…तो क्या रात में गल गईं बैट्रियां? चांद पर आधा दिन बीता, विक्रम-प्रज्ञान के पास बचे सिर्फ 7 दिन

नई दिल्ली

ये 14 दिन भारतीयों के उधेड़बुन में कट रहे हैं। चांद पर सोए विक्रम लैंडर और रोवर प्रज्ञान की कोई खबर नहीं है। विक्रम का सिग्नल मिलते ही इसरो देशवासियों को खुशखबरी देगा, पर अफसोस 7 दिन बीत चुके हैं। जी हां, चांद पर धरती के 14 दिनों के बराबर एक दिन होता है। इसमें आधा समय बीत चुका है यानी लैंडर और रोवर के उठने के लिए आधा दिन ही बचा है। अगर ये 7 दिनों में नहीं उठे तो वे हमेशा के लिए भारत के दूत बनकर वहीं रह जाएंगे। एक्सपर्ट बताते हैं कि चांद पर रात होने के बाद तापमान -200 डिग्री सेल्सियस हो जाता है। अगर प्रज्ञान नहीं उठा तो साफ है कि बर्फीली रात में दोनों दूतों की बैट्रियों को नुकसान पहुंचा होगा। हो सकता है वे गल गई हों। इसरो के पूर्व चीफ किरण कुमार ने कहा था कि उन्हें इतना एक्स्ट्रीम मौसम झेलने के लिए डिजाइन नहीं किया गया था। चांद पर एक दिन के लिए डिजाइन किए गए चंद्रयान-3 के रोवर और लैंडर अपना काम पूरा करने के बाद सो गए थे। उन्हें रात बीतने के बाद 22 सितंबर को ऐक्टिव होना था लेकिन यह इंतजार अब भी हो रहा है।

इसरो लगातार अपने लैंडर और रोवर से संपर्क करने की कोशिश कर रहा है। चांद पर 6 अक्टूबर को रात होनी है यानी समय हाथ में रेत की तरह फिसल रहा है। चंद्रयान पर इसरो ने आखिरी अपडेट 22 सितंबर को दिया था। वैसे चंद्रयान-3 मिशन पूरी तरह से सफल रहा है। उसे जो काम करना था वो पूरा हो चुका है। ऐसे में अब विक्रम और प्रज्ञान के उठने की उम्मीद बिल्कुल कम है। हालांकि इसरो अंधेरा होने तक वेट करेगा।

​​विफलता स्पेस मिशन में स्वाभाविक​
इसरो के अध्यक्ष एस. सोमनाथ ने हाल में कहा कि विफलताएं स्पेस सेक्टर का एक बहुत स्वाभाविक हिस्सा हैं, लेकिन इसके लिए अंतरिक्ष एजेंसी में किसी व्यक्ति को दंडित नहीं किया जाता है। तभी वैज्ञानिक फैसले लेने में नए दृष्टिकोण अपनाने को लेकर प्रोत्साहित होते हैं। ISRO चीफ ने कहा कि उन्हें भी कई बार असफलताओं का सामना करना पड़ा, लेकिन कभी उनके सीनियर्स ने उनकी आलोचना नहीं की। उन्होंने कहा, ‘हम सुनिश्चित करते हैं कि विफलताओं के लिए किसी एक व्यक्ति को दंडित न किया जाए क्योंकि कोई भी निर्णय किसी एक व्यक्ति द्वारा नहीं लिया जाता है। ये फैसले सामूहिक रूप से लिए जाते हैं।’

इसरो के रडार पर 100 ग्रह!​
चंद्रयान-3 मिशन की सफलता के बाद इसरो शुक्र मिशन की तैयारी में हैं। जी हां, चीफ सोमनाथ ने कहा है कि स्पेस एजेंसी शुक्र ग्रह (वीनस) के अध्ययन के लिए एक मिशन भेजने की योजना बना रही है। इसके तहत अंतरिक्ष के जलवायु और पृथ्वी पर उसके प्रभाव का अध्ययन करने के लिए दो उपग्रह भेजने का प्लान है। एक्सपोसैट या एक्स-रे पोलरीमीटर सैटेलाइट इस साल दिसंबर में लॉन्च होने के लिए तैयार है जो समाप्त होने की प्रक्रिया से गुजर रहे तारों का अध्ययन करने के लिए है। उन्होंने कहा कि सौरमंडल के बाहर 5,000 से अधिक ग्रह हैं। इनमें से कम से कम 100 पर पर्यावरण होने की बात मानी जाती है।

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