पुलिस ने डॉग ‘सुल्तान’ का शव कब्र से निकलवाया और करवाया पोस्टमार्टम, रिपोर्ट का इंतजार

शाजापुर/भोपाल ,

भोपाल के ट्रेनिंग सेंटर मारे गए डॉग ‘सुल्तान’ के शव को कब्र से निकालकर पुलिस ने पोस्टमार्टम करवाया. अब रिपोर्ट आने पर पता चल पाएगा कि कुत्ते की मौत फांसी से हुई थी या फिर प्राकृतिक रूप से हुई थी. इस मामले मे पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी. आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद छोड़ दिया गया था.

दरअसल, शाजापुर जिले के कालापीपल निवासी बिजनेसमैन निखिल जायसवाल ने अपने पाकिस्तानी बुली डॉग ‘सुल्तान’ को भोपाल के एक डॉग ट्रेनिंग सेंटर मे भेजा था. लेकिन ट्रेनिंग देने वाले ने कुत्ते को फांसी लगाकर मार दिया था. तब मालिक ने कुत्ते के शव को अपने भोपाल स्थित घर लाकर दफनाया दिया था. फिर मिसरोद थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी.

एफआईआर के बाद भोपाल पुलिस ने तीन आरोपियों को आईपीसी की तमाम धाराओं में गिरफ्तार किया, लेकिन जमानती मामला होने के चलते उनको छोड़ दिया गया. अब डॉग का शव निकालकर पुलिस ने पोस्टमार्टम कराया ताकि पता चल सके कि कुत्ते की मौत किस वजह से हुई?

जिले का पहला मामला होगा जब कुत्ते के शव को निकल कर पोस्टमार्टम हुआ हो. शुजालपुर SDM ने कहा कि कुत्ते के पोस्टमार्टम के लिए पशु चिकित्सा विभाग के डॉक्टरों का एक जांच दल बनाया गया. सुल्तान की मौत से दुखी बिजनेसमैन निखिल जायसवाल ने बताया कि डॉग को फांसी लगाकर मारने का वीडियो सामने आ गया है. अब इस मामले के दोषियों को सजा दिलवाऊंगा.

क्या है पूरा मामला
बता दें कि भोपाल में पाकिस्तानी बुली ब्रीड के डॉग की हत्या के मामले ने दिल दहला दिया है. डॉग ट्रेनिंग सेंटर में कुत्ते को मारने की घटना CCTV कैमरे में कैद हो गई. बताया गया कि बिजनेसमैन अपने पालतू कुत्ते पर दो साल के भीतर करीब 15 लाख रुपए खर्च कर चुका था. ‘सुल्तान’ की रोज की खुराक में 3 से 4 हजार रुपए खर्च होते थे.

डॉग के ठाठ इस तरह के थे कि उसे 1200 रुपए किलो वाली फूड ग्रेवी लिक्विड फॉर्म में परोसी जाती थी. यह चिकन से बनी हुई ग्रेवी होती है. इसके अलावा, डॉग सुल्तान के बदन पर 560 रुपए का महंगा स्प्रे, इंफेक्शन से बचने के लिए 850 रुपए कीमत का परफ्यूम और नहलाने के लिए 250 मिली का 300 रुपए वाला शैंपू इस्तेमाल किया जाता था.

यही नहीं, सुल्तान नाम का यह डॉग रोज ताजा मटन खाता था. सुल्तान में इतनी ताकत थी कि वह खड़ी हुई भारी भरकम बोलेरो कार तक को खींच देता था. पाकिस्तान बुली नस्ल के कुत्तों की खासियत है कि यह पहाड़ी इलाकों में रहते हैं और शरीर से लंबे-चौड़े रहते हैं. पशु प्रेमी लोग इन्हें घर में नहीं, बल्कि अपने फार्म हाउस या खेत में पालते हैं.

अक्सर पाकिस्तान बुली डॉग्स को घर से बाहर पालने के लिए रखा जाता है, क्योंकि यह सामान्य कुत्तों से ज्यादा आक्रोशित होते हैं. शाजापुर के पशु चिकित्सा अधिकारी प्रशांत महाडिक के अनुसार, पाकिस्तान बुली को शिकारी कुत्ता भी कहा जाता है. इनकी अनुमानित उम्र 14 से 15 साल होती है.

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