‘मोदी मल्टीप्लेक्स है नई संसद, 2024 में सत्ता बदलने के बाद हो सकेगा बेहतर उपयोग’, बोले जयराम रमेश

नई दिल्ली,

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने नए संसद भवन को लेकर एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि 2024 में सत्ता परिवर्तन होने के बाद नए संसद का बेहतर उपयोग हो सकेगा. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए जयराम रमेश ने कहा कि इतने प्रचार के साथ लॉन्च किया गया नया संसद भवन वास्तव में पीएम के उद्देश्यों को अच्छी तरह से साकार करता है. इसे मोदी मल्टीप्लेक्स या मोदी मैरियट कहा जाना चाहिए.

पीएम पर साधा निशाना
अपनी पोस्ट में जयराम रमेश आगे लिखते हैं, ‘ चार दिनों के बाद, मैंने देखा कि दोनों सदनों के अंदर और लॉबी में होने वाली बातचीत खत्म हो गई है.यदि वास्तुकला लोकतंत्र को मार सकती है, तो संविधान को दोबारा लिखे बिना भी प्रधानमंत्री पहले ही सफल हो चुके हैं. यहां एक-दूसरे को देखने के लिए दूरबीन की जरूरत पड़ रही है क्योंकि हॉल बिल्कुल आरामदायक या कॉम्पैक्ट नहीं हैं. पुराने संसद भवन की न केवल एक विशेष आभा थी बल्कि यह बातचीत की सुविधा भी प्रदान करता था. सदनों, सेंट्रल हॉल और गलियारों के बीच चलना आसान था. यह नई संसद संचालन को सफल बनाने के लिए आवश्यक जुड़ाव को कमजोर करती है.’

जयराम रमेश ने गिनाईं नए संसद की खामियां
नए संसद भवन में खामियां गिनाते हुए जयराम रमेश ने आगे कहा, ‘दोनों सदनों के बीच त्वरित समन्वय अब अत्यधिक बोझिल हो गया है. पुरानी इमारत में, यदि आप खो जाते हैं तो आपको अपना रास्ता फिर से मिल जाएगा क्योंकि यह गोलाकार था. नई इमारत में, यदि आप रास्ता भूल जाते हैं, तो आप भूलभुलैया में खो जाते हैं. पुरानी इमारत आपको जगह और खुलेपन का एहसास देती है जबकि नई इमारत लगभग क्लौस्ट्रफ़ोबिक है.संसद में घूमने का आनंद अब गायब हो गया है. मैं पुरानी बिल्डिंग में जाने के लिए उत्सुक रहता था.’

2024 में सत्ता बदलाव के बाद होगा बेहतर उपयोग
जयराम रमेश ने आगे कहा,’नया कॉम्प्लेक्स दर्दनाक और पीड़ादायक है. मुझे यकीन है कि पार्टी लाइनों से इतर मेरे कई सहकर्मी भी ऐसा ही महसूस कर रहे हैं. मैंने सचिवालय के कर्मचारियों को भी यह कहते हुए सुना है कि नए भवन के डिज़ाइन में विभिन्न कार्यात्मकताओं पर विचार नहीं किया गया जिससे उन्हें अपना काम करने में मदद मिलती. ऐसा तब होता है जब भवन का उपयोग करने वाले लोगों के साथ कोई परामर्श नहीं किया जाता है. शायद 2024 में सत्ता परिवर्तन के बाद नए संसद भवन का बेहतर उपयोग हो सकेगा.’

कैसा है नया संसद भवन?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 दिसंबर 2020 को नए संसद भवन की आधारशिला रखी थी. 28 मई 2023 को इसका उद्घाटन हुआ. नया संसद भवन 29 महीने में बनकर तैयार हो गया.नए संसद भवन को त्रिकोणीय आकार में तैयार किया गया है ताकि ज्यादा से ज्यादा स्पेस को इस्तेमाल में लाया जा सके. ये 64,500 वर्गमीटर में बना हुआ है. इसे बनाने में 862 करोड़ रुपये की लागत आई है.

पुराने संसद भवन में लोकसभा में 545 और राज्यसभा में 245 सांसदों के बैठने की जगह है. जबकि, नए भवन में लोकसभा चैम्बर में 888 सांसद बैठ सकते हैं. संयुक्त संसद सत्र की स्थिति में 1,272 सांसद बैठ सकेंगे. जबकि, राज्यसभा चैम्बर में 384 सांसद आसानी से बैठ सकते हैं. नई संसद में लोकसभा चैंबर को राष्ट्रीय पक्षी मोर और राज्यसभा चैंबर को राष्ट्रीय फूल कमल की थीम पर तैयार कराया गया है.

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