केजरीवाल सरकार ने बनाया 2047 का लक्ष्य… दिल्ली के बजट में इस बार क्या खास, पूरी बात समझिए

नई दिल्ली

आने वाले हफ्ते में यानी 15 फरवरी से दिल्ली के बजट सत्र की शुरूआत होगी जो 20 फरवरी तक चलेगा। इस बार देश की राजधानी का बजट कई मायनों में खास होने वाला है। दिल्ली सरकार ने भारत की आजादी के 100 साल पूरे होने को लेकर स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, परिवहन और पर्यावरण से जुड़े सालाना लक्ष्य तय कर लिए हैं। इसका असर आगामी राज्य बजट में देखने को मिलेगा। सरकार की योजना है कि दिल्ली को एक धरोहर और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव आयोजित करना, प्राकृतिक बाजारों का पुनर्विकास करना और विरासत स्थलों का सौंदर्यीकरण करना शामिल है। परिवहन क्षेत्र में, सरकार ने 2024 में 31 बस डिपो, 2025 में 27 और 2026 तक सभी डिपो का विद्युतीकरण करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।

17 फरवरी को पेश हो सकता है बजट
एक सरकारी अधिकारी के मुताबिक, इस साल के बजट में दिल्ली 2047 का विजन स्पष्ट रूप से दिखाई देगा और यह बताएगा कि शहर किस दिशा में आगे बढ़ना चाहता है। बजट सत्र 15 से 20 फरवरी तक चलेगा। उम्मीद है कि 17 फरवरी को अरविंद केजरीवाल सरकार दिल्ली के लिए 2024-25 का बजट पेश करेगी। रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम के लिए योजना है कि दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर 2025 तक पूरा हो जाएगा और दिल्ली-गुड़गांव-अलवर और दिल्ली-सोनीपत-पानीपत लाइनें 2032 तक और बाकी चिन्हित कॉरिडोर 2047 तक बनकर तैयार हो जाएंगे।

सामने है 2047 तक का लक्ष्य
दिल्ली 2047 के पर्यावरण क्षेत्र का मुख्य लक्ष्य नवीकरणीय स्रोतों से बिजली क्षेत्र का कार्बन उत्सर्जन कम करना है। शहर में 2047 तक पूरी तरह से नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से बिजली पैदा करने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में, दिल्ली 12-14% ग्रीन पावर का उपयोग करती है और इसका लक्ष्य 2032 तक इसे 40% और 2047 तक पूरी तरह से बढ़ाना है। एक अधिकारी ने कहा कि राजस्थान से नवीकरणीय ऊर्जा के लिए एक ट्रांसमिशन लाइन राजस्थान से NCR तक बिजली निकालने में मदद करेगी और हरित ऊर्जा के माध्यम से राजधानी की भविष्य की बिजली मांग को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण होगी।

सर्कुलर इकॉनमी को बढ़ावा देने की बात
2047 के लिए तैयार किए गए विजन डॉक्यूमेंट में ‘सर्कुलर इकॉनमी’ को बढ़ावा देने की बात भी की गई है। ये ऐसी व्यवस्था है, जो कम से कम कचरा पैदा करने और ज्यादा से ज्यादा उसे इस्तेमाल करने पर जोर देती है। मतलब पुराने सामान को दोबारा इस्तेमाल करना, उनसे नया बनाना, या कचरे को रीसाइकिल करना ताकि कच्चे माल की जरूरत कम हो सके। अधिकारी के अनुसार, “दिल्ली में इलेक्ट्रॉनिक कचरा बहुत ज्यादा पैदा होता है, जो लैंडफिल पर बोझ बनता है, इसलिए सर्कुलर इकॉनमी को बढ़ावा देना जरूरी है। इसे प्रोत्साहित करने के लिए और अधिक प्रोत्साहन की आवश्यकता है।”

हेल्थ के लिए सरकार ने तय किए कई लक्ष्य
दिल्ली सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में बेहतरी के लिए कई लक्ष्य तय किए हैं, जिनमें बच्चे के जन्म के समय लिंग अनुपात, अस्पताल में होने वाले प्रसव, जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान कराना और टीकाकरण कवरेज शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए स्वास्थ्य विभाग जल्द ही कई कदम उठाएगा। एक अधिकारी ने बताया कि कई नए अस्पतालों की योजना है और आगामी बजट में इन योजनाओं को और बढ़ावा मिलने की संभावना है। इनमें से कई अस्पताल बाहरी इलाकों में बनाए जाने हैं, जिससे अस्पताल में होने वाले प्रसवों का प्रतिशत बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘हम गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं में कुपोषण की चुनौतियों को भी पोषण सामग्री में रणनीतिक बदलाव के माध्यम से दूर करना चाहते हैं।’

शिक्षा और उद्यमिता के लिए भी है प्लान
दिल्ली 2047 के एजेंडे में मौजूदा कानूनों को ठीक से लागू करके लैंगिक असमानता को दूर करना और महिला सशक्तिकरण में निवेश करना भी शामिल है। शिक्षा के क्षेत्र में, दिल्ली@2047 का फोकस उद्यमिता पर है। मौजूदा समय में 228 स्टार्ट-अप्स की संख्या बढ़ाकर, स्वतंत्रता के 100 साल वाले साल तक इसे 3,961 तक पहुंचाया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, इस साल के बजट में AAP सरकार उद्यमिता कार्यक्रमों के लिए फंड आवंटित कर सकती है। ग्यारहवीं और बारहवीं कक्षा के छात्रों के लिए चल रहे बिजनेस ब्लास्टर्स कार्यक्रम को अब कॉलेज के छात्रों के लिए भी शुरू किया जा रहा है।

वर्तमान में दिल्ली के उच्च शिक्षा संस्थानों में दाखिला लेने की क्षमता 61,600 है। सरकार की योजना इसे साल दर साल बढ़ाने की है। 2025 में ये सीटें बढ़कर 68,212 हो जाएंगी। 2026 में और बढ़कर 71,779 हो जाएंगी। 2037 तक इस क्षमता को 1,19,303 तक पहुंचाने का लक्ष्य है और आजादी के 100 साल पूरे होने पर यानी 2047 तक इसे 2,09,375 तक ले जाने की महत्वाकांक्षा है।

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