रिजर्वेशन पर पीएम मोदी ने चला दांव जिसका 2024 में दिखेगा सीधा असर!

नई दिल्ली:

भारतीय जनता पार्टी (BJP) दक्षिण के राज्‍यों में अपनी पकड़ को ढीला नहीं करना चाहती। अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले वह इसके लिए कोशिशों में जुटी हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल में मडिगाओं के लिए आरक्षण का वादा किया था। इसके कुछ दिन बाद शुक्रवार को उन्‍होंने कैबिनेट सचिव राजीव गौबा और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से समुदाय के लिए अहम आदेश दिया। उन्‍होंने तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से संबंधित समुदाय के लिए अनुसूचित जाति आरक्षण में सब-कैटेगराइजेशन की खातिर समिति के गठन में तेजी लाने को कहा है। 18 नवंबर को गृहमंत्री अमित शाह ने सिकंदराबाद में 1000 से ज्‍यादा मडिगा प्रतिनिधियों के साथ बैठक की थी। सूत्रों ने कहा कि गृहमंत्री ने उप-वर्गीकरण प्रक्रिया शुरू करने की पीएम की प्रतिबद्धता दोहराई। बाद में एमआरपीएस संस्थापक मंदा कृष्णा मडिगा ने अलग-अलग मडिगा संगठनों से 30 नवंबर के तेलंगाना विधानसभा चुनावों में बीजेपी की जीत के लिए काम करने का आह्वान किया था।

क्‍या है मड‍िगा समुदाय का कहना?
मडिगा संगठनों को संबोधित एक पत्र में कृष्णा मडिगा ने कहा कि कांग्रेस ने एससी आरक्षण के उप-वर्गीकरण की मांग पर उनके साथ अन्याय किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब कांग्रेस केंद्र में सत्ता में थी तो वह एससी वर्गीकरण के लिए कानून पारित करने में विफल रही। पिछले 10 साल के दौरान उसने इस मांग को अपना समर्थन नहीं दिया। उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस शासन में हमारे साथ बहुत अन्याय हुआ है। इसने पिछले दस वर्षों में एससी वर्गीकरण के बारे में संसद में एक भी शब्द नहीं बोला है।’

मडिगा समुदाय का गण‍ित समझ‍िए
मडिगा समुदाय तेलंगाना में कुल अनुसूचित जाति का कम से कम 50 फीसदी है। 2011 की जनगणना के अनुसार, राज्य की कुल आबादी में अनुसूचित जाति की आबादी 15 फीसदी से कुछ अधिक है। वर्षों से मडिगा समुदाय ने कहा है कि एससी श्रेणी के तहत आरक्षण का लाभ माला समुदाय ने छीन लिया है। जबकि मडिगा को छोड़ दिया गया है।

1994 से समुदाय उप-वर्गीकरण के लिए संघर्ष कर रहा है। पहले मडिगा डांडोरा आंदोलन के जरिये और बाद में एमआरपीएस के साथ। इन मांगों की समीक्षा के लिए कई आयोगों का गठन किया गया है। इनमें 1996 में न्यायमूर्ति पी.रामचंद्र राजू और बाद में 2007 में न्यायमूर्ति उषा मेहरा के अधीन आयोग शामिल हैं। दोनों ने कहा कि उप-वर्गीकरण के लिए तरीके और साधन ढूंढे जा सकते हैं।

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