सस्पेंडेड जज ने लगाया पैसे लेने का आरोप तो भड़के जस्टिस, ओपन कोर्ट में भड़ास निकाल CJ को भेजा मामला, बोले- खुद लें एक्शन

हैदराबाद

तेलंगाना हाईकोर्ट के जस्टिस एम. लक्ष्मण आज कोर्ट में बेहद भावुक और कई बार गुस्से में दिखे। दरअसल वो आंध्र प्रदेश के पूर्व मंत्री विवेकानंद रेड्डी की हत्या के मामले में दायर एक बेल एप्लीकेशन की सुनवाई कर रहे थे। इस याचिका में हत्या के आरोपी सासंद वाईएस अविनाश रेड्डी ने अग्रिम जमानत की मांग की थी। जस्टिस ने सांसद को जमानत तो दे दी। लेकिन उसके बाद उनका गुस्सा दो तेलगू चैनलों पर भड़क गया।

जस्टिस एम. लक्ष्मण ने ओपन कोर्ट में तेलगू चैनलों पर चल रही डिबेट को लेकर गहरा एतराज जताया। उनका कहना था कि टीवी पर एक सस्पेंडेड जज ने उन पर करप्शन का आरोप लगाया। वाईएस अविनाश रेड्डी के मामले में कहा गया कि नोट से भरा बैग जज के घर जा रहा था। एक अन्य शख्स का जिक्र कर उन्होंने कहा कि वो तो यहां तक बोले कि जज (एम लक्ष्मण) मामले की सुनवाई करने लायक ही नहीं हैं।

जस्टिस लक्ष्मण पहले भावुक हुए फिर रजिस्ट्री को दिया आदेश
टीवी चैनलों पर चल रहे प्रोग्राम का जिक्र कर एम. लक्ष्मण पहले भावुक हुए। उनका कहना था कि इस तरह की चीजों से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन उसके बाद वो गुस्से में भी दिखे। उनका कहना था कि इस तरह के बयानों से अदालत की सुनवाई प्रभावित होती है। न्यायपालिका की साख पर भी बट्टा लगता है। उनका कहना था कि ये सारी बातें मानहानि की श्रेणी में आती हैं। जज का गुस्सा किस कदर था कि उन्होंने रजिस्ट्री को आदेश दिया कि टीवी चैनलों की हरकत के खिलाफ कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट का केस वो चीफ जस्टिस के सामने रखें। वो फैसला लेंगे कि क्या एक्शन लिया जाना चाहिए।

पूर्व मंत्री विवेकानंद रेड्डी की हत्या का ये मामला काफी तूल पकड़ चुका है। इस मामले के आरोपी सासंद वाईएस अविनाश रेड्डी और उनके पिता भी हैं। तेलंगाना हाईकोर्ट की साख पर पहली बार बट्टा तब लगा जब विवेकानंद रेड्डी की पुत्री सुनीथा सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं। उनका कहना था कि हाईकोर्ट ने हत्यारोपी सांसद के साथ दोस्ताना बर्ताव किया है। सीबीआई न उनको पूछताछ के लिए बुलाया तो हाईकोर्ट ने उनकी अरेस्ट पर रोक लगते हुए एजेंी को हिदायत दी कि वो सांसद से पूछताछ तो कर ले लेकिन जो भी सवाल उनके पूछे जाने हैं वो पहले से ही उनको बता दिए जाए।

सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ के सामने ये शिकायत पहुंची तो उन्होंने तेलंगाना हाईकोर्ट को तीखी फटकार लगाकर फैसला रोक दिया। हालांकि उन्होंने आरोपी सांसद को राहत तो दी। लेकिन तेलंगाना हाईकोर्ट से कहा कि वो सांसद की जमानत याचिका की सुनवाई कर फैसला सुनाए। उसके बाद से तेलंगाना हाईकोर्ट जमानत की याचिका पर सुनवाई से भी हिचक रहा था। दो बार याचिका को टाला गया को सुप्रीम कोर्ट भी हत्थे से उखड़ गया। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस ने हाईकोर्ट को सख्त हिदायत देकर कहा कि वो तत्काल प्रभाव से तय समय सीमा में सांसद की याचिका पर कोई फैसला दे।

 

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