सुरंग के अंदर का मंजर देख काम छोड़कर भागे बाहर, रेस्क्यू में जुटे दूसरे मजदूरों में दहशत

देहरादून

सिल्क्यारा टनल के भीतर फंसे 41 मजदूरों को बचाने की मशक्कत कर रहे मजदूर भीतर का नजारा देख कर खुद ही दहशत में आ गए और काम छोड़कर टनल से बाहर निकल गए। काम कर रहे मजदूरों ने कंपनी अधिकारियों से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने को कहा है।

एनएचआईडीसीएल टनल के भीतर मजदूरों के लिए एस्केप टनल बना रहा है। जिसका काम अंतिम चरण में है। बता दें कि सुरंग के भीतर की मिट्टी कई जगह पर काफी भुरभुरी है और कई जगहों पर हल्का पानी भी भरा हुआ है। जिसकी वजह से भूस्खलन का खतरा भी बना हुआ है।

उत्तरकाशी में पिछले हफ्ते आए भूकंप के झटके के बाद टनल के अंदर भी चट्टान चटकने की आवाज आई थी, जिससे काम कर रहे मजदूरों में डर का माहौल था। वहीं, सोमवार को टनल के भीतर का मंजर देखकर यहां काम कर रहे मजदूर डर गए। उन्हें खुद के यहां फंसने का डर सताने लगा। जिस पर वे काम छोड़कर बाहर आ गए। उन्होंने बचाव अभियान के दौरान सुरक्षा इंतजाम और पुख्ता करने की मांग की।

एनएचआईडीसीएल के निदेशक अंशू मनीष खलखो ने बताया कि सुरंग के भीतर काम करने वाले सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और मजदूरों की सुरक्षा के लिए एस्केप टनल बनाई जा रही है। इसके लिए ब्लॉक भी आ चुके हैं। काम अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि सभी की सुरक्षा उनके लिए सर्वोपरि है। सुरंग के भीतर बचाव अभियान के दौरान भारी धूल है, जो बाहर गेट तक दिखाई दे रही है। भीतर से आने वाले कई अधिकारी और कर्मचारी भी अंदर बेहद धूल होने की बात कह रहे हैं।

उनका कहना है कि भीतर लगे सभी कर्मचारियों और मजदूरों को मास्क दिए गए हैं। मजदूरों की स्थिति देखने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया गया था, लेकिन भीतर अत्यधिक धूल होने के कारण तस्वीरें साफ नहीं आ पाई। एनएचआईडीसीएल ने दिल्ली से एंडोस्कोपिक कैमरे मंगाए हैं। मंगलवार को इन कैमरों को पाइप के माध्यम से भीतर पहुंचाया जाएगा। निदेशक खलखो ने बताया कि कैमरे से जहां मजदूर उन्हें देख सकेंगे तो वे भी मजदूरों के हालात और करीब से देख व समझ सकेंगे।

बचाव कार्य के तहत मंगलवार को होंगे ये काम

  • आरवीएनएल कंपनी की ड्रिल मशीन भी सुरंग के ऊपर भेजी जाएगी
  • एसजेवीएन कंपनी की ड्रिल मशीन सुरंग के ऊपर पहुंच जाएगी, जिसे इंस्टॉल करने में करीब 24 घंटे लगेंगे
  • सुरंग के भीतर ऑगर मशीन चलाने का काम दोबारा तेज किया जाएगा
  • रोबोट को चलाने का प्रयास किया जाएगा, ताकि मजदूरों तक पहुंच और आसान हो
  • सुरंग के दूसरे सिरे बड़कोट की ओर से भी काम तेज किया जाएगा।

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