क्या चुनावों से पहले गरीबों को जमकर अनाज बांटेगी सरकार? गोदामों में आया दोगुना चावल, जारी है खरीद

नई दिल्ली

सरकार को एक बार फिर चावल के काफी अधिक भंडार की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। चालू खरीफ मार्केटिंग सेशन के दौरान भारी धान खरीद और खुले बाजार में एफसीआई स्टॉक से काफी कम बिक्री के चलते ऐसा हो सकता है। अनुमानों के अनुसार एजेंसी को चालू खरीद सीजन के आखिर तक बफर रिक्वायरमेंट के दोगुने से ज्यादा धान मिल सकता है। अधिकारियों ने कहा कि बढ़ते स्टॉक को संभालने के लिए सरकार को अनाज ऑफलोड करने के लिए कदम उठाने होंगे। उन्होंने कहा कि अगले साल के चुनाव में सरकार को गरीबों के लिए अधिक खाद्यान्न आवंटित करने का मौका मिल सकता है।

क्यों रहेगी अधिक भंडार की समस्या?
टीओआई के अनुसार जून में केंद्र द्वारा राज्यों को एफसीआई से अपने स्वयं के कार्यक्रमों के लिए चावल खरीदने की अनुमति देने की नीति को समाप्त करने के फैसले ने अतिरिक्त चावल की बिक्री को प्रभावित किया है। इसके अलावा, अनाज-आधारित इथेनॉल संयंत्रों को चावल की बिक्री रोक देने से भी ऑफलोडिंग कम हुई है। जुलाई में चावल की ई-नीलामी शुरू हुई थी। एफसीआई ने खुले बाजार में मुश्किल से एक लाख टन चावल बेचा है। इससे अगले मार्च तक थोक खरीदारों को 25 लाख टन चावल बेचने के लक्ष्य को पाना बहुत मुश्किल हो गया है।

500 लाख टन खरीद की उम्मीद
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, चालू खरीद सीजन में एफसीआई और राज्य सरकार की एजेंसियों ने अब तक लगभग 170 लाख टन चावल की खरीद की है जो पिछले महीने शुरू हुई थी। अधिकारियों ने कहा कि उन्हें 500 लाख टन से अधिक की खरीद का भरोसा है, क्योंकि कुछ राज्यों जैसे ओडिशा और झारखंड में खरीद अभी शुरू नहीं हुई है। वर्तमान में, एफसीआई के पास 194 लाख टन चावल है, जो 1 जनवरी के लिए 76 लाख टन की बफर आवश्यकता से अधिक है। इस स्टॉक में वह 230 टन चावल शामिल नहीं है जो मिलों से प्राप्त होना बाकी है। इसके अलावा, अगले रबी विपणन सत्र में सरकार को चावल की खरीद लगभग 50-60 लाख टन होने की उम्मीद है।

जरूरत से दोगुना स्टॉक
अधिकारियों ने कहा कि एफसीआई के पास 1 अक्टूबर को भी चावल का शुरुआती स्टॉक 221 लाख टन था और यह आवश्यक बफर स्टॉक से दोगुना से अधिक था। उन्होंने कहा कि चालू सीजन में खरीद की अच्छी गति स्टॉक को और आगे बढ़ाएगी। सरकारी अनुमानों के अनुसार, केंद्र को मुफ्त राशन योजना, प्रधान मंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को पूरा करने के लिए सालाना लगभग 400 लाख टन चावल की आवश्यकता होती है, जिसके तहत लगभग 81 करोड़ लोगों को हर महीने पांच किलो अनाज मिलता है।

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