अमेरिका, ब्रिटेन, रूस… शी जिनपिंग से बात करने के लिए क्‍यों बेताब है पूरी दुनिया?

बीजिंग

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बातचीत के लिए पूरी दुनिया बेचैन नजर आ रही है। कोविड लॉकडाउन के बाद चीन ने जब से अपनी सीमाओं को खोला है, तब से जिनपिंग से मिलने के लिए वैश्विक नेताओं का तांता लगा हुआ है। इस साल मार्च से ही शी जिनपिंग वैश्विक नेताओं और राष्ट्राध्यक्षों की मेजबानी में व्यस्त हैं। इसके अलावा अमेरिका, ब्रिटेन और रूस के कई बड़े अधिकारी लगातार चीन का दौरा कर रहे हैं। अब आज ही ब्रिटेन के विदेश मंत्री जेम्स क्लेवरली चीन पहुंचे हैं। वह पिछले पांच साल में चीन का दौरा करने वाले ब्रिटेन के सबसे बड़े राजनेता हैं। हाल में ही अमेरिका की विदेश सचिव जीना रायमोंडो ने चीन का दौरा समाप्त किया है।

अक्टूबर में चीन जाएंगे पुतिन
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन संभवत अक्टूबर में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बेल्ट एंड रोड फोरम में भाग लेने के लिए चीन जाएंगे। बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन के निवेश और व्यापार दबदबे का एक प्रदर्शन है। इस बीच, शी के अगले सप्ताह के अंत में भारत में समूह 20 शिखर सम्मेलन के लिए यात्रा करने की उम्मीद है। संभावना है कि भारत में शी जिनपिंग की अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के साथ सीधी बातचीत भी हो सकती है। इसके लिए कई महीनों से सावधानीपूर्वक तैयारी की जा रही है। जीन रायमोंडो का चीन दौरा अमेरिका के उसी प्रयास का हिस्सा है, ताकि संबंधों को बेहतर बनाने में मदद मिल सके।

चीन की भी अपनी मजबूरी
चीन की अर्थव्यवस्था मंदी की ओर बढ़ रही है। इससे शी जिनपिंग सतर्क हैं और उन्होंने कूटनीतिक गतिविधियों को तेज कर दिया है। दरअसल, चीनी कंपनियों को कर्ज के खतरनाक बोझ से हमेशा के लिए छुटकारा दिलाने के लिए शी की कोशिश से दुनिया के अन्य हिस्सों में भी आर्थिक संक्रमण फैल सकता है। इसके लिए वह दुनियाभर के देशों के साथ बातचीत को जारी रखे हुए हैं। अमेरिका और यूरोप समेत कई देशों ने चीन पर जबरदस्ती के आर्थिक व्यवहार के लिए व्यापार और दूसरे तरह के प्रतिबंध लगाए हैं, लेकिन वे भी दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के फेल होने का जोखिम नहीं उठा सकते हैं।

अमेरिका को चुनौती देने के लिए ताकत बढ़ा रहे जिनपिंग
बदले में शी को अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने के लिए अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य लोगों के साथ मजबूत संबंधों की आवश्यकता है। लेकिन शी अपने वैकल्पिक गुटों को भी मजबूत बनाए रखना चाहते हैं। इसका मतलब है कि रूस को अपने खेमे में रखना चाहते हैं और ब्रिक्स समूह के विस्तार को आगे बढ़ाने की कोशिश में हैं, जिसमें हाल में ही छह नए देशों की एंट्री हुई है। शी जिनपिंग जानते हैं कि अमेरिका का मुकाबला करने के लिए उन्हें पहले शक्तिशाली बनना होगा। तभी उनकी आवाज को वॉशिंगटन में सुना जाएगा। यही कारण है कि शी जिनपिंग इन दिनों नया वर्ल्ड ऑर्डर तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं।

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