‘भगवान मुझसे कुछ बड़ा कराना चाहते हैं’, पहलवानों के आरोपों पर बोले बृजभूषण

लखनऊ,

कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष और बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने एक बार फिर पहलवानों के आरोपों पर पलटवार किया. बृजभूषण सिंह ने कहा कि भगवान मुझसे कुछ बड़ा काम कराना चाहते हैं, इसलिए मुझपर ये आरोप लगा दिए गए. इतना ही नहीं बीजेपी सांसद ने एक बार फिर दोहराया कि मेरे खिलाफ एक भी आरोप सिद्ध हुआ तो मैं फांसी पर लटक जाऊंगा.

बृजभूषण शरण सिंह कहा, जबसे मुझपर आरोप लगे हैं, मैं पूछ रहा हूं कि ये सब कब हुआ, कहां हुआ. हम अयोध्या से आते है जहां प्राण जाते हैं, वचन नहीं जाते. चार महीने हो गए, आरोप लगाए हुए. मैं आज भी कह रहा हूं कि अगर एक भी आरोप सिद्ध हुआ तो फांसी पर लटक जाऊंगा. मैं इस पर आज भी कायम हूं. बीजेपी सांसद ने कहा कि ये पहलवान मेडल बहाने चले गए. गंगा में मेडल डालने से कुछ नहीं होगा. ये सिर्फ इमोशनल ड्रामा है. अगर सबूत हैं तो पुलिस को दो.कोर्ट मुझे फांसी देगा.

कलयुग में कुछ भी हो सकता है- बृजभूषण
बृजभूषण ने कहा, कबीर दास ने कहा था ये कलयुग है कुछ भी हो सकता है, इसलिए मैं लड़ गया. उन्होंने कहा कि अगर राम को वनवास नहीं होता तो इतिहास कैसे बनता? इसका श्रेय कैकई और मंथरा को देना चाहिए. उन्होंने कहा, मैं इन खिलाड़ी से बैर नहीं रखता, ये मेरे बच्चे थे. इनकी कामयाबी में मेरा हाथ है. 10 दिन पहले तक मुझे अपनी कामयाबी का भगवान कहते थे. उन्होंने कहा, मेरे कार्यकाल में जो टीम 18 नंबर पर थी वो टॉप 5 में आई. ओलंपिक के 7 मेडल में 5 कुश्ती में मेरे कार्यकाल में आए. अब मुझे कुछ बड़ा काम करना है, इसलिए 5 तारीख को संतों का बड़ा कार्यक्रम है. पाप करने वाला ही पापी नहीं होता, जो मौन है वो भी भागीदार होता है.

मेरे साथ 85% हरियाणा- बृजभूषण
1975 में जब इंदिरा ने आपातकाल लगाया तब कांग्रेसियों को छोड़कर सब जेल गए, मैं भी गया था पर. 60 साल बाद अब ये समर्थन मुझे मिल रहा है, वो किसी को नहीं मिला. मेरे नाम पर अगर क्षत्रिय खड़े हैं, तो ब्राह्मण, तेली, गडरिया, मुसलमान और जाट भी मेरे साथ है. इतना समर्थन की 85% हरियाणा भी मेरे साथ है. कोई ऐसा प्रांत नहीं, जहां से मुझे समर्थन नहीं मिला, ऊपर वाला कोई काम लेने वाला है जो संत बताएंगे.

गंगा में मेडल बहाने पहुंचे थे बृजभूषण
बृजभूषण सिंह का ये बयान ऐसे वक्त पर आया, जब पहलवानों ने मंगलवार को अपने मेडल को गंगा में बहाने का ऐलान किया था. बजरंग पूनिया, विनेश फोगाट और साक्षी मलिक अपने समर्थकों के साथ शाम को हरिद्वार भी पहुंचे थे. हालांकि, किसान नेता नरेश टिकैत के समझाने के बाद उन्होंने मेडल गंगा में न बहाने का फैसला किया. नरेश टिकैत ने इसके साथ ही सरकार को 5 दिन का अल्टीमेटम भी दिया. टिकैत ने गुरुवार को मुजफ्फरनगर में महापंचायत का भी ऐलान किया.

23 अप्रैल से पहलवानों ने खोला है मोर्चा
विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया समेत तमाम पहलवान 23 अप्रैल से बृजभूषण सिंह के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं. इससे पहले 18 जनवरी को पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया था. पहलवानों ने बृजभूषण के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं. सुप्रीम कोर्ट के दखल पर दिल्ली पुलिस ने सिंह के खिलाफ दो मामले भी दर्ज किए हैं.

28 मई को हुआ था जमकर बवाल
पहलवानों ने रविवार को जंतर मंतर से नए संसद भवन तक मार्च का ऐलान किया था. इतना ही नहीं पहलवानों ने महिला महापंचायत भी बुलाई थी. लेकिन इसी दिन नई संसद का उद्घाटन होना था. ऐसे में दिल्ली पुलिस ने महिलाओं को मार्च की इजाजत नहीं दी थी. साथ ही जंतर मंतर पर ही भारी सुरक्षाबल तैनात कर बैरिकेडिंग लगाई गई थी. रविवार को पहलवानों ने नए संसद भवन से तीन किलोमीटर दूर जंतर-मंतर से मार्च शुरू किया, तो पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की. इस दौरान पहलवानों ने सुरक्षा घेरे को तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की. इसके बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस कर्मियों के बीच धक्का मुक्की और हाथापाई हुई थी.

 

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