MP: चुनाव हार गए नरोत्तम मिश्रा… 8800 वोट से मिली शिकस्त, लगातार 3 बार से थे दतिया के विधायक

दतिया,

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने अप्रत्याशित जीत हासिल की है. मगर, एमपी के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा चुनाव हार गए हैं. वरिष्ठ नेता कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र भारती ने मिश्रा को 8800 वोटों से हराया है. शुरूआत में कुछ एक राउंड में नरोत्तम मिश्रा ने मामूली बढ़त हासिल की थी. मगर, वह इस बढ़त को कायम नहीं रख पाए. 13 राउंड की काउंटिंग के बाद मिश्रा को हार का मुंह देखना पड़ा है. वह लगातार तीन बार से दतिया के सिटिंग विधायक थे. उन्हें बीजेपी का कद्दावर नेता कहा जाता है.

सीएम शिवराज के करीबी नरोत्तम मिश्रा की हार चौंकाने वाली है. राजेंद्र भारती और नरोत्तम मिश्रा के बीच राजनीतिक दुश्मनी किसी से छुपी नहीं है. कांग्रेस ने दतिया से पहले अवधेश नायक को टिकट दिया था. मगर, पार्टी कार्यकर्ताओं ने अवधेश को टिकट दिए जाने का जमकर विरोध किया था. नतीजा यह हुआ कि अवधेश का टिकट काटा गया और पार्टी ने राजेंद्र भारती को अपना प्रत्याशी बनाया था. जिसका फायदा भी कांग्रेस को हुआ कि दतिया की राजनीति में कांग्रेस की वापसी हुई है.

जानकारी के लिए बता दें कि, साल 2018 के विधानसभा दतिया विधानसभा सीट पर बीजेपी के नरोत्तम मिश्रा ने जीत हासिल की थी. उन्होंने कांग्रेस के राजेंद्र भारती को हराया था. मिश्रा को 72209 वोट मिले थे. जबकि कांग्रेस प्रत्याशी को 69553 वोटों से संतुष्ट होना पड़ा था.

कांग्रेस की हुई करारी हार
विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग हो जाने के बाद कांग्रेस पार्टी की जीत को लेकर आश्वस्त थी. कमलनाथ, दिग्विजय सहित कांंग्रेस अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं का कहना था कि प्रदेश की सत्ता पर कांग्रेस ही काबिज होने जा रही है. मगर, रविवार को आए चुनावी रिजल्ट ने कांग्रेस की आंख और कान खोल कर रखे दिए. पार्टी को केवल 60 से ज्यादा सीटें मिली हैं. साल 2018 के चुनाव में कांग्रेस को 114 सीटें मिली थीं. साल 2020 में 22 विधायकों के कारण कांग्रेस सरकार गिर गई थी. बीजेपी में बगावत करने वाले विधायकों के शामिल होने के कारण शिवराज सिंह ने फिर से प्रदेश के सीएम पद की शपथ ग्रहण की थी.

बीजेपी को प्रचंड बहुमत
वही, बीजेपी ने मध्य प्रदेश की राजनीति में अपनी जगह बनाए रखी है. 160 से ज्यादा सीटों पर बीजेपी को बढ़त है. केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को चुनावी मैदान में उतारा गया था. बीजेपी का यह दांव फायदे का सौदा रहा. उन्हें ज्यादातर सीटों पर जीत हासिल हुई है. अब प्रदेश के सीएम को लेकर पार्टी फैसला करेगी. क्योंकि, इस बाद सीएम फेस के रूप में शिवराज सिंह च्वाइस नहीं बताए जा रहे हैं.

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