है कि इस मामले में गुणवत्ता पर सवाल उठता रहा और प्रबंधन गहरी नींद सोता रहा। तीन नंबर कैंटीन में दो कर्मचारी, दो सुपरवाइजर आराम फरमा रहे है। स्टॉफ कैंटीन बंद पड़ा हुआ है यहां सिर्फ भेल की वाटिका संस्था नाश्ता परोस रही है। कैंटीन नंबर 1 में सिर्फ एक सुपरवाइजर है जिसे कूपन बांटने की ड्यूटी पर लगा रखा है। खास बात यह है कि ऐसे सुपरवाइजरों ने अपनी पूरी जिंदगी कैंटीन में गुजार दी लेकिन गुणवत्ता मेें सुधार लाने में सफलता हासिल नहीं कर पाए यही नहीं कुछ ऐसे भी सुपरवाइजर है जब कैंटीन में इल्ली निकलने की घटना सामने आई तो उन्होंने सिद्ध कर दिया सब्जी में इल्ली नहीं है। फिर भी भेल प्रशासन ने जिस सुपरवाइजर की कभी कोई शिकायत नहीं रही उसे एक यूनियन नेता के कहने पर लूप लाइन में डाल दिया। ऐसे में गुणवत्ता कैसी सुधरेगी यह समझ से बाहर की बात है।

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