5.8 C
London
Wednesday, January 28, 2026
Homeराष्ट्रीयपढ़ो या बच्चा पैदा करो, महिलाओं को विकल्प चुनने के लिए मजबूर...

पढ़ो या बच्चा पैदा करो, महिलाओं को विकल्प चुनने के लिए मजबूर नहीं कर सकते: दिल्ली HC

Published on

नई दिल्ली,

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि महिलाओं को पढ़ने या बच्चा पैदा करने में से किसी एक विकल्प को चुनने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है. भारतीय संविधान अपने नागरिकों के लिए एक समतावादी समाज की परिकल्पना करता है. अदालत ने मेरठ की चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी द्वारा एमएड की छात्रा को मातृत्व अवकाश देने से इनकार करने के आदेश को खारिज करते हुए ये टिप्पणी की है.

जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने माना है कि बच्चा पैदा करने का विकल्प महिला के निजता, गरिमा और शारीरिक अखंडता के अधिकार में निहित है और कार्यस्थल पर मातृत्व अवकाश का लाभ उठाने का महिलाओं का अधिकार संविधान के तहत गरिमा के साथ जीने के अधिकार का अभिन्न पहलू है.

जस्टिस कौरव ने एमएड की छात्रा की याचिका पर यूनिवर्सिटी को निर्देश दिया कि उसे 59 दिनों का मातृत्व अवकाश देने का विचार करे. अदालत ने स्पष्ट किया कि अगर याचिकाकर्ता कक्षा में 80 फीसदी उपस्थिति के मानदंड को पूरा करती है तो उसे बिना किसी देरी के परीक्षा में शामिल देने की अनुमति दी जाएगी.

अदालत ने अपने आदेश में कहा, “महिलाओं को शिक्षा के अपने अधिकार और बच्चा पैदा करने के अधिकार के बीच विकल्प चुनने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है.” वहीं यूनिवर्सिटी के वकील ने मातृत्व अवकाश के लाभ की मांग करने वाली याचिका का विरोध करते हुए कहा कि इसको लेकर कोई नियामक प्रावधान नहीं है. इसलिए याचिकाकर्ता के आवेदन पर विचार नहीं किया जा सकता है.

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि एक पुरुष अपनी उच्च शिक्षा पूरी करते हुए पिता बनने का आनंद ले सकता है. वहीं एक महिला को गर्भावस्था से पहले और बाद की देखभाल से गुजरना पड़ता है, जोकि उसकी पसंद नहीं बल्कि प्रकृति की इच्छा है.

अदालत ने कहा कि पहला रास्ता एक महिला को उच्च शिक्षा के अपने अधिकार और मातृत्व के अधिकार के बीच चयन करने के लिए मजबूर करेगा. कोर्ट ने कहा, संविधान ने समानता की शुरुआत को रोकने वाली सामाजिक धारणाओं से खुद कर लिया था. लोगों ने समान व्यवहार के अपने अधिकार पर जोर दिया था, जिसमें किसी भी तरह के लिंग, धर्म या जाति के बावजूद समान अवसर की धारणा को विकसित करता है. अदालत ने यूनिवर्सिटी को दिए अपने आदेश में कहा कि वह याचिकाकर्ता के आवेदन पर नए सिरे से विचार करे.

क्या है पूरा मामला?
महिला याचिकाकर्ता ने दिसंबर, 2021 में चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी में दो साल के एमएड कोर्स के लिए एडमिशन लिया था. उन्होंने मातृत्व अवकाश के लिए यूनिवर्सिटी डीन और कुलपति के पास आवेदन किया था, जिसे यूनिवर्सिटी ने 28 फरवरी को खारिज कर दिया था. इसके खिलाफ एमएड छात्रा ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी.

Latest articles

कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने ध्वजा रोहण किया

भोपाल ।77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर सुपरस्टार कौशलेन्द्र विक्रम सिंह द्वारा राष्ट्रीय ध्वज...

पर्यटन भवन में 77वां गणतंत्र दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया

भोपाल ।77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर पर्यटन भवन मुख्यालय में मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन...

बीएचईएल हरिद्वार में गणतंत्र दिवस धूमधाम से मनाया

भोपाल ।समूचे राष्ट्र के साथ-साथ बीएचईएल हरिद्वार में भी 77वां गणतंत्र दिवस हर्षोल्लास के...

दादाजी धाम में विद्यार्थियों द्वारा सुंदरकांड एवं हनुमान चालीसा पाठ का नियमित आयोजन

भोपाल ।जागृत एवं दर्शनीय तीर्थ स्थल दादाजी धाम मंदिर, रायसेन रोड, पटेल नगर, भोपाल...

More like this

मुख्यसचिव श्री अनुराग जैन ने 77 वे गणतंत्र दिवस पर मुख्यसचिव आवास पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया और सलामी ली।

मुख्यसचिव श्री अनुराग जैन ने 77 वे गणतंत्र दिवस पर मुख्यसचिव आवास पर राष्ट्रीय...

कर्तव्य पथ पर भव्य गणतंत्र दिवस परेड, राष्ट्रपति ने फहराया तिरंगा

नई दिल्ली। देश आज 77वां गणतंत्र दिवस हर्षोल्लास के साथ मना रहा है। कर्तव्य पथ...

बीईएल को 610 करोड़ के अतिरिक्त ऑर्डर प्राप्त

नई दिल्ली।नवरत्न रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) को ₹610 करोड़ मूल्य...