नए भारत को फिलिस्तीन के लिए जिहाद मंजूर नहीं, मोदी की बदली नीति समझिये

नई दिल्ली,

आतंकवाद से पीड़ित एक देश के साथ मजबूती से खड़ा होकर देश ने यह संदेश दिया है कि यह नया भारत है जो दुनिया में किसी के दबाव में नहीं आता है.मौका पड़ने पर तटस्थ हो जाएगा जैसा रूस-यूक्रेन युद्ध में किया और अगर जरूरत हुई तो लाख खतरों के बावजूद किसी पीड़ित देश के साथ मजबूती से खड़ा भी रहेगा. आज का भारत जानबूझकर या मजबूरी में किसी गुट के साथ रहने वाला देश नहीं है. शायद यही कारण है कि फिलिस्तीनी आतंकी संगठन हमास से जारी जंग के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फ़ोन पर बात करने का समय निकाला. हमास के शुरूआती हमलों के समय ही पीएम मोदी ने कहा था कि इजरायल पर हुए आतंकी हमलों से वो स्तब्ध हैं. हमारी संवेदनाएं मृतकों के परिवार के साथ हैं. प्रधानमंत्री ने जिस तरह से अपना स्टैंड क्लीयर किया है इससे दुनिया भर में देश की धाक बढ़ी है.

1- वोटबैंक के लिए आतंकवाद नजरअंदाज नहीं होगा
पीएम मोदी ने इजरायल का खुलकर साथ देने का जो फैसला किया है उसका सबसे बड़ा संदेश है कि आतंकवाद पर दुनिया को अपना रवैया क्लीयर करना होगा. दुनिया की महाशक्तियों को भी आतंकवाद पर दोहरी नीति से बाहर आना होगा. अब जब देश हमास का विरोध कर रहा है तो निश्चित तौर पर देश में भी कुछ आतंकवादी संगठन सक्रिय हो सकते हैं. जिस तरह आईएस के समय हुआ था. भारत का यह संदेश अपने देश के लिए भी है कि भारत आतंकवाद को लेकर किसी भी तरह का ढुलमुल रवैया नहीं अपनाएगा. हमारी सेना और हमारी सुरक्षा व्यवस्था इतनी सक्षम है कि चाहे क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म हो या देश के अंदर से पैदा होने वाले खतरे, हम सबको कुचलने में सक्षम हैं. हम किसी भी कीमत पर वोट बैंक के लिए आतंकवाद को नजरअंदाज नहीं करेंगे. आतंकवाद नेस्तनाबूद करने के लिए जरूर होगा तो अलोकप्रिय फैसले भी लेंगे.देश कई दशकों पुराने उस भूल को सुधार भी रहा है जब कि इस्लामिक भाईचारे के समर्थन के चलते फिलिस्तीन संघर्ष समिति को भारत ने मान्यता दिया था और इजरायल से दूरी बना रखी थी.

2- पीड़ित इजरायल का साथ देने पर ‘गुटबंदी’ का ओराप लगता है तो लगे
यह देश और दुनिया के लिए संदेश है कि भारत आज अपने फैसले खुद लेता है. हमने यूक्रेन में किसी का साथ न देकर यह दिखाया था. अब इजरायल के साथ खड़े होकर भी दिखा दिया कि मौका पड़ने पर हम किसी के साथ मजबूती से खड़े भी हो सकते हैं.हम ईस्ट या वेस्ट में नहीं पड़ते, जरूरत होने पर किसी के साथ भी हो सकते हैं. भारत को आज किसी महाशक्ति के नाराजगी का खतरा नहीं है.देश एकजुट है और देशहित में हर तरह के फैसले लेने में सक्षम है. हमें न रूस की चिंता है और न ही अमेरिका की. हम नैतिक रूप से जरूरी होने पर किसी के साथ खड़े हो सकते हैं. हो सकता है कि इजरायल का साथ देने पर भारत पर वेस्ट के साथ गुटबंदी का आरोप लगे. पर भारत ने यूक्रेन मुद्दे पर बार-बार वेस्ट के खिलाफ यूएन में वोटिंग से दूर रहकर यह साबित किया है कि भारत किसी भी तरह की गुटबंदी में शामिल नहीं है. भारत की इस साफगोई ने इजरायल को कायल कर दिया है. भारत में इजरायल के दूतावास के इस ट्वीट से उनकी भावना समझी जा सकती है-

3- हमास के बहाने पाकिस्तान को दो टूक संदेश
लैंड से लेकर एयर तक की कैपेबिलिटी एक आतंकी संगठन के पास कैसे आ गई.इसलिए यह दुनिया के लिए भी चिंता का विषय है. किसी भी देश में अगर कोई आतंकवादी संगठन इस तरह की तैयारी कर लेता है तो इसके लिए उस देश को जिम्मेदार ठहराना होगा. भारत ने इजरायल के साथ खड़ा होकर पाकिस्तान को संदेश दे दिया है कि आतंकवाद को लेकर देश जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रहा है. पाकिस्तान अगर अपने देश में आतंकी संगठनों पर रोक लगाने में खुद को सक्षम नहीं बनाता है तो भारत इजरायल जैसे एक्शन ले सकता है. शायद पीएम मोदी ने इसलिए ही यह कहा कि भारत इसकी निंदा ही नहीं करता है, बल्कि स्पष्ट तरीके से इजरायल के साथ खड़ा है.दरअसल दुनिया समझ ले कि किसी भी तरह से इस तरह के अटैक को वैधता दी गई तो इसके बड़े दुष्परिणाम सभी देशों को सहने होंगे.

4- इजरायल के साथ दोस्‍ती अरब देशों के तेल-व्‍यापार के दबाव से मुक्त
भारत अब आत्मनिर्भर हो चुका है. उसे इस बात का डर नहीं है कि अरब देश उसे तेल देने से मना कर सकते हैं. या इजरायल मुद्दे के चलते इस्लामिक देशों के संगठन उसके खिलाफ कोई बैन आदि न लगा दे. जैसा अब तक हुआ कि देश इस्लामिक देशों और अरब देशों के दबाव में इजरायल से निश्चित दूरी बनाकर चलता रहा है. पर अब देश पर कोई दबाव नहीं है. जैसा कि सभी जानते हैं कि मिडिल ईस्ट पूरा एरिया एक बार फिर अस्थिरता की गिरफ्त में आ सकता है. अस्थिरता का सीधा प्रभाव ऑयल और गैस पर होता है, उसके प्राइसेस पर होता है. पर भारत इस तरह के हर दबाव से मुक्त है.

5- AMU छात्रों पर कार्रवाई यानी जिहाद के सेलिब्रेशन पर जीरो टॉलरेंस
यह देश के तमाम लोगों को भी संदेश है कि देश की विचारधारा से अलग किसी भी तरह की ऐसी गतिविधियां जो किसी आतंकी देश या संगठन के फेवर में जाती हैं तो यह किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगी. एएमयू में जिस तरह हमास के समर्थन में जुलूस निकाला गया वो सीधे तौर पर देश के हित में नहीं था. 4 छात्र नेताओं के नाम नामजद रिपोर्ट दर्ज कर यूपी पुलिस ने दिखा दिया है कि इस तरह की कोई भी हरकत मंजूर नहीं होगी. भारत सरकार इजरायल के साथ है तो इसका मतलब है कि हमास के समर्थन में नारे , फंड इकट्ठा करना या जुलूस निकालने पर तुरंत एक्शन होगा. देश में आईएस, अल कायदा आदि के लिए काम करने वालों के साथ पहले भी सरकार ने सख्ती से काम लिया है. फिलिस्तीन या हमास के नाम लेने वाले भी बख्शे नहीं जाएंगे.

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